देश के सत्ता शीर्ष पर बैठी भाजपा ने बहुमत के दम पर वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2025 को संसद से पारित जरूर करा लिया हो लेकिन इस बिल को पारित होने से वक्फ बोर्ड में व्याप्त अनियमितताओं का समाधान हो गया है या हो जाएगा अथवा मुस्लिम समाज के गरीबों को न्याय मिलेगा, जिसका हवाला भाजपा के शीर्ष नेता देकर इस बिल को लाए हैं यह दोनों ही बातें 100 फीसदी झूठ है। इस बिल का जिस तरह से पुरजोर विरोध विपक्ष द्वारा किया गया है तथा वह सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने की बात कह रहा है तथा जदयू और टीडीपी जैसे सरकार के सहयोगी दल जिनके समर्थन से यह बिल संसद में पास हो सका है उनमें अब बगावत सामने आ रही है तथा जदयू नेताओं के इस्तीफे होने शुरू हो गए हैं और उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने इस बिल के पारित होने पर इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भले ही यह बिल संसद से पास हो गया हो लेकिन यह संसद और संविधान की सर्वाेच्चता और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और इसे आने वाले दिनों में न्यायपालिका खारिज करती हुई दिखेगी। यह सब कुछ यह बताने के लिए काफी है कि यह मुद्दा खत्म नहीं हुआ है बल्कि एक गंभीर समस्या के रूप में अब शुरू हुआ है। इसके तमाम साइड इफेक्ट्स दिखने शुरू हो गए हैं और आगे भी देखने को मिलेंगे। बिल के संसद में पास होते ही आज पूरे यूपी में पुलिस हाई अलर्ट पर आ गई है। लखनऊ से लेकर नोएडा तक पुलिस प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है। जदयू के नेता कासिम अंसारी जो बिहार के मोतीहार क्षेत्र से बड़े अल्पसंख्यक नेताओं में शुमार है, ने नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। बिहार तथा आंध्र प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में जदयू व टीडीपी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है तथा इसका केंद्र की सरकार पर बड़ा प्रभाव देखा जा सकता है संसद में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन का साफ कहना है कि सत्ता में बैठे लोग संविधान व लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ काम कर रहे हैं तथा इस बिल का मकसद अल्पसंख्यकों को परेशान करना और उनके अधिकारों को छीनना ही इसका उद्देश्य है। संसद में हुई चर्चा के दौरान तमाम नेताओं द्वारा वक्फ बिल कें संशोधन में विपक्ष द्वारा दिए गए 144 संशोधनों के सुझावों को नकार दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया तथा वक्फ बोर्ड की 11 सदस्यीय समिति में सात गैर मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी व्यवस्था किए जाने पर भी आपत्ती जताई गई लेकिन सत्ता पक्ष ने उनकी किसी दलील और तर्क को तवज्जो नहीं दी। इस बिल के पास होने के बाद देश भर में कहां क्या क्रिया प्रतिक्रिया होती है अलग बात है। लेकिन इसको न्यायपालिका में चुनौती दिया जाना तय है। कल यह भी हो सकता है कि इलेक्ट्रोलर बांड की तरह इस वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2025 को भी न्यायपालिका असंवैधानिक ठहरा कर इसे रद्द कर दे लेकिन ऐसा होता भी है तो इससे संसद की मर्यादा का क्या होगा ऐसा लगता है कि अब संविधान व संसद की सर्वाेच्चता और मर्यादा की भी किसी को कोई चिंता है ही नहीं। अगर होती तो इस बिल पर पूर्व में लाये गए 2019 के संशोधन बिल की तरह आम सहमति बनाने के प्रयास किए गए होते। इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे? यह तो आने वाला समय ही बताएगा?




