बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी: सहमति से सेक्स’ की न्यूनतम आयु को लेकर आधुनिक दुनिया को देखें सरकारें

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नई दिल्ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोरों के लिए सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र सीमा कम करने की राय दी है। कोर्ट ने कहा है कि कई देशों ने किशोरों के लिए सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र कम कर दी है और अब समय आ गया है कि हमारा देश और संसद भी दुनिया भर में हो रही घटनाओं से अवगत हों।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, ‘यौन स्वायत्तता में वांछित यौन गतिविधि में शामिल होने का अधिकार और अवांछित यौन आक्रामकता से सुरक्षित रहने का अधिकार दोनों शामिल हैं। किशोरों के अधिकारों के दोनों पहलुओं को जब मान्यता दी जाती है तभी मानव यौन गरिमा को पूर्णत: सम्मानित समझा जा सकता है।’ अदालत ने यह टिप्पणी 25 वर्षीय व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर की, जिसमें उसने एक विशेष अदालत के फरवरी 2019 के आदेश को चुनौती दी थी। विशेष अदालत ने उसे 17 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराया था।
लड़का और लड़की ने दावा किया था कि वे सहमति से रिश्ते में थे। लड़की ने विशेष अदालत के समक्ष अपनी दलील में दावा किया कि मुस्लिम कानून के तहत, उसे बालिग माना जाता है और इसलिए उसने आरोपी व्यक्ति के साथ ‘निकाह’ किया है। न्यायमूर्ति डांगरे ने दोषसिद्धि के आदेश को रद्द कर दिया और उस व्यक्ति को बरी कर दिया। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से स्पष्ट रूप से सहमति से यौन संबंध बनाने का मामला बनता है। उन्होंने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया।

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