प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय सत्ता पर काबिज भाजपा की सरकार अपने कार्यकाल के 11 साल पूरे कर चुकी है। अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत उन्होंने बीते साल 9 जून को की थी। अपने पहले कार्यकाल से लेकर आज तक 11 साल के उनके कार्यकाल में देश ने कौन—कौन सी बड़ी उपलब्धियां हासिल की अब इन उपलब्धियां की सूची को लेकर भाजपा के सांसद—विधायक और मंत्री तथा कार्यकर्ता घर—घर तक जाएंगे। भाजपा नेताओं और नीतिकारों की डिक्शनरी में एक—एक चुनिंदा शब्दों, भावो और भावनाओं की रसधार प्रवाहित करने वाले हजारों वक्तव्य व नारे हैं विकल्प रहित संकल्प और संकल्प से सिद्धि तक जैसे मुहावरे किसी को भी मनमोहक लग सकते हैं। सवाल यह है कि भाजपा सरकार इन 11 सालों में (2014 से 2025 तक) कौन—कौन सी ऐसी बड़ी उपलब्धियां हासिल की है जिनके संकल्प सरकार द्वारा लिया गया और उसे पूरा करके भी दिखाया गया। 2014 का जब चुनाव हुआ था तथा भाजपा द्वारा पूरे देश में अच्छे दिन लाने के दावे किए गए थे, 100 दिन के अंदर विदेश में जमा काला धन वापस लाकर और हर एक गरीब के खाते में 15—15 लाख रुपए डालने का वायदा किया गया था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस देश के अधिसंख्यक लोगों ने मोदी की इस घोषणा पर एतबार कर लिया जिसका कारण यह था कि सदियों से गरीबी की मार झेल रही देश की जनता को इससे मुक्ति का बेसब्री से इंतजार था। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी की मार झेलने वाले देश के लोगों को लगा था कि मोदी को सत्ता सौंप कर उन्हें हर समस्या से निजात मिल जाएगी। भले ही कांग्रेस के कार्यकाल में रसोई गैस का सिलेंडर 450 और पेट्रोल 65 तथा डीजल 45 रहा हो जिसे लेकर भाजपा नेता सड़कों पर आए दिन प्रदर्शन करते दिखाई देते थे लेकिन जनता ने शायद यह कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका शासन आते ही उन्हें 95 रूपये पेट्रोल तथा 80—85 रुपए लीटर डीजल और 900 रूपये का गैस सिलेंडर मिलेगा। हर साल 2 करोड़ युवाओं को नौकरी दिलाने का संकल्प करने वाली भाजपा सरकार ने इसे कैसे सिद्ध किया और स्वरोजगार तथा पकोड़ा तलने के काम को भी रोजगार बताने वाले नेताओं के बयान खूब हाइलाइट होते रहे। भाजपा के शासनकाल में पुलवामा और पहलगाम जैसे बड़े आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर अगर गौर किया जाए तो आज हर आम आदमी को यह बात समझ आ चुकी है कि एक हमले के जवाब में पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक तथा दूसरे हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करके जिस तरह का प्रचार इनका किया गया वह भाजपा के प्रचार तंत्र पर इतनी भारी पड़ गई कि उन्हें घर—घर सिंदूर बांटने के अपने कार्यक्रम को ही रद्द करना पड़ा। इन 14 सालों में देश में जिस तरह एक बार फिर मंदिर—मस्जिद की राजनीति तथा हिंदू —मुस्लिम के मुद्दे को हवा दी गई और देश के समाज में विभाजन की खाई को गहरा और गहरा किया जाता रहा है उस पर आज सबसे अधिक चर्चा होना इस बात का प्रमाण है कि देश के लोग इन सब बातों से खुश नहीं है। सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाया जाना उसकी 11 साल की एक सबसे बड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि है लेकिन नोटबंदी से लेकरअन्य तमाम जितने भी फैसले किए गए हैं वह सभी शून्य ही साबित हुए हैं। विदेश नीति पर सरकार कितना सफल और असफल रही है इसका उदाहरण यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन में भारत के साथ कोई एक भी देश खड़ा नजर नहीं आया भले ही यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ था लोग पूछ रहे हैं कि संकल्प से सिद्धि क्या है? सरकार ने अपने 11 सालों में 11 कार्य भी क्या किए हैं जो भारत को जनता के लिए याद रखने लायक हो।



