भर्ती घोटालों का भंडारण

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यूं तो उत्तराखंड राज्य अपने गठन से घोटालों के लिए चर्चाओं के केंद्र में रहा है। लेकिन बीते साल से लेकर अब तक जिस तरह से भर्तियों में फर्जीवाड़ों की खबरें आम रही हैं उससे ऐसा लगता है कि उत्तराखंड राज्य में अब कोई ऐसी भर्ती रही ही नहीं है जिसमें धांधली न हुई हो। भले ही वर्तमान धामी सरकार अपनी साख बचाने के लिए इन घोटालों की जांच कराने पर मजबूर हो या फिर भर्ती में फर्जीवाड़े के दोषियों पर कार्रवाई कर रही हो लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिरकार सरकार किस—किस भर्ती की जांच कराएगी। और यह जांच कहां तक पहुंचेगी, इसके क्या नतीजे होंगे? मुख्यमंत्री धामी अब यह बात भी गर्व से बताते नजर आते हैं कि अब तक 55 लोगों की गिरफ्तारियां भर्ती घोटालों में की जा चुकी है तथा दर्जनभर अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है। उनका कहना है कि पहले इस पर सिर्फ चर्चा होती थी अब कार्यवाही हो रही है। लेकिन यह मुद्दा अब इतना बड़ा रूप ले चुका है कि जिसका कोई आदि और अंत दिख ही नहीं रहा है आए दिन एक नई कड़ी इन भर्ती घोटालों में जुड़ती जा रही है। विधानसभा और सचिवालय में बैकडोर भर्तियों से लेकर जो अन्य भर्तियां हुई है उनमें भी धांधली हुई है। अब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 2021 में जिन भर्तियों की विज्ञप्ति जारी हुई थी तथा 2022 में जिनके लिए परीक्षा हुई थी उन 32 भर्तियों की जांच के लिए भी समिति का गठन कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी इससे पहले डीके कोटिया समिति की सिफारिश पर विधानसभा में हुई 2015 के बाद 228 बैक डोर भर्तियों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी हैं। भले ही अभी 2015 से पहले हुई भर्तियों पर वह कोई निर्णय नहीं ले पाई है लेकिन डीके कोटिया कमेटी में यह सभी भर्तियां अवैध घोषित की जा चुकी है भले ही इन 164 के करीब कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका हो लेकिन उनकी नियुक्तियां वैध नहीं कही जा सकती है। दरअसल इन भर्ती घोटालों ने अधीनस्थ चयन आयोग और लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता तो समाप्त कर ही दी है इसके साथ ही पूरा सिस्टम और सभी सरकारें अपनी साख गंवा चुकी हैं। भर्ती घोटालों के खुलासों को लेकर अपने बचाव में सूबे के नेताओं के पास कुछ भी कहने सुनने को शेष नहीं बचा है। वहीं प्रदेश के युवाओं का नेताओं और संस्थाओं से पूरा भरोसा उठ चुका है। एक तरफ सरकार आने वाले समय में युवाओं को बड़े पैमाने में रोजगार देने और भर्तियां कराने की बात कह रही है लेकिन भर्तियां कौन सी संस्था कराएगी और भर्तियों में फिर कोई धांधली नहीं होगी इसकी गारंटी अब कोई देने को तैयार नहीं है। भविष्य में होने वाली भर्तियों को निर्विघ्न और घोटाले रहित कराना अब सरकार के लिए सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य बन कर रह गया है।

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