अंकिता को न्याय मिलने में देरी, कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल

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अंकिता भंडारी की हत्या को 1 साल का समय होने जा रहा है लेकिन इस हत्याकांड को लेकर राज्य के लोगों में आज भी आक्रोश बरकरार है इसके पीछे कुछ तो कारण है? अगर शासन प्रशासन पर अंकिता के परिजन लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि वह मामले को दबाने में प्रयासरत है तो वह बेवजह नहीं है। ऐसे कई सवाल हैं जो इस संदेह को पुख्ता करते हैं। इस हत्याकांड के घटनाक्रम पर अगर सिलसिलेवार गौर किया जाए तो इन सवालों का जवाब खोजने पर भी नहीं मिलता है। अंकिता भंडारी की हत्या 18 सितंबर को की गई और आरोपियों द्वारा 19 सितंबर को खुद ही राजस्व पुलिस में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। लेकिन 23 सितंबर तक राजस्व पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि राजस्व पुलिस का पटवारी आरोपियों का राजदार था और उसे इस घटना के बारे में पूरी जानकारी थी। मामले के तूल पकड़ने के बाद ऋषिकेश पुलिस द्वारा 23 सितंबर को अंकिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई और इसी दिन तीनों हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिनकी गिरफ्तारी होते ही उसी रात वनंतरा रिजाट के उस कमरे पर बुलडोजर चलवा दिया गया जिसमें अंकिता रहती थी। 24 सितंबर को यानी हत्या के 1 सप्ताह बाद चीला नहर में आरोपियों की निशानदेही पर अंकिता का शव बरामद कर लिया गया लेकिन उसका और मुख्य आरोपी का मोबाइल आज तक भी बरामद नहीं हो पाया और न एसआईटी की टीम को रिजाट से कोई अहम सबूत मिले। यही नहीं जिस वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाने की बात सामने आई थी उसका पता एसआईटी आज तक नहीं लगा सकी है और न आरोपियों का नारको टेस्ट करा सकी है। इस पूरे केस में हर कदम पर लापरवाही व देरी की क्या वजह हो सकती है, बुलडोजर चलाने से लेकर अंकिता के शव तक 1 सप्ताह बाद बरामद होने,
वीआईपी का पता न चल पाने,फोन न बरामद होने आदि आदि तमाम सवाल यही बताते हैं कि जांच एजेंसी के पास ऐसा कुछ नहीं है जो आरोपियों को सजा दिला सके। अब जहां अंकिता के हत्यारे अपनी जमानत के प्रयासों में जुटे हैं वही इस पूरे मामले में अंकिता के परिजन और आम लोग सीबीआई जांच की मांग करते-करते थक गए है। लेकिन मामले की सीबीआई जांच नहीं हो सकी है। इतने बड़े जगन्य अपराध में अगर शासन प्रशासन अपराधियों को सजा दिलवा नहीं पाता है तो यह पीड़ितों के साथ अन्याय ही नहीं सामाजिक सुरक्षा की भी बड़ी हार होगी। वहीं पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी भी कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

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