June 20, 2026मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस‘की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि योग भारत की सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। योग ने सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। आज विश्व के अधिकतम देशों में करोड़ों लोग, योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं। योग अब सीमाओं से परे सशक्त समाज का आधार एवं मानवता के कल्याण का वैश्विक माध्यम बन चुका है।अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योग के द्वारा आज दुनिया में हमारी विशिष्ट पहचान बनी है। योग के लिये दुनिया भारत की ओर देख रही है। योग ने देश व दुनिया को स्वस्थता का भी संदेश दिया है। महान ऋषि पतंजलि ने योग के माध्यम से लोगों को जीने की राह दिखाई है। योग का अभ्यास शरीर, श्वास और मन को जोड़ता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नही, बल्कि तन, मन और आत्मा का समन्वय है। उन्होंने कहा कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने, जीवन को संतुलित बनाए रखने तथा असंभव लक्ष्य को पाने में विशेष भूमिका निभाता है। योग भारत की प्राचीनतम और समृद्ध परम्परा की एक पहचान है। पूरी मनुष्यता को हमारे ऋषि-मुनियों की यह महत्वपूर्ण देन है। योग साधना के द्वारा हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से योग, आध्यात्मिक साधना और ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है। यहां की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और प्राकृतिक वातावरण मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवन का संदेश देते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद, वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नई योग नीति के माध्यम से योग एवं ध्यान केंद्रों को प्रोत्साहन, योग प्रशिक्षकों को सहयोग तथा योग एवं वेलनेस आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग को अपनाने, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने, नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने तथा योग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा योग को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनेंगे।
June 20, 2026एडीजी प्रशासन ने विदेश मंत्री से ग्रहण किया “Institutional Performance Award for State Police” नई दिल्ली। उत्तराखण्ड पुलिस को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पासपोर्ट आवेदनों के सत्यापन में उत्कृष्ट एवं प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए भारत सरकार द्वारा “Institutional Performance Award for State Police” से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान देशभर में पासपोर्ट आवेदनों के पुलिस सत्यापन संबंधी प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया गया। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय के जवाहरलाल नेहरू भवन में शुक्रवार को आयोजित समारोह में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस की ओर से श्री ए. पी. अंशुमान, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन को यह सम्मान प्रदान किया गया। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने बताया कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने हेतु किए गए सतत प्रयासों का परिणाम है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए उत्तराखण्ड पुलिस को बधाई देते हुए कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह उपलब्धि उसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी उत्तराखण्ड पुलिस नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाती रहेगी।
June 20, 2026गृह जनपद में ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का विरोध सत्ता के प्रति बढ़ती नाराजगी को विपक्ष ने बनाया चुनावी मुद्दा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के विरोध से बढ़ी धामी सरकार की चिंता देहरादून। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड की राजनीति में ऐसे संकेत दिखाई देने लगे हैं, जो भाजपा के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को उनके गृह जनपद चमोली के पोखरी क्षेत्र में विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान महेंद्र भट्ट मुर्दाबाद के नारे लगने की घटना ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। विपक्ष इसे धामी सरकार के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश का संकेत बता रहा है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष द्वारा प्रायोजित विरोध करार दे रही है।भाजपा ने 2022 के चुनाव में विकास, समान नागरिक संहिता, सख्त कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई जैसे मुद्दों के सहारे दोबारा सत्ता हासिल की थी। लेकिन कार्यकाल के अंतिम चरण में रोजगार, महंगाई, पेपर लीक, पलायन, स्थानीय समस्याएं और विकास कार्यों की रफ्तार जैसे मुद्दे फिर से चर्चा में हैं। ऐसे माहौल में यदि पार्टी के शीर्ष प्रदेश नेतृत्व को अपने ही क्षेत्र में विरोध का सामना करना पड़े तो उसका राजनीतिक संदेश दूर तक जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर हमेशा बड़े आंदोलनों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी स्थानीय घटनाओं से आकार लेना शुरू करती है। जनता जब अपने प्रतिनिधियों के सामने खुलकर नाराजगी जताने लगे तो यह संकेत संगठन के लिए भी गंभीर माना जाता है।विपक्ष ने इस घटनाक्रम को हाथों-हाथ लिया है। कांग्रेस का कहना है कि यह विरोध प्रदेशभर में बढ़ रहे जन असंतोष की शुरुआत है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने युवाओं, किसानों, कर्मचारियों और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई। आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल भी इसे जनता के मोहभंग का संकेत बताते हुए सरकार पर लगातार हमलावर हैं।हालांकि भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को स्थानीय मुद्दों से जुड़ी सामान्य लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता की हर बात सुनी जाएगी और सरकार विकास कार्यों के आधार पर दोबारा जनता के बीच जाएगी। भाजपा संगठन भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर फीडबैक लेने और असंतोष को दूर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।चुनावी राजनीति में प्रतीकात्मक घटनाओं का महत्व कम नहीं होता। अपने ही गृह जनपद में प्रदेश अध्यक्ष का विरोध विपक्ष को यह कहने का अवसर देता है कि सरकार के खिलाफ असंतोष अब भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों तक पहुंचने लगा है। वहीं भाजपा के लिए यह संदेश है कि केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता की नाराजगी को समय रहते दूर करना भी जरूरी होगा।उत्तराखंड की राजनीति में अभी चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले महीनों में रोजगार, महंगाई, पेपर लीक, स्थानीय विकास और जनसरोकारों के मुद्दे चुनावी विमर्श के केंद्र में रहेंगे। यदि भाजपा समय रहते संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाकर जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में सफल नहीं होती, तो विपक्ष इन मुद्दों को चुनावी हथियार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
June 20, 2026भूमि प्रकरण में धामी सरकार की कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार पर सियासत चुनावी साल में प्रशासनिक सख्ती बन गई राजनीतिक विमर्श का केंद्र धामी सरकार का अफसरशाही को कड़ा संदेश, विपक्ष उठा रहा सवाल देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हरिद्वार नगर निगम के भूमि प्रकरण में धामी सरकार की सख्त कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। जांच में जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आने के बाद सरकार ने कार्रवाई की, उसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टालरेंस नीति का बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे स्वागत योग्य कदम तो मान रहा है, लेकिन यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या यह सख्ती हर मामले में समान रूप से लागू होगी या फिर चुनावी साल में सरकार अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रही है। यह प्रकरण अब केवल हरिद्वार नगर निगम तक सीमित नहीं रह गया है। यह पूरे प्रदेश की नौकरशाही, राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी माहौल का बड़ा विषय बन गया है। सत्ता, विपक्ष और आम जनताकृतीनों की नजर इस बात पर है कि सरकार इस कार्रवाई को आखिर किस मुकाम तक ले जाती है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार सार्वजनिक मंचों से कहते रहे हैं कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। सरकार का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में नकल माफिया के खिलाफ कठोर कानून, भर्ती घोटालों में कार्रवाई, अवैध कब्जों पर अभियान और अब हरिद्वार नगर निगम प्रकरण में त्वरित निर्णय इस बात के प्रमाण हैं कि शासन की प्राथमिकता पारदर्शिता और जवाबदेही है। सरकार के अनुसार यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना कार्रवाई होगी।भाजपा का मानना है कि इससे जनता में यह भरोसा मजबूत होगा कि कानून सबके लिए समान है और प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही तय की जा रही है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि पहले भ्रष्टाचार के मामलों में वर्षों तक फाइलें दबाकर रखी जाती थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने कार्रवाई की गति तेज की है। पार्टी इसे निर्णायक नेतृत्व की पहचान के रूप में भी पेश कर रही है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल इस कार्रवाई का खुलकर विरोध नहीं कर रहे, लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल जरूर उठा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में जीरो टालरेंस की नीति पर चल रही है तो प्रदेश में सामने आए हर भ्रष्टाचार के मामले में समान स्तर की कार्रवाई होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई की गति धीमी रही, जबकि कुछ मामलों में तत्काल सख्ती दिखाई गई। आम आदमी पार्टी का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का स्वागत है, लेकिन इसे केवल चुनावी संदेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दोषियों को न्यायालय में सजा दिलाना ही वास्तविक सफलता होगी। यूकेडी का कहना है कि यदि सरकार ईमानदारी से पूरे प्रशासनिक ढांचे की जवाबदेही तय करती है तो जनता उसका समर्थन करेगी, लेकिन कार्रवाई केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित रही तो जनता इसे राजनीतिक प्रबंधन के रूप में देखेगी।प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि हरिद्वार नगर निगम प्रकरण ने पूरे सरकारी तंत्र को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अब फाइलों में लिए गए निर्णयों की जवाबदेही तय हो सकती है। लंबे समय से यह धारणा रही है कि कुछ अधिकारी नियमों की अलग-अलग व्याख्या कर विवादास्पद फैसले लेते हैं। इस कार्रवाई ने संकेत दिया है कि सरकारी पद अब केवल अधिकार नहीं बल्कि उत्तरदायित्व भी है। यदि आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इसी तरह निष्पक्ष कार्रवाई होती है तो इससे प्रशासनिक अनुशासन मजबूत हो सकता है।जनता की राय इस मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटी दिखाई देती है। एक वर्ग का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जितनी भी सख्ती हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी और कर्मचारी जवाबदेह होंगे तो सरकारी व्यवस्था में सुधार आएगा और जनता का विश्वास बढ़ेगा। दूसरा वर्ग यह मानता है कि केवल निलंबन या विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि जांच समयब( पूरी नहीं हुई, दोषियों को कानूनी सजा नहीं मिली और सरकारी नुकसान की भरपाई नहीं हुई, तो ऐसी कार्रवाई का असर सीमित रह जाएगा। जनता अब परिणाम देखना चाहती है, केवल घोषणाएं नहीं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2027 में भ्रष्टाचार, सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही बड़े चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। भाजपा इस कार्रवाई को अपनी ईमानदार और निर्णायक सरकार की पहचान के रूप में प्रचारित करेगी। दूसरी ओर विपक्ष यह साबित करने की कोशिश करेगा कि सरकार की सख्ती केवल चुनावी वर्ष तक सीमित है। युवा मतदाता, मध्यम वर्ग और सरकारी सेवाओं से जुड़े लोग इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहे हैं। यही वर्ग चुनावी परिणामों को भी काफी हद तक प्रभावित करता है।हरिद्वार नगर निगम भूमि प्रकरण में धामी सरकार की कार्रवाई ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे को सरकार अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक ताकत के रूप में पेश करना चाहती है। लेकिन चुनावी राजनीति में केवल कार्रवाई की शुरुआत नहीं, उसका तार्किक और निष्पक्ष निष्कर्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि सरकार आने वाले समय में बिना किसी भेदभाव के सभी मामलों में समान कठोरता दिखाती है, तो जीरो टालरेंस की नीति एक मजबूत राजनीतिक पूंजी बन सकती है। लेकिन यदि कार्रवाई चुनिंदा मामलों तक सीमित रह गई, तो विपक्ष इसे चुनावी प्रबंधन करार देने में देर नहीं लगाएगा।
June 20, 2026दून के 16 सेंटरों पर 6 हजार छात्र देंगे परीक्षा रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था पैरामिलिट्री फोर्स की रहेगी तैनाती देहरादून। बीते 3 मई को पेपर लीक होने के बाद रद्द हुई नीट की परीक्षा के बाद कल 21 जून को हो रही पुनः परीक्षा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा में फिर से कोई गड़बड़ी न हो इसके पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पूरे देश से इस परीक्षा में लगभग 23 लाख परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। सूबे की राजधानी दून में नीट परीक्षा के लिए 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जिसमें लगभग 6 हजार छात्र—छात्राएं परीक्षा देंगे।जिला अधिकारी दून द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस परीक्षा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। परीक्षा को शांतिपुर ढंग से संपन्न कराए जाने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है, परीक्षा के लिए चार जोनल मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। परीक्षार्थियों के लिए पेयजल से लेकर आवागमन तक की सभी व्यवस्थाएं की गई है। राज्य में परीक्षा देने वाले छात्रों को परिवहन विभाग की बसों में मुक्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए उन्हें अपना एडमिशन कार्ड दिखाना होगा।नीट की परीक्षा के लिए होने वाली पेपर लीक की घटनाओं को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफा को लेकर जहां कॉकरोच जनता पार्टी आज दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है, वहीं नेता विपक्ष और कांग्रेस ने इसे एक बड़े विरोध का मुद्दा बनाया हुआ है। सरकार के स्तर पर परीक्षा को फुल प्रूफ बनाने के हर संभव प्रयास हो रहे हैं। पेपर वितरण के लिए सेना का प्रयोग और बीते कल इसका मॉक ड्रिल तक कराए गए हैं। लेकिन इस सब के बीच परीक्षा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।वहींं सोशल मीडिया में कुछ ऐसी खबरें भी आ रही है कि दूसरे एग्जाम का भी आधा पर्चा नकल माफिया तक पहुंच गया है जो उसे 35—35 लाख रुपए में बेच रहे हैं। जांच एजेंसिंया अब इसकी जांच में जुटी है अगर इस बार भी कोई गड़बड़ी सामने आती है तो फिर युवाओं के गुस्से से सरकार का बच पाना मुश्किल हो जाएगा।
June 20, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कल्याणकारी योजनाओं के 4400 से अधिक श्रमिक लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से लगभग 11 करोड़ रुपये की धनराशि का अंतरण किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के 4400 से अधिक श्रमिक लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से लगभग 11 करोड़ रुपये की धनराशि का अंतरण किया। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड की विवाह उपरांत सहायता, मृत्यु उपरांत अनुदान, प्रसूति सुविधा तथा शिक्षा सहायता योजनाओं के लाभाथियों के खाते में वन क्लिक के माध्यम से यह राशि वितरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि श्रमिक कल्याण योजनाओं का व्यापक प्रचार—प्रसार किया जाए तथा विभिन्न क्षेत्रों में शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के कार्यस्थलों के निकट ही आवश्यक सामग्री वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे उन्हें सुविधाजनक तरीके से लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण, उनके आश्रित बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन तथा जीवनोपयोगी सामग्री के वितरण हेतु विशेष शिविरों के आयोजन पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी योजनाओं के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने और सूचना प्रौघोगिकी के अधिकाधिक उपयोग के निर्देश दिए। साथ कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल पात्र श्रमिकों को ही योजना का लाभ मिले। इस अवसर पर जानकारी दी गई कि बोर्ड द्वारा पिछले एक वर्ष में 24,323 श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से कुल 93 करोड़ 6 लाख रुपये की अनुदान राशि वितरित की जा चुकी है। इस अवसर पर कैलाश पंत (राज्य सलाहकार, संविदा बोर्ड), श्रीमती गीता रावत (अध्यक्ष, सतर्कता समिति), श्रीमती मोहिनी पोखरिया (उपाध्यक्ष, राज्य सतर्कता समिति), अपर सचिव विनीत कुमार, उप श्रम आयुक्त विपिन कुमार, सहायक श्रम आयुक्त श्ौलेश सती, वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन श्रम आयुक्त प्रकाश चन्द्र दुम्का द्वारा किया गया।
दारू की ओवर रेटिंग से शराबी परेशान
आपका जो विषय है बहुत ही शानदार है
एक गरीब व्यक्ति एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहा है लेकिन धिक्कार है ऐसी पत्रकारिता को जो केवल हराम के पैसे खाने के लिए इस प्रकार की घटिया राजनीति कर रही है प्रदेश में प्रदेश की राजधानी देहरादून में और भी मुद्दे हैं गरीब जनता के लिए असहाय लोगों के लिए आपके पास कोई भी विषय नहीं है और आप शराबियों के लिए इतने मेहरबान हुए हो
और आखिर हो भी क्यों ना न्यूज़ चैनल का आका खुद एक बार का संचालन करता है और टीआरपी के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहा है धिक्कार है ऐसी पत्रकारिता पर
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया पर धिक्कार
मीडिया के नाम पर डिजिटल चैनल बनाकर उस पर अपने Bistro बार का संचालन कर रहे व्यापारी को हार्दिक शुभकामनाएं याद रखना वक्त हमेशा एक जैसा नहीं होता वक्त बदलेगा और तुमको तुम्हारी इस चाटुकारिता का जवाब जरूर मिलेगा जय श्री राम जय हिंद जय देव भूमि उत्तराखंड।
कोई नहीं रोक सकता दारू की ओवर रेटिंग
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