देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा इस मामले के सभी तीन आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। इस फैसले को लेकर अंकिता भंडारी की मां से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा तक अपनी प्रतिक्रियाएं दी गई। फैसला सुनने के बाद अंकिता की मां ने रोते—रोते कहा कि वह इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने आरोपियों को फांसी की सजा की मांग करते हुए कहा कि उनकी आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब आरोपियों को फांसी की सजा होगी साथ ही उन्होने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए उस कथित वीआईपी को भी सजा दिलाने की मांग की जिसका जिक्र अंकिता द्वारा अपनी पोस्ट में किया गया था। उधर सीएम धामी का कहना है कि जो भी हमारी बेटियों के साथ ऐसा घृणित कृत्य करेगा चाहे वह कोई भी हो उसको ऐसी ही सजा मिलेगी हमने इस लड़ाई में अंकिता के परिवार की भरपूर सहायता की है। पहाड़ की बेटियों की अस्मिता से जुड़े इस अंकिता भंडारी केस का सबसे अहम पहलू यही था कि इस केस का मुख्य आरोपी पुलकित आर्य का परिवार भाजपा और सत्ताधारी पार्टी की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ था इसलिए पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के सवाल पर हर कोई आशंकित था तथा पूरे राज्य की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई थी। अंकिता की हत्या के कारणों में उनका शारीरिक शोषण किए जाने तथा किसी वीआईपी गेस्ट को स्पेशल सर्विस देने के लिए दबाव बनाया जाना और उनके द्वारा इनकार किया जाना था इसलिए भी इस केस का फैसला पहाड़ के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण था। खास बात यह है की जांच का स्तर भले ही कुछ भी रहा हो लेकिन उसमें पुलिस या वह एसआईटी की टीम उस खास गेस्ट तक नहीं पहुंच पाई जिसे खुश करने की कीमत अंकिता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। जहां तक इन आरोपियों के खिलाफ सबूतों की बात थी भले ही उन्हें मिटाने में कोई कमी उठाकर नहीं रखी गई हो फिर भी पुलकित आर्य का पहले खुद ही अंकिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाना और गिरफ्तारी के बाद उन आरोपियों की निशानदेही पर ही अंकिता का शव चीला नहर से बरामद किया जाना ही पूरे केस के खुलासे के लिए काफी था। भले ही निचली अदालत ने अभी इन आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुना दी गई हो लेकिन इस फैसले के बाद वह इस बात को लेकर पूरी तरह से आशवस्त है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक वह इस कानून की लड़ाई को लड़ेंगे और जीत जाएंगे। यह अलग बात है कि भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है लेकिन यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। अभी पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर अंकिता मामले को लेकर प्रदेश के लोगों में रोष व्याप्त है। लोग सड़कों पर है और एक बार फिर इस मामले को लेकर सीबीआई जांच की मांग की जाने लगी है। क्योकि पिछले कुछ दिनों से वीआईपी के बारे में सोशल मीडिया पर बहुत सारा मामला सुर्खियों में है। देखना होगा कि पहाड़ की बेटी अंकिता को कब तक पूर्ण न्याय मिल पाता है।




