एआई इंडिया इंपैक्ट समिट जिसका आयोजन इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली में हो रहा है जिसमें बिलगेट्स जैसे लोग मुख्य वक्ता हैं और पीएम मोदी जिसके जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत को विश्व गुरु साबित करने का प्रयास कर रहे हैं उस विश्व स्तरीय आयोजन में जिसमें विश्व के तमाम देशों द्वारा शिरकत की जा रही है। उसमें बीते कल कुछ ऐसा घटित हो गया जिसे लेकर अब विश्व भर में थू—थू हो रही है। इसके लिए कौन जिम्मेवार है क्या वह गलगोटिया यूनिवर्सिटी जिसने चीन में बने एक एआई डांग को अपना निजी एक्सीलेंट प्रोडक्ट बताया गया या फिर वह आई टी मिनिस्टर पीयूष गोयल और हमारा वर्तमान का वह पूरा सरकारी सिस्टम जो वर्तमान में झूठ तथा फरेब व फर्जीवाड़ो को अपनी सफलताओं का आधार सिद्ध करने में आमादा है। दोषी कोई भी हो हम जानते हैं कि यह निर्लज्जता की हदें पार कर चुके लोग इतनी बड़ी घटना और अंतरराष्ट्रीय बेज्जती के बाद भी न तो कोई मंत्री अपने पद से इस्तीफा ही देगा और न किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी गलगोटिया यूनिवर्सिटी यह वही यूनिवर्सिटी है जिसे मोदी अपने द्वारा पुरस्कृत कर चुके हैं तथा इसके द्वारा 350 करोड रुपए अपने रिसर्च कार्यों पर खर्च की जाने की बात कही जाती है। हैरानी की बात यह है कि यूनिवर्सिटी की प्रो. नेहा सिंह ने एक दिन पहले जिस एआई डॉग का परिचय उरियान के रूप में देकर दूरदर्शन के संवाददाता को इसे अपनी गलगोटिया यूनिवर्सिटी का एक्सीलेंस प्रोडक्ट बताया गया था वह अब इससे साफ इनकार कर रही हैं क्योंकि अब इसके सच की पुष्टि खुद चीन की उस कंपनी ने भी कर दी है जिसने 2 साल पहले इसका निर्माण किया था। तथा वह इसे 1600 डालर से लेकर 2800 डॉलर में तक विश्व भर के देशों को बेच रही है। हास्यास्पद बात यह है कि इस चीनी एआई डॉग पर लिखे गए चीनी कंपनी के नाम को इससे हटाकर इसे अपना उत्पाद बताया जा रहा है। आईटी मिनिस्टर पीयूष गोयल जिन्होंने इसे लेकर 17 फरवरी को इसे भारत की संप्रभुता से जोड़कर बड़ी कामयाबी बताया गया था अब उन्होंने इस प्रकरण पर माफी मांगते हुए अपना पोस्ट हटा लिया गया है लेकिन यह चीन निर्मित एआई डॉग अब इस समिट के लिए बने पोस्टर पर मौजूद रहकर तथा उन विज्ञापनों में छपी फोटो जो अखबारों को दिए गए थे आईटी मिनिस्टर और मोदी सरकार का मुंह चिढ़ा रहा है और पूछ रहा है कि क्या इसी तरह झूठ फरेब और दूसरे देशों के उत्पादों की चोरी करके आप विश्व गुरु बनेंगे। पीयूष गोयल ने पोस्ट तो हटा दी मगर जो थू—थू इसे लेकर विश्व भर में हो रही है उसका क्या होगा इस एआई समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्टाल हटाने से क्या इसकी भरपाई हो जाएगी। भाजपा की वर्तमान सरकार ने एजुकेशन मिनिस्ट्री का नाम बदलकर एचआरडी मिनिस्ट्री कर दिया गया तथा भर्तियों में मनमानी का हायर एजुकेशन का जो बंटाधार किया गया है उसे सुधार पाना संभव नहीं है। सवाल इस बात का है कि जिन लोगों को नकल की भी अकल न हो वह और कर भी क्या सकते हैं। झूठ फरेब और इवेंट मैनेजमेंट द्वारा इस सच को कब तक छुपाया जा सकता है यह विचारणीय है।


