एक अच्छी पहल

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यूं तो उत्तराखण्ड राज्य के हर शहर व कस्बों में सरकारी सम्पत्तियों पर पोस्टर बैनर लगाना आम बात हो चुकी है। लेकिन क्या यह सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाना नही है? इस परिपाटी के खिलाफ धर्मनगरी हरिद्वार के जिलाधिकारी मयुर दीक्षित द्वारा बड़ा कदम उठाते हुए अब सरकारी सम्पत्तियों पर पोस्टर बैनर लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिये गये है यह एक अच्छी पहल है। जिस पर हरिद्वार जिले में कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है और इसके फलस्वरूप नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। सड़कों, दीवारों व सार्वजनिक तथा सरकारी सम्पत्तियों में पोस्टर—बैनर लगाने के मामलों मं अगर राजधानी देहरादून की बात की जाये तो यहंा तो हर तीसरे घर में एक नेता दिखायी देता है जिसके पोस्टर बैनर राजधानी देहरादून की सड़को पर दिखायी देना कोई अचरज का विषय नहीं है। सवाल यह है कि राजधानी देहरादून को जिसको स्मार्ट सिटी बनाये जाने की श्रेणी में रखा गया है और जिसे लोग दशकों से ‘सुन्दर दून—साक्षर दून’ का स्लोगन देते रहे है क्या वह अब ‘सुन्दर दून’ रह चुका है। यहंा हर सड़क—चौराहों में नेताओं के पोस्टर बैनरों की भरमार हो चुकी है। जिससे राजधानी देहरादून की सुन्दरता खराब हो रही है। राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों, विधायकों तथा पुलिस—प्रशासन के आधिकारियों का आवागमन रोज की बात है लेकिन इन जिम्मेदार लोगों की भी नजरे इन पोस्टर—बैनरों पर नहीं पड़ रही है जो राजधानी की सुन्दरता पर काले दाग की तरह है ,यह आश्चर्य का विषय है। जबकि राजधानी की हर सड़कों व चौराहो तथा सरकारी सम्पत्तियों पर लगने वाले यह पोस्टर—बैनर शासन—प्रशासन का मुंह चिढ़ाते दिखायी देतेे है। धर्मनगरी हरिद्वार की सुन्दरता को बनाये रखने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा इन पोस्टर बैनर लगाने वालों के खिलाफ जो मुहिम शुरू की गयी है वह काबिले तारीफ है और यह एक अच्छी पहल है। राजधानी देहरादून में भी इस तरह की कार्यवाही की जरूरत है इसे जिले के अधिकारियों को समझने की जरूरत है। नहीं तो पहाड़ों की वादियों में बसा यह देहरादून कभी सुन्दर दून नही रह सकेगा?

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