दून की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?

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राजधानी दून में हो रही ताबड़तोड़ बारिश ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम की हकीकत खोल कर रख दी है। पूरे शहर में जलभराव के कारण आम आदमी को क्या—क्या दिक्कतें और परेशानियां हो रही है इसे सिर्फ आम आदमी ही नहीं जानता है कल भारी बारिश में राजधानी की सड़कों पर उतरी जिलाधिकारी सोनिका सिंह ने भी खुद अपनी आंखों से देखा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अगर इसका संज्ञान लेते हुए यह बात कही है कि स्मार्ट सिटी के कामों में तेजी लाई जाएगी, तो इसका मतलब भी साफ है कि पूरे हालात से वह स्वयं भी अवगत हैं। राजधानी दून की इस बदहाल स्थिति के लिए नगर निगम ही जिम्मेदार है या स्मार्ट सिटी के लिए काम करने वाली कार्यदाई संस्थाएं, यह एक अलग विषय है। जिलाधिकारी सोनिका सिंह जो खुद स्मार्ट सिटी की सीईओ हैं और मेयर सुनील गामा भले ही इस हालात के लिए इसका ठीकरा किसी के भी सर फोड़े लेकिन शहर की दुर्दशा के लिए स्मार्ट सिटी के काम जो समय पर पूरे नहीं किए गए और नगर निगम की लापरवाही, किसी को भी कम जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। वर्तमान समय में राजधानी दून की सड़कों की जो हालत है तथा जल निकासी की जो व्यवस्था है उसे रातों—रात दुरुस्त नहीं किया जा सकता है। अब भले ही खुद मुख्यमंत्री धामी जो चाहे वह प्रयास कर ले और जिलाधिकारी भी जो चाहे कोशिशे कर लें। जो कुछ होगा वह मानसून की विदाई के बाद ही किया जाना संभव है इस बारिश के मौसम में किसी भी तरह का निर्माण कार्य संभव नहीं है। हां यह जरूर है कि शहर की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार हर अधिकारी और हर विभाग की जिम्मेदारी जरूर तय होनी चाहिए। ऐसे क्या कारण रहे जिनकी वजह से राजधानी के लोगों के सामने यह संकट खड़ा हुआ और कौन—कौन लोग हैं जिनकी लापरवाही के कारण स्मार्ट सिटी के काम समय पर पूरे नहीं हो सके। सरकारी विभागों के बीच तालमेल का अभाव भी इसकी एक बड़ी वजह रहा है। स्मार्ट सिटी के कामों के कारण सड़कों, गलियों तथा बाजारों की सड़कों को खोदकर तो रख दिया गया लेकिन उनकी मरम्मत का काम क्यों नहीं किया गया, क्यों इसको स्मार्ट सिटी की कार्रवाई संस्थाओं द्वारा इस काम को पीडब्ल्यूडी के ऊपर छोड़ दिया गया। स्मार्ट सिटी के लिए क्यों बार—बार इन सड़कों को खोदा जाता रहा एक ही बार में एक काम ठीक से क्यों नहीं किया जा सका? ऐसे अनेक सवाल है जिनकी जवाबदेही से बचने के लिए सभी एक दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं। स्मार्ट सिटी के कामों के समय पर पूरा न होने के पीछे नाकाबिल इंजीनियर और कार्यदायी संस्थाएं ही है। जिनकी लापरवाही के कारण काम सिर्फ समय पर पूरे ही नहीं हो सके अपितु इनकी लागत कीमत में कई गुना अधिक की वृद्धि हुई है। अब जब सारा खेल खराब हो चुका है और लोगों की जान मुसीबत में फंस चुकी है तो शासन—प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। जिन लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस रहा है और जो लोग सड़कों पर दुर्घटनाओं में घायल हो रहे हैं उनके इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा और उनकी परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार है? खास बात यह है कि यह समस्या एक दिन की नहीं है अभी पूरे मानसूनी सीजन से लोगों को दो—चार होना है। देखना होगा कि इससे अभी आने वाले समय में और कितनी अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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