कहा जाता है कि झूठ के पांव नहीं होते। कोई भी व्यक्ति चाहे वह झूठ बोलने में कितना भी माहिर क्यों न हो बहुत अधिक समय तक सच के सामने टिक नहीं सकता है। बीते कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के गया जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान हर एक जनप्रतिनिधि से ईमानदारी और पारदर्शिता की उम्मीद करता है हम संविधान की मर्यादा को तार—तार होते नहीं देख सकते। यह बात उन्होंने अभी संसद में सरकार द्वारा लाये गए उसे विधेयक के संदर्भ में कही गई जिसमें मुख्य मंत्रियों से लेकर पीएम तक को भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में 30 दिन से अधिक जेल में रहने पर उसकी कुर्सी स्वतः चले जाने का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी इस बयान को देते वक्त शायद यह भूल गए होंगे कि एक दिन उन्होंने ही देश की सत्ता संभालते हुए यह भी कहा था कि न खाऊंगा न खाने दूंगा न सोऊंगा न सोने दूंगा। क्या प्रधानमंत्री देश की उस जनता को बता पा रहे है कि उनकी सरकार द्वारा बनाए गए चुनावी बंाड कानून को क्यों देश की सबसे बड़ी अदालत ने असंवैधानिक बताते हुए उसे रद्द कर दिया गया? और भाजपा ने इस चुनावी बांड के जरिए देश के उघमियों और उघोगपतियों को ईडी का डर दिखाकर कितनी धन वसूली की गई? क्या वह देश को यह बता पाएंगे कि उनके द्वारा कोरोना काल में पीएमओ के पते पर जो कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए पीएम केयर फंड बनाया गया था क्या वह सरकारी फंड था तथा इस फंड में जो लाखों करोड़ लोगों ने दान दिया था वह कहां गया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस पारदर्शिता की बात लोगों को समझा रहे हैं। अगर वह खुद इतने ही पारदर्शी है तो उन्हें इस फंड का हिसाब किसी को न दिए जाने का कानून क्यों बनाने की जरूरत पड़ी थी। मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों को जेल भिजवाने और पद से हटाने का कानून बनाने वाले प्रधानमंत्री यह बता सकते हैं कि उन्हें जेल भिजवाने या पद से हटाने की शक्ति क्या किसी संस्था और व्यक्ति में निहित है? अगर ऐसा हो सकता होता तो इस कानून के दायरे में प्रधानमंत्री को लाया ही नहीं जाता। यह कानून सिर्फ इसलिए लाया जा रहा है कि झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जिन्हे उनकी सरकार ने झूठे आरोपों में कई कई महीने तक जेल में कैद रखा वह बाहर कैसे आ गए और कैसे वह जेल से ही सत्ता को चलाते रहे? अभी बीते दिनों दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वर्मा के घर में हुई आगजनी में जो करोड़ों रुपए की नगदी जल गई थी वह किसकी थी? क्या प्रधानमंत्री मोदी इसका सच देश की जनता को बता पाएंगे या फिर वह सेवी के अध्यक्ष जिनके ऊपर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे थे उनको क्या सजा दी गई बीते 11 सालों में प्रधानमंत्री बहुत कुछ कह चुके हैं इतना कुछ कह चुके हैं कि अब उनकी किसी भी बात पर न तो देश की जनता का कोई भरोसा रह गया है और न ही उनकी पार्टी के लोगों को। अब उनका कुछ भी कहना अपना असर नहीं डाल पाएगा। वह चाहे जितना भी कह लें। भले ही उनकी यह चाहत रही हो कि वह इस अंध विश्वासी देश के लोगों के भगवान बन सकते हैं और लोग उनकी पूजा करने लगेंगे लेकिन उनका सच अब देश के लोगों के सामने आ चुका है।




