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यह जहर फिजाओं में किसने घोला है?

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देश की फिजाओं में नफरत, अहंकार और असुरक्षा का यह जहर किसने घोला है? बीते एक दशक में क्या सत्ता की निरंकुशता ने सभी हदें पार कर दी है? ऐसे ही तमाम सवालों का जवाब आज हम अपनी इस संपादकीय में हालिया कुछ घटनाओं की रोशनी ढूंढने का प्रयास करेंगे। यूं तो उन्नाव रेप कांड के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की जमानत और सजा पर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगा दिए जाने की खबर सबसे बड़ी है लेकिन कुछ अन्य बातें या खबरें इससे भी कहीं अधिक बड़ी है। सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश सतना क्षेत्र का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें अशोक सिंह नाम का एक व्यक्ति जो भाजपा का पार्षद है जो एक महिला की दुकान पर जाता है जिसके साथ वह पहले भी बलात्कार कर चुका था महिला रोती है गिड़गिड़ाती है और वीडियो बनाने तथा वायरल करने की धमकी देती है तो वह कहता है कि कर लो क्या करोगी मेरा कोई क्या कर लेगा हर जगह हमारी सरकार है मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है? अब करते हैं कुलदीप सिंगर रेप केस की बात। खबर यह नहीं है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया जिस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई खबर यह है कि जब पीड़िता अपनी मां के साथ जंतर—मंतर पर धरना देने पहुंची थी तो यहां कुलदीप सिंगर की एक समर्थक महिला भी साथ आई सपोर्ट में कुलदीप सेंंगर लिखा पोस्टर लेकर पहुंच गई थी लोगों ने जब उससे पूछा कि अगर तुम्हारी बेटी के साथ ऐसी घटना होती क्या तब भी तुम कुलदीप सेंगर का सपोर्ट कर रही होती इस सवाल को सुनते ही यह महिला वहां से भाग खड़ी हुई। इसका नाम बरखा बताया जा रहा है जिसकी एक फोटो पीएम को राखी बांधते हुए वायरल हो रही है। यह तस्वीर की किस महानता को दर्शाती है। सेंगर की समर्थक ऐसी महिलाओं को सोचने की जरूरत है। इस महिला समर्थन की बात छोड़िए महिला पहलवानों के शोषण के आरोपी रह चुके बृजभूषण तथा साक्षी महाराज तथा अपने आप को ओबीसी नेता बताने वाले राजभर जो सेंगर कांड पर भद्दी हंसी हंसते दिखाई देते हैं इन्हें कुछ तो शर्म आनी चाहिए कि वह किस पर हंस रहे हैं। उत्तराखंड का अंकिता भंडारी कांड इसका एक अन्य उदाहरण है। जिसमें वीआईपी का नाम उजागर करने वाली महिला को तो पुलिस तलाश रही है तथा उसे जेल भिजवाने की तैयारी की जा रही है लेकिन उसके खुलासे की सत्यता की जांच करने के लिए कोई भी आगे आने को तैयार नहीं है। क्या यह अजीब बात नहीं है कि ऑडियो वीडियो के जरिए वीआईपी का नाम उजागर करने वाली महिला सारे सबूत के साथ पुलिस के सामने आने को तैयार है लेकिन सुरेश राठौड़ दो बार बुलाए जाने के बाद भी थाने नहीं जा रहे हैं। जाकर कह दे यह सब झूठ है डर किस बात का है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष इसे कभी बेटियों की इज्जत का सवाल बता कर कांग्रेसियों से माफी मांगने की बात करते हैं तो कभी इसे ब्राह्मणों का अपमान बताकर अपना दामन पाक साफ होने की कोशिश करते हैं। यह सब जानते हैं कि यह भाजपा और उसके बड़े नेताओं को बचाने का प्रयास हो रहा है अंकिता भंडारी व सूबे की बेटियों को बचाने का नहीं। दून में नॉर्थ ईस्ट के छात्र चकमा की हत्या नस्लीय कारणो से हो जाती है। बरेली में एक छात्रा के बर्थडे पार्टी में मुस्लिम युवकों को पीटा जाता है। पूरे देश भर में आखिर यह है हो क्या रहा है क्या यही नए भारत की नई तस्वीर है इससे भी बड़ा सवाल यह है कि ऐसा भारत बना कौन रहा है? सत्ता में अगर भाजपा है तो फिर वह इसे रोक क्यों नहीं पा रही है?

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