उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा चलाये जा रहा सत्यापन अभियान की सच्चायी क्या है इसकी बानगी बीते रोज राजधानी देहरादून के राजपुर रोड में हुए विक्रम शर्मा नामक व्यक्ति की हत्या के बाद सामने आया है। अब तक की गयी पुलिस की छानबीन में पता चला है कि विक्रम शर्मा झारखण्ड का एक नामचीन गैंगस्टर था जिस पर हत्या सहित अन्य संगीन अपराधो के 50 से अधिक मुकदमें दर्ज थे। सोचनीय सवाल यह है कि आखिर वह मित्र पुलिस के सत्यापन अभियान के रडार पर अब तक क्यों नहीं आया था। इसका सही जवाब यह है कि मित्र पुलिस का यह सत्यापन अभियान सिर्फ मलिन बस्तियों के इर्द—गिर्द तक ही सीमित रहता है। पाश इलाकों में जाने से मित्र पुलिस भी कतराती है। जबकि राजधानी देहरादून में अब तक बाहरी राज्यों के कई बड़े बदमाशों के छिपकर रहने के कई मामले सामने आ चुके है। जिनमें से एक मामला तो इतनी सुर्खियों आया था कि मित्र पुलिस की कार्यश्ौली पर देश भर में चर्चाए हुई थी। यहंा सहस्त्रधारा रोड पर पंजाब की बुडै़ल जेल में हमला कर आंतकियों को छुड़ाने वाला अपराधी निवास करता था। यही नही कुछ वर्ष पूर्व बिहार पुलिस द्वारा देहरादून के बसंत बिहार में छापेमारी कर वहंा के एक नामी गिरामी बदमाश को गिरफ्तार किया गया था। जिस पर कई हत्यायों के केस दर्ज थे। कश्मीर के कुछ आंतकियों के तार भी पूर्व में राजधानी देहरादून से जुड़ चुके है। ऐसे में सवाल उठता कि क्या मित्र पुलिस का सत्यापन अभियान सही तरीके से चल रहा है? पुलिस प्रशासन को अब अपनी इस तरह की गलतियो को सुधारने की जरूरत है। सत्यापन अभियान को अगर सही तरीके से चलाना है तो मित्र पुलिस को पाश इलाके भी खंगालने होगें नहीं तो इस तरह की वारदाते बार बार सामने आती रहेगी? और पुलिस की कार्यश्ौली पर सवाल उठता रहेगा।




