- एक पर 3.50 लाख और दूसरे पर पांच लाख मांगने का आरोप
हरिद्वार। गंगनहर कोतवाली क्षेत्र में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में दो तत्कालीन दरोगाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि एक दरोगा ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के एवज में 3.50 लाख रुपये लिए, जबकि दोबारा विवेचना शुरू होने पर दूसरे दरोगा ने इसी काम के लिए पांच लाख रुपये मांगे। रुपये नहीं देने पर शिकायतकर्ता को गोली मारने, जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप है। शिकायत मिलने के बाद एसपी देहात ने मामले की जांच की थी। जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार, पांच जुलाई 2023 को सुषमा सैनी ने निश्चय राणा और नितीश राणा निवासी ग्राम निरपुड़ा, जिला बागपत के खिलाफ गंगनहर कोतवाली रुड़की में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। उस समय मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक मनदीप सिंह कर रहे थे। आरोप है कि विवेचना के दौरान मनदीप सिंह ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर 3.50 लाख रुपये की रिश्वत ली। इसके बाद छह 2024 को मामले में फाइनल रिपोर्ट भेज दी गई।
हालांकि, बाद में इस प्रकरण की दोबारा विवेचना शुरू कर दी गई। इस बार जांच की जिम्मेदारी गंगनहर कोतवाली के तत्कालीन उपनिरीक्षक बलवंत पवार को सौंपी गई। आरोप है कि बलवंत पवार ने भी मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने रकम देने से इन्कार किया तो उसे गोली मारने, जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की शिकायत की। उसने अपने आरोपों के समर्थन में ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी अधिकारियों को उपलब्ध कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने एसपी देहात को जांच सौंपी। जांच के दौरान दोनों तत्कालीन उपनिरीक्षकों की भूमिका की पड़ताल की गई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद मनदीप सिंह और बलवंत पवार के खिलाफ गंगनहर कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।





