अलविदा 2025

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अब भूल जाइए 2025, आपने वह गाना तो सुना होगा ट्टजो चला गया उसे भूल जा, जी हां 2025 भी चला जा चुका है और आपके दरवाजे पर 2026 एक नया इतिहास लिखने के लिए आपके घर के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है उसका स्वागत कीजिए और उसकी आवाज सुनने की कोशिश भी कीजिए। नवागन्तुक बच्चे की किलकारियों से घर आंगन गुंजायमान होता है तो उसे वक्त सभी को एक अद्भुत सुखद अनुभूतियां होती है। याद कीजिए 2014 के उस दिन को जब प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने देश की सत्ता संभाली थी। देश के हर एक नागरिक को ऐसा लग रहा था कि ट्टदुख भरे दिन बीते रे भ्ौया अब सुख आयो रे। लेकिन आजादी के अमृत काल की इस बेला में हर कोई अपने आप को लुटा—पिटा और लाचार तथा परेशान महसूस कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इससे नहीं बच सके हैं 2014 कि उनकी कोई तस्वीर निकाल लीजिए और 2025 की यह फर्क आपको खुद समझ आ जाएगा। बीते 11 साल उनके कार्यकाल के जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुके हैं उन्हें न तो भाजपा बदल सकती है और न वह संघ बदल सकता है जिसे अभी इसी साल मोदी ने उसके जयंती वर्ष पर दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताया था। आज स्थिति ठीक वैसी ही है जो ट्टअब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत, जैसी ही है। वक्त ना तो किसी का इंतजार करता है और न किसी के लिए ठहरता है भले ही वह आज भी अपने 0.3 के कार्यकाल में खुद ही मुख्य सेवक की कुर्सी पर बैठे हो और उन्होंने अपने कार्यालय का नाम भी सेवा तीर्थ रख लिया गया हो लेकिन उनके 11 साल के कार्यकाल के लिए किए गए तमाम फैसले देशवासियों और देश की अदालतों द्वारा गलत तथा गैर संवैधानिक ठहराए जा रहे हैं उनकी विफलता का कहानी खुद बयंा करते हैं। नोटबंदी से लेकर जीएसटी और चुनावी बांड के अलावा देश के बड़े—बड़े प्रतिष्ठानों को चंद कारोबारियों के हाथों में सौंपने का जो कारनामा उनकी सरकार द्वारा किया गया है उससे देश के एम एस एम ई सेक्टर पूरी तरह तबाह हो गया है। देश के युवा बेरोजगार दर—दर की ठोकरे खा रहे हैं भ्रष्टाचार और महंगाई अपने चरम पर है तथा समाज में क्षेत्र, धर्म और जाति के नाम पर जो नफरत का तांडव देखा जा रहा है वह देश तथा समाज के लिए किसी सुभता का सूचक नहीं है। रही सही कोर कसर भाजपा और उनके अनुषांगिक दलों के कार्यकर्ताओं के उत्पात ने पूरी कर दी है अपने आप को चाल चरित्र और अनुशासित बताने वाली इस पार्टी के नेताओं के महिलाओं के साथ दुष्कर्म के कारनामों ने इन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। बात चाहे उन्नाव रेप कांड की हो या फिर उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड की भाजपा नेताओं के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। अभी दून में त्रिपुरा के एक छात्र की नस्लिीय संघर्ष में हत्या तथा देशभर में क्रिसमस पर हिंदूवादी संगठनों का तांडव तथा तोड़फोड़ जिसकी खबरें न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अखबारों की पहले पन्नों की पहली खबर बन रही है और पूरे विश्व में भारत की छवि खराब हो रही है। इसके लिए कोई और नहीं खुद मोदी और उनकी सरकार जिम्मेदार है। विश्व में शुरू हुए टैरिफ ने भी भारत की कमर तोड़ दी है जिस अमेरिका भारत द्वारा सबसे अधिक निर्यात किया जाता है उसने 50 फीसदी का टैरिफ ठोक दिया है। यह है हमारा नया भारत इस पर गर्व की करिए।

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