Home News Posts उत्तराखंड दूनघाटी में महिला जज भी ‘असुरक्षित’

दूनघाटी में महिला जज भी ‘असुरक्षित’

0
25
  • दून में वर्दी का खौफ खत्म, सड़कों पर बेखौफ अपराधी
  • महिला जज से अभद्रता, धमकी, अपहरण की कोशिश
  • मामले से खुली राजधानी की कानून-व्यवस्था की पोल

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जब एक महिला न्यायाधीश की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो जाएं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। स्मार्ट सिटी के दावों, पुलिस की मुस्तैदी के बखान और कानून-व्यवस्था के सरकारी भरोसों के बीच राजधानी की सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा आखिर कहां खड़ी है? महिला न्यायाधीश के साथ कथित अभद्रता, धमकी, छेड़छाड़ और अपहरण के प्रयास का मामला सामने आने के बाद पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
देहरादून में तैनात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एडीजे-5 ने डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, एक रैपिडो चालक ने तय किराये से दोगुने पैसे मांगे। आरोप है कि इसके बाद चालक उन्हें सुनसान और अंधेरे रास्ते की ओर ले गया तथा धमकाने और गलत इरादे से व्यवहार करने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। यह मामला महज किराये को लेकर हुए विवाद तक सीमित नहीं है। शिकायत में जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, वह राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यदि यात्रा के लिए बुक की गई सेवा ही किसी महिला के लिए भय और असुरक्षा का कारण बनने लगे, तो फिर सुरक्षा के दावों की हकीकत पर सवाल उठना लाजिमी है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मामला न्यायपालिका से जुड़ी एक महिला अधिकारी का है। जब कानून की रक्षा करने वाली व्यवस्था से जुड़ी महिला को ही ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो आम महिला के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन घटना ने पुलिस की जवाबदेही का सवाल जरूर सामने ला दिया है। राजधानी में पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी अपराध होने के बाद आरोपी को तलाशना ही नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना भी है। सवाल यह है कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जुड़े चालकों के सत्यापन, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और महिलाओं की आपातकालीन सुरक्षा के इंतजाम कितने प्रभावी हैं?
अगर पुलिस केवल प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपी की तलाश शुरू करने तक सीमित रह जाती है, तो महिलाओं में भरोसा कैसे कायम होगा? जरूरत इस बात की है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर निष्पक्ष जांच की जाए और शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की गंभीरता से पड़ताल हो। देहरादून तेजी से फैलता शहर है। आबादी बढ़ रही है, यातायात का दबाव बढ़ रहा है और सार्वजनिक परिवहन के नए माध्यम भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को भी उसी अनुपात में मजबूत होना चाहिए। लेकिन महिला न्यायाधीश से जुड़े इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था बदलते शहरी हालात के अनुरूप तैयार है?
महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकारी विज्ञापनों, बैठकों और दावों से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए सड़कों पर प्रभावी पुलिस गश्त, संवेदनशील इलाकों में निगरानी, परिवहन सेवाओं के चालकों का सत्यापन और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है। देहरादून में महिला न्यायाधीश से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई अब पुलिस की कसौटी है। राजधानी की महिलाओं को भरोसा चाहिए कि उनकी सुरक्षा केवल कागजों और दावों तक सीमित नहीं है। सवाल सिर्फ एक महिला अधिकारी का नहीं, बल्कि उस हर महिला का है, जिसे देहरादून की सड़कों पर बिना किसी डर के सफर करने का अधिकार है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here