विनाश का विकास

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जोशीमठ में व्यापक स्तर पर हो रहे भू—धसाव की घटना ने राज्य ही नहीं केंद्र सरकार के सामने भी एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। इस भू—धसाव ने सिर्फ जोशीमठ नगर के अस्तित्व को ही खतरे में नहीं डाल दिया है जिसके विस्थापन की चुनौती सामने खड़ी है। अपितु पूरे पहाड़ के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगा दिया है। जिस विकास को लेकर नेता फूले नहीं समा रहे थे उन्हें अब यह समझ आने लगा है कि इस पर्वतीय राज्य में चल रही बड़ी—बड़ी विकास योजनाएं कितनी बड़े विनाश का कारण बनने वाली हैं। बात चाहे विष्णु गाड जैसी बड़ी बिजली परियोजनाओं की हो जिसके लिए तपोवन तक 12 किलोमीटर लंबी सुरंग एनटीपीसी द्वारा बनाई जा रही है। बल्कि ऑल वेदर रोड जिसका निर्माण कार्य सालों से चल रहा है अथवा उस ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन की जिस पर अभी काम शुरू हुआ है इन सभी बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए पहाड़ों में कितनी तोड़फोड़ की जा चुकी है या आने वाले समय में की जानी है कितने पेड़ों को काटा जा चुका है या काटा जाना है कितनी नदियों में पहाड़ काटकर उनका मलवा फेंका जा रहा है और उनके प्रवाह को बाधित किया जा रहा है इसका कोई हिसाब नहीं है। सभी लोग बस यह देख रहे हैं कि सड़कें कितनी चौड़ी बन गई, कितने पुल बन गए, कितनी सुरंगे बन गई और इन सड़कों और पहाड़ों के शहरों में कितने बड़े—बड़े होटल और रिजार्ट बन गए बहुमंजिला इमारतें महज दो दशक में बन गई। लोग सोच रहे हैं कि अगर विकास की गति यही रही तो आने वाले 20 साल बाद तो पूरा पहाड़ चमकता दमकता पर्यटन राज्य बन जाएगा। कोई इसे भारत का स्विजरलैंड बनाने की बात कर रहा है तो कोई इसे दूसरा गोवा होने का दावा कर रहा है। लेकिन इस विकास के पीछे छिपा विनाश अभी भी किसी को नजर नहीं आ रहा है उत्तरकाशी का वरणावत पहाड़ दरक रहा है जिसका कोई इलाज हम नहीं कर पा रहे हैं। अब जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में है क्या इस पूरे शहर का विस्थापन किया जाना सरकार के लिए आसान काम होगा। सिर्फ शहर ही नहीं खेत—खलियान, बाग बगीचे सभी भू धसाव की जद में हैं। किसी को यह तक समझ नहीं आ रहा है कि इसका कारण क्या है? यह हाल अभी भले ही जोशीमठ का सही लेकिन जिस तरह से पहाड़ को खोदा जा रहा है आने वाले समय में ऐसा ही हाल पूरे पहाड़ का हो सकता है। इसके संकेत अब मिलने शुरू हो चुके हैं। टिहरी डैम से लेकर अब तक विकास योजनाएं भावी भविष्य का बड़ा संकेत है। जिन्हें समझे जाने की जरूरत है। केदार पूरी और बद्रीनाथ में जो निर्माण कार्य हो रहे हैं सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। उन सभी कार्यों से राज्य में अब सभी निर्माण कार्यों पर रोक की मांग उठ रही है। दरअसल हमें विकास की दौड़ ने अंधा बना दिया जिसके कारण हम उत्तरकाशी के भूकंप और केदारनाथ जैसी आपदा की अनदेखी करते रहे हैं। जिसके नतीजे अब आने शुरू हो गए हैं।

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