व्यवस्थाओं के झाम में उलझे चारधाम यात्री

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बिना पढ़े लिखे ही नहीं पढ़े लिखे भी बने चकर घन्नी
क्या बुक कराए कैसे कराएं सब कुछ समझ से परे
हेली टिकट तय तारीख पर मिलना तो कतई नामुमकिन

देहरादून। चार धाम यात्रा पर आना है तो पहले रजिस्ट्रेशन कराओ। रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? ऑनलाइन या ऑफलाइन? अगर रजिस्ट्रेशन हो गया तो होटल की बुकिंग कराओ यात्रा का दिन तारीख तय हो गया और रजिस्ट्रेशन भी हो गया तो फिर हेली टिकट बुक कराओ। तय तारीख को हेली टिकट कैसे मिलेगा इसका भी पता नहीं। कब बुकिंग होगी इसकी भी जानकारी नहीं। यात्रा का मन बनाया और यात्रा का दिन, तारीख सब कुछ तय कर लिया मगर होटल की बुकिंग नहीं मिली या हेली का टिकट नहीं मिला तो सारा प्रोग्राम चौपट।
चारधाम यात्रा पर आने के हर इच्छुक व्यक्ति को ऐसे ही तमाम सवालों से इन दिनों दो—चार होना पड़ रहा है। उत्तराखंड शासन—प्रशासन द्वारा यात्रा को सुगम और सरल बनाने के नाम पर इतने ज्यादा नियम कानून बना दिए गए हैं कि अनपढ़ लोगों की तो बात ही छोड़ दो अच्छे अच्छे पढ़े लिखे लोगों का भी दिमाग चकरघन्नी बन जाए? सरकार द्वारा इस साल सभी यात्रियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है क्योंकि पिछले साल बिना रजिस्ट्रेशन वाले लोग भी धामों तक पहुंच गए थे जिसके कारण क्षमता से अधिक यात्री पहुंचने से व्यवस्थाएं चरमरा गई थी। लेकिन सरकार इस साल भी ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की बात कर रही है तब क्या हालात पहले जैसे नहीं हो जाएंगे।
एक व्यक्ति या यात्री समूह को सरकार अगर एक मुफ्त रजिस्ट्रेशन, होटल, हेली और दर्शन स्लॉट अलॉट करने की व्यवस्था करती तो शायद यात्रियों को इस झंझट से बचाया जा सकता था। अब यात्रियों की हालात यह है कि उनका रजिस्ट्रेशन तो हो गया लेकिन किसी को होटल नहीं मिल रहा है तो किसी को हैली का टिकट नहीं मिल पा रहा है उन्हें समय पर यह जानकारी तक नहीं मिल पा रही है कि उन्हें कब व कैसे क्या मिल सकता है।
हेली सेवाओं की स्थिति यह है कि बीते कल मंगलवार को केदारधाम जाने वाले उन यात्रियों के लिए ऑनलाइन बुकिंग खोली गई जिन्हें 1 मई से 7 मई के बीच यात्रा करनी है। वेबसाइट खुलने के कुछ ही घंटों में बुकिंग फुल हो गई। जिसमें 5275 टिकट बुक हुए हजारों लोग कोशिशों के बाद भी टिकट बुक नहीं करा सके। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने होटल की बुकिंग करा दी थी लेकिन हेली टिकट नहीं मिला तो अब इस होटल की बुकिंग को कैंसिल करा रहे हैं।
धामों में दर्शनों के लिए स्लाट व्यवस्था की बात की जा रही है जिन लोगों के आने—जाने के लिए हैली टिकट बुक है उन्हें अगर तय समय में स्लाट नहीं मिलता और दर्शन नहीं हो पाते तो हेली टिकट बेकार हो जाएगा मजबूरी में धाम में ही रुकना पड़ा तो वहां रहने की व्यवस्था हो पाएगी या नहीं इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। भले ही सरकार का दावा है कि इस साल हर साल से बेहतर व्यवस्था होगी लेकिन यात्री इन व्यवस्थाओं के झाम की उलझनों में उलझ कर रह गए हैं। कई लोगों का कहना है कि इससे तो पहले का ही जमाना ठीक था जब चाहा बैग कंधे पर लटकाया और चल पड़े, भले ही रास्ते की दुश्वारियां थी लेकिन यह तो तय था कि जा रहे हैं तो दर्शन करके लौटेंगे। आज की तरह तो नहीं था कि दर पर जाकर भी बिना दर्शन लौटना पड़े।

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