बहुचर्चित नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल और सोनिया गांधी के खिलाफ ईडी ने एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इस एफआईआर को लेकर तमाम मीडिया संस्थानों द्वारा राहुल गांधी और सोनिया की गिरफ्तारी की संभावनाएं जताई जा रही है, मीडिया ही नहीं अब तो देश का हर एक आम आदमी भी इस बात को जान समझ चुका है कि यह केस हैं और नेहरू परिवार पर लगाए जा रहे इन आरोपों में कितना दम है कि वह अनैतिक तरीके से किसी की संपत्ति को हड़पना चाहते है। इस मामले को बार—बार क्यों उठाया जाता है इस बात को सब जान चुके हैं, लंबे समय से कांग्रेस के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए गए इस मामले में अगर थोड़ा सा भी दम रहा होता तो अब तक कब का राहुल गांधी और सोनिया गांधी को सरकार जेल भिजवा चुकी होती। अभी बीते कुछ समय पूर्व भी ईडी द्वारा राहुल गांधी और सोनिया गांधी से कई कई दिनों तक लंबी पूछताछ की गई थी। अगर ईडी को उनके खिलाफ कुछ पुख्ता सबूत मिले होते तो इस समय उनकी गिरफ्तारी की जा चुकी होती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईडी की किसी भी कार्यवाही का क्या उद्देश्य होता है? तथा ईडी द्वारा जिन मामलों में कार्यवाही की जाती है तथा वह अदालत में कितने साक्ष्य पेश कर पाती है और दोषियों को सजा दिला पाती है उसके स्ट्राइक रेट के बारे में भी सभी जानते हैं। विपक्ष को चुप कराने डराने और आरोपो के आधार पर ही उन्हें जेल भिजवा देने का जो इतिहास रहा है वह यह बताने के लिए काफी है कि यह संस्था सिर्फ सत्ता के इशारे पर विरोधियों को पस्त करने का एक औजार भर है। अब सवाल उठता है कि क्या राहुल व सोनिया को गिरफ्तार किया जा सकता है और जेल भेजा जा सकता है। तो इसका जवाब है नहीं। इसकी संभावना बहुत ही कम है। क्योंकि सत्ता में बैठे लोगों को इस बात का अच्छी तरह एहसास है कि अगर ऐसा हुआ तो यह उनकी इतनी बड़ी भूल भी साबित हो सकती है कि इसकी बहुत बड़ी कीमत उसे चुकानी पड़ सकती है। इसलिए ऐन संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व इस मुद्दे को एफआईआर के जरिए संसद में हंगामा खड़ा करना मात्र है जिससे विपक्ष का ध्यान हटाकर वह सब काम निपटाया जा सके जो वह करने में लगी हुई है। यह स्वाभाविक है कि इस सत्र में विपक्ष द्वारा वोट चोरी और तमाम राज्यों में कराई जा रहे एसआईआर तथा बीएलओ की मौत से लेकर सरकार द्वारा जीडीपी के पेश आंकड़ों से लेकर टाटा से वसूली गई वह बड़ी राशि जिसे चंदा बताया जा रहा है जैसे तमाम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दे ऐसे हैं जिनको लेकर विपक्ष संसद में भारी हंगामा खड़ा करने की तैयारी किए बैठा है। सरकार चाहती है कि विपक्ष इन मुद्दों की बजाय सिर्फ राहुल व सोनिया पर हुई एफआईआर के विरोध में संसद से लेकर सड़कों तक उलझा रहे और यह 15 दिवसीय संसद सत्र किसी तरह से निकाला जा सके तथा विपक्ष के तीखे सवालों से बचा जा सके। राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने के बाद और अपनी बदलती छवि तथा बढ़ती लोकप्रियता के बीच सत्ता में बैठे लोग इस बात को बखूबी जानते समझते हैं कि उनकी गिरफ्तारी का मतलब क्या होगा? वहीं कांग्रेस के कुछ नीति नियंता अब यह चाहते हैं कि किसी भी तरह सत्ता में बैठे लोग यह गलती करें। जिससे केंद्रीय सत्ता की ताबूत में अंतिम कील ठोकना उनके लिए आसान हो जाए। अब देखना यह है कि क्या ईडी राहुल और सोनिया को गिरफ्तार करेगी और जेल भेजेगी? या फिर उसका यह कदम सिर्फ गीदड़ भभकी ही साबित होगा। राहुल और सोनिया गांधी भागे नहीं है वह दिल्ली में ही है। एफआईआर कराने वाली ईडी के अफसरो को चाहिए कि वह जाएं और उन्हें गिरफ्तार कर ले।




