आजादी के बाद होश संभालने वाली पीढ़ी गीतकार राजेंद्र कृष्ण के उस गीत को सुनकर जिसके बोल थे ट्टजहां डाल—डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वह भारत देश है मेरा’ को सुनकर आत्म विभोर हो जाती थी और उसका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था तथा राष्ट्रभक्ति की भावना से मन ओतप्रोत हो जाता था उस भारत को आज के वर्तमान की पीढ़ी लाख यत्नों के बाद भी इतिहास के पन्नों में भी कहीं नहीं खोज पा रही है। 1965 से लेकर 2025 तक महज 6 दशकों में वह भारत जो सोने की चिड़िया था न जाने कब कहां और कैसे गुम हो गया? यह एक विचारणीय प्रश्न है। जब देश आजाद हुआ था तब हमारे पास न खाने को दाने थे और न सर छुपाने के लिए आशियाने थे। न स्वास्थ्य सेवाएं थी और शिक्षा की व्यवस्था संसाधनों के नितांत अभाव से देश जूझ रहा था लेकिन हर भारतवासी को अपने भारतीय होने पर इतना गर्व था कि उसे यह सोने की चिड़िया नजर आता था और आज हम जब विश्व गुरु बनने या विकसित भारत और विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करते हैं तब देश के लोगों का भारत से ऐसा मोहभंग होना कि वह देश छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता ले रहे हो तो इसके पीछे कोई तो कारण होगा? बीते 10 सालों में 15 लाख 81 हजार से अधिक लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता ली है वहीं विदेश भागने की यह दौड़ अब उस मुकाम पर पहुंच चुकी है कि 2024 में 1 साल में 2 लाख से अधिक लोग देश की नागरिकता छोड़ चुके हैं। विदेश जाना किसी आम आदमी के लिए तो संभव नहीं हो सकता है बड़ी साफ बात है कि जिन लोगों ने भी ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में जाकर बसने का काम किया है सभी मिलीनियर ही रहे होंगे। गरीब आदमी की तो आज भी स्थिति यह है कि देश के 90 फीसदी लोग तो एक बार भी हवाई सफर नहीं कर सके हैं और वह क्या विदेश जाएंगे जो सरकार के मुफ्त के 5 किलो राशन पर जीवन बसर कर रहे हैं देश को छोड़कर कहां जाएंगे। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि देश के अमीर लोग क्यों देश को छोड़कर भाग रहे हैं तो आप देश के उन सिर्फ डेढ़ दो करोड़ लोगों का सर्वे कराकर देख लो जो देश को हर साल करोडों़ रुपए टैक्स देते हैं। आपको पता चल जाएगा कि इसके पीछे कारण क्या है? सरकार जिन लोगों के टैक्स पर ऐश मौज करती है उन लोगों को टैक्स के बदले क्या कुछ देती है? इस सवाल का जवाब आपको यही मिलेगा कि सरकार इसके बदले में सिर्फ उत्पीड़न देती है। फिर ऐसे देश में कोई क्यों रहना चाहेगा जहां वह सरकार को हर साल कई करोड़ कमा कर भी दे और उसके बदले में उत्पीड़न भी झेले। कल राजस्थान के झालावाड़ से एक दुखद खबर आई कि एक स्कूल का जर्जर भवन गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई तथा कुछ बच्चे घायल हो गए। आज के हिंदुस्तान के लिए यह खबर जैसे कोई खबर थी ही नहीं। इसका कहीं कोई जिक्र हुआ न चर्चा। हां खबरों की हैडलाइन में यह खबर जरूर थी कि मोदी ने इंदिरा गांधी को पछाड़ा और वह स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक लंबे समय तक पीएम रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। अभी बीते दिनों आपने शायद देश के लाखों स्कूलों को बंद करने की खबर भी पढ़ी होगी जिसे दूसरे स्कूलों में मर्ज करना बताया गया था। बिहार में सरकार 70 हजार करोड़ का हिसाब सीएजी को नहीं दे पाई भ्रष्टाचार की इससे बड़ी प्रकाष्ठा क्या होगी। जस्टिस वर्मा के घर 50 हजार करोड़ जल गए लेकिन उन पर महाभियोग के तहत कार्यवाही न हो पूरा सरकारी तंत्र इस काम में जुटा है। न न्यायपालिका पर भरोसा कि पीड़ित को न्याय मिलेगा। फिर ऐसे देश में भला कौन रहेगा? सिर्फ वह गरीब जो लाचार व मजबूर होंगे।




