हमाम में सब नंगे

0
50


उत्तराखंड राज्य में भर्तियों में होने वाले भ्रष्टाचार के हमाम में पूरा सिस्टम नंगा हो चुका है। उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग द्वारा कराई गई तमाम भर्तियों में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के उजागर होने के बाद अब उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा कराई जाने वाली भर्तियों में धांधली का भंडाफोड़ होने से न सिर्फ आयोगों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है बल्कि सरकार की साख भी दांव पर लग गई है। यूकेएसएसएससी द्वारा कराई गई स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक होने का जो मामला शुरू हुआ था उसकी जांच जैसे जैसे आगे बढ़ती गई एक के बाद एक भर्तियों के घोटाले उजागर होते गए। सरकार ने अपनी साख बचाने के लिए सख्ती जरूर दिखाई और आरोपियों की गिरफ्तारियों से लेकर उनकी संपत्तियों की कुर्की तक हुई तथा अधीनस्थ चयन आयोग से भर्तियों का काम छीन कर लोक सेवा आयोग को दे दिया गया लेकिन लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई पटवारी लेखपाल भर्ती का भी पर्चा लीक होने से सरकार की पूरी कवायद एक ही झटके में धराशाही हो गई है। भर्तियों में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने और भर्तियों को पारदर्शी बनाने का दावा करने और यह कहने वाले की अब भर्तियों में भ्रष्टाचार करने वाले अब ऐसा करने के बारे में सोच भी नहीं सकेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है। सवाल यह है कि आयोग की निष्ठा पर अब तक सभी को भरोसा था जब वह भी समाप्त हो चुका है तो भला अब किस पर भरोसा किया जा सकता है। आगे की भर्तियां अब किस आयोग से कराएंगे? उत्तराखंड लोक सेवा आयोग भले ही बीते कल हुए इस खुलासे से पहले तक बेदाग रहा हो लेकिन बेदाग था नहीं। क्योंकि आयोग के अनुभाग सचिव की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ में यह भी पता चला है कि यह खेल 2018 से चल रहा था। जेई—एई और प्रवक्ताओं की भर्तियों में धांधली हुई है जिसकी अब जांच कराने की बात हो रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिन दागों को धोने के प्रयास में जुटे थे वह कितने जिद्दी दाग हैं अब यह साबित हो चुका है। उनका कोई भी सख्त कानून या कारवाही का इन पर कोई असर होने वाला नहीं है। उत्तराखंड राज्य का गठन किस लिए हुआ था? यह सवाल पूछने वालों को उनके इस सवाल का जवाब मिल चुका होगा। राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक सभी क्षेत्रों में चाहे वह शिक्षा का हो या स्वास्थ्य का, जमीन का हो या जंगल का अथवा भर्तियाें, हर जगह सिर्फ लूट ही लूट होती रही, भ्रष्टाचार जैसे राज्य के रगों में खून की तरह बह रहा है। इस खून को राज्य से निकालना अब असंभव हो गया है। भर्तियों में भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों की कमाई करने वाले भले ही सैकड़ों में हो लेकिन वह राज्य के करोड़ों युवाओं के जीवन और कैरियर को बर्बाद कर चुके हैं इस नुकसान की भरपाई क्या कोई सरकार और नेता कर पाएगा? सच यह है कि प्रदेश के युवाओं को इन नेताओं को सबक सिखाने की जरूरत है। वर्तमान सरकार ने इस मामले में रातों—रात गिरफ्तारी व परीक्षा रद्द और परीक्षा की नई तारीख घोषित करने की तत्परता दिखाई है वह सिर्फ अपनी नाकामी पर पर्दा डालने का प्रयास ही है इसके सिवाय कुछ नहीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here