उत्तराखण्ड में बढ़ते महिला अपराधों का ग्राफ न सिर्फ चिंता का विषय है अपितु पुलिस व प्रशासन के साथ सरकार के लिए भी गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। राजधानी दून के आईएसबीटी में रोडवेज की बस में एक मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग लड़की के साथ पांच लोगों द्वारा सामुहिक दुष्कर्म की जो घटना सामने आयी है वह इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि आईएसबीटी जहंा यात्रियों की रात भर आवाजाही रहती है और परिसर में 32 सीसीटीवी निगरानी के लिए लगे है। पुलिस और बस अड्डे का सुरक्षा प्रबन्धन भी सक्रिय रहता है। वहंा अगर इस तरह की वारदात को अंजाम दिया जा सकता है तो किस जगह महिलाएं सुरक्षित हो सकती है। यह एक संगठित ही नहीं बल्कि योजनाबद्ध अपराध है। एक ड्राइवर युवती को झांसा देकर जिसे लुधियाना जाना था देहरादून लेकर आता है व यहंा आकर उसके साथ इस घिनौनी वारदात को अंजाम देता है तथा अपने अन्य साथियों को भी इसमें शामिल कर लेता है भले ही अब इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले सभी आरोपी पुलिस गिरफ्त मेंं हो और कानून का शिंकजा उनके ऊपर कसा जा चुका हो लेकिन सिस्टम की खामियों को सुधारे जाने की उन जरूरतों से इन्कार नहीं किया जा सकता है जो इस तरह के घटनाओं की पुर्नरावृत्तियों को रोका जा सके। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद देवभूमि में महिला अपराधों की संख्या में लगातार हो रहा इजाफा न सिर्फ राज्य की छवि को खराब कर रहा है बल्कि शासन—प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल है। अभी रूद्रपुर की एक महिला नर्स के साथ दुराचार और हत्या का गम्भीर मामला सामने आया था। वहीं हरिद्वार जिले में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में भाजपा के नेता का नाम आरोपी के तौर पर सामने आया था। चार दिन पहले की राजधानी दून के एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट के महिला वाशरूम में कैमरा और रिकार्डिंग के लिए रखे गये मोबाइल फोन को लेकर भारी हंगामा हुआ था। जिसमें एक कर्मचारी की गिरफ्तारी भी हुई थी। दो साल पहले हुई अंकिता भण्डारी हत्याकांड की आग अभी तक शांत नहीं हुई है। इस मामले को लेकर अभी तक आंदोलन जारी है। क्याेंकि इसमें भाजपा नेताओं की संलिप्तता जुड़ी हुई है। जिस रिजार्ट से यह घटना जुड़ी हुई है वह भाजपा नेता का है और आरोपी उसका बेटा है। यह तमाम घटनाएं तो महज उदाहरण भर ही है। राज्य गठन से लेकर अब तक तमाम ऐसे जघन्य महिला अपराधों की एक लम्बी सूची है। इन दिनों देश की राजनीति में तहलका मचा देने वाला कोलकाता में महिला डाक्टर की हत्या व दुराचार की घटना चर्चाओं के केन्द्र में है। उत्तराखण्ड में आईएसबीटी की इस सामुहिक दुराचार की घटना से लेकर रूद्रपुर की महिला नर्स की हत्या व रेप को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। अब इस ताजा प्रकरण के सामने आने से उग्र प्रदर्शन व धरने हो रहे है। 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में अब इन घटनाओं की गूंज सुनाई देगी। विपक्ष इसे लेकर अत्यंत ही गम्भीर है। शासन स्तर पर भले ही लव जेहाद रोकने व महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े—बड़े दावे किये जाते रहे हों लेकिन जमीन पर महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। जिसे लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन भी कठघरे में खड़ा है। निश्चित तौर पर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक ठोस प्रयास किये जाने की जरूरत है। जिससे महिलाएं कार्यस्थल से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक स्वंय को सुरक्षित महसूस कर सकें।




