योगी का विकास मंत्र

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उत्तराखंड ने अपने श्ौशव और किशोर काल के 20 सालों में भले ही विकास के कई कोस तय किए हो लेकिन इस विकास को न तो पर्याप्त कहा जा सकता है और न उससे संतुष्ट हुआ जा सकता है। बीते कल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आज (वर्तमान) के उत्तराखंड के बारे में ऐसी अनुभूति का जिक्र किया था। सच यह है कि राज्य बनने के बाद उसके विकास की ठीक से कोई रूपरेखा तैयार की ही गई होती और उस पर ईमानदारी से काम किया गया होता तो तस्वीर इससे भी कहीं अधिक बेहतर हो सकती थी। योगी आदित्यनाथ राज्य के नेताओं और अधिकारियों को जो विकास का मंत्र देकर गए हैं वह भले ही कुछ नया न हो लेकिन उसे नए तेवर और कलेवर देकर नया बनाया जा सकता है। योगी ने चार धामों और चार धाम यात्रा को और अधिक उत्कृष्ट बनाने की सलाह देते हुए कहा गया कि यह हमारी पहचान है। उन्होंने अयोध्या, काशी और मथुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और साथ ही उन्होंने वाटर स्पोर्ट्स, आइस स्पोर्ट्स, योग और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे कई ऐसी पर्यटन विधायें गिना दी जो राज्य में बारहमासी पर्यटन का आधार बन सकती है। उन्होंने यम्केश्वर में बाबा रामदेव के वैलनेस सेंटर का उदाहरण भी दिया, उनका साफ कहना था की पर्यटन को अगर समुचित तरीके से विकसित कर लिया जाए तो राज्य में न बेरोजगारी रहेगी न पलायन होगा, न गरीबी रहेगी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि वह अभी सीखने की प्रक्रिया में हैं तथा योगी को अपना आदर्श मानते हैं। देखना यह होगा कि वह राज्य के विकास का जो मंत्र देकर गए हैं वह उस पर अपने कार्यकाल में कितना काम कर पाते हैं। राज्य गठन से लेकर अब तक के 20 सालों में राज्य के नेताओं ने बातें तो बहुत सारी की है वह राज्य को कभी ऊर्जा प्रदेश बनाने की बात करते आए हैं तो कभी पर्यटन प्रदेश तो कभी देश की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की बात करते रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि इन 20—21 सालों में उन्होंने प्रदेश को बनाया क्या है? राज्य की शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क, बिजली पानी जिसमें भी थोड़ा विकास दिख रहा है वह राज्य सरकारों का किया हुआ विकास नहीं है बल्कि केंद्रीय योजनाओं और पीएम मोदी का किया हुआ विकास है। आज सूबे के नेता जिस रेल की बात कर रहे हैं या चार धाम के विकास और सड़कों के चकाचक होने की बात कर रहे हैं वह केंद्र की बदौलत है जो दो—चार मेडिकल कॉलेज बन गए हैं या घर—घर नल पहुंच गए वह सब केंद्र की सौगात है। सवाल यह है कि इस सूबे के नेता इस राज्य के लिए कभी कुछ करेंगे भी या फिर बातें ही करते रहेंगे।

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