- भाजपा के पास हिंदू—मुस्लिम के सिवाय कुछ नहीं
- राज्य की संस्कृति व स्वभाव के अनुरूप बदले नामः भाजपा
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बीते कल चार जिलों में 15 स्थानों और दो मार्गों के नाम बदलने की घोषणा करने के बाद राज्य में सियासी घमासान शुरू हो गया है।
विपक्ष कांग्रेस का कहना है कि भाजपा के पास हिंदू—मुसलमान के अलावा मुद्दा ही क्या है, लेकिन सूबे ही नहीं देशभर की जनता अब इस बात को समझ चुकी है। उनका कहना था कि नाम नहीं भाजपा अपना काम बदले। वही भाजपा नेताओं का कहना है कि यह राज्य की संस्कृति और विरासत के अनुरूप जन भावनाओं की मांग पर यह फैसला लिया गया है जिसका सभी ने स्वागत किया है।
उल्लेखनीय है कि सीएम धामी ने देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर के 15 स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की थी हालांकि अभी इसका शासनादेश जारी नहीं हुआ है इस पर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि भाजपा के पास राजनीति के नाम पर हिंदू—मुसलमान करने के सिवाय और मुद्दा ही कुछ नहीं है कभी वह लव जिहाद और थूक जिहाद तो कभी मजार और मदरसे तो कभी नाम बदलने के जरिए हिंदू मुस्लिम की राजनीति करके लोगों का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने में लगी रहती है। उनका कहना है कि लेकिन लोग अब समझ चुके हैं। इस मुद्दे पर राज्य ही नहीं राज्य के बाहर से भी प्रतिक्रियाएं आ रही है सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि उत्तराखंड को अपना नाम बदलकर उत्तर प्रदेश—टू कर लेना चाहिए। क्योंकि उत्तराखंड की सरकार भी उत्तर प्रदेश सरकार के पद चिन्हो पर चल रही है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो इस मुद्दे पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखते हुए पूछा गया है कि क्या मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों के लोगों से भी उनकी राय ली गई है? उनका कहना है कि नाम बदलने से किसी का काम नहीं बदल जाता है। भाजपा को अपना काम बदलने का जरूरत है। जिस संस्कृति और विरासत के अनुकूल वह इस फैसले को बता रहे हैं वह इसके विपरीत परिणाम वाला फैसला है। उधर भाजपा नेता ज्योति प्रसाद गैरोला और सुरेश जोशी ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहां है कि देवभूमि की संस्कृति व स्वभाव के अनुरूप ही यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कांग्रेस पर ही ध्रुवीकरण व जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया है।




