Home संपादकीय सीजफायरः सवाल ही सवाल

सीजफायरः सवाल ही सवाल

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पहलगाम में आतंकियों की बर्बरतापूर्ण कार्यवाही का बदला लेने के लिए सरकार ने 15 दिन बाद जितने बड़े दावों के साथ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया तो देश के समूचे विपक्ष के साथ देश का हर नागरिक सरकार के समर्थन में खड़ा हो गया। क्योंकि आतंक के दंश से पूरा देश इस कदर अजीज आ चुका है कि किसी भी कीमत पर इस समस्या का स्थाई समाधान चाहता है। देश की सेना ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी सिर्फ चार दिनों में पाकिस्तान को घुटनों पर ला देने वाली इस कार्यवाही के चौथे दिन बाद अचानक अमेरिका से एक खबर आती है कि हमारे प्रयास से भारत और पाकिस्तान तत्काल सीज फायर पर सहमत हो गए हैं इसके कुछ समय बाद भारत के रक्षा सचिव पत्रकार वार्ता के लिए आते हैं और सीज फायर की औपचारिक जानकारी मीडिया और आम लोगों को दी जाती है। इस सीज फायर के फैसले से सवाल उठने इसलिए भी लाजिमी थे क्योंकि यह जंग पाक और हिंदुस्तान के बीच हो रही थी फिर कोई तीसरा देश इसकी घोषणा कैसे कर सकता है वह भी एक ऐसा देश जिसके राष्ट्रपति आतंकियों के ठिकानों पर हमले को सेमफुल कार्यवाही बता रहा हो और खुद यह कह रहा हूं कि दोनों देश सालों से लड़ते आ रहे हैं हमें उनके बीच में नहीं पड़ना है वह खुद ही अपनी समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे। लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ सीज फायर का ऐलान ही नहीं करते हैं बल्कि वह हजारों साल पुराने कश्मीर मुद्दे के समाधान का भी दावा कर रहे हैं। वह ट्रंप जिसे यह तक पता नहीं है मुद्दा हजारों साल पुराना नहीं है भारत पाक विभाजन के समय का है जिसे अभी 100 साल भी नहीं हुए हैं। क्या वह यह नहीं जानते हैं कि भारत अपने इस द्विपक्षीय मुद्दे में किसी की मध्यस्थता को बर्दाश्त न करने पर आडिग है। सीज फायर के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इसे अपनी जीत बता रहे हैं और पाकिस्तानी इस पर जश्न मना रहे हैं। इस अभियान में जब भारत अपने लक्ष्य के करीब पहुंच गया तब भारत ने सीज फायर पर सहमति क्यों दी? भारत ने कैसे भरोसा कर लिया कि अब कोई आतंकी घुसपैठ नहीं होगी। भारत में अब कोई आतंकी घटनाएं नहीं होगी? पाक अपनी जमीन से चलने वाली आतंकियों की फैक्ट्री बंद कर देगा? मोदी सरकार ने इन सवालों को क्यों नजरअंदाज कर दिया सरकार की क्या मजबूरी थी सीज फायर क्या इसका फैसला लेने में सरकार ने विपक्ष को अपने विश्वास में लिया तमाम सवाल है जिन्हें विपक्ष ही नहीं अब हर एक देशवासी सरकार से पूछ रहा है। सरकार के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर जिस तरह की निम्न स्तर की भाषा श्ौली और गाली गलाेंज लोग कह रहे हैं वह लिखे जाने लायक नहीं है। खास बात यह है कि यह सब करने वाले वह मोदी भक्त ही हैं जिन्होंने उन्हें राजनीति का भगवान बनाया है वह पूछ रहे हैं कि ट्रंप को किसने चौधरी बनाया? वह स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद उन्हें दिला रहे हैं जिन्होंने 1971 की जंग में अमेरिका कि उसे धमकी का जवाब देते हुए कहा कि तुम 60 बेडे़ भेजो या 70 हम रुकने वाले नहीं है और पाक के 93000 सैनिकों को सशस्त्र सरेडर करने पर मजबूर कर दिया था। लोग कह रहे हैं कि आप तो जीती हुई जंग हार गए आपने तो गुड का गोबर कर डाला इतिहास तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा। कोई पूछ रहा है क्या पहलगाम के वह आतंकी जिन्होंने 28 जान ली पाकिस्तान ने आपको सौंप दिए यह सीज फायर का फैसला अपने पीछे सैकड़ो सवाल छोड़ गया हैै। भारत पाक का अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों के चंगुल में फंसना भी एक सवाल है लेकिन अभी जवाब किसी सवाल का नहीं है।

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