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राजधानी पर भाजपा-कांग्रेस की ‘चुप्पी’

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  • हर चुनाव में राजनैतिक दलों का मुद्दा बन जाता है गैरसैंण
  • चुनाव खत्म होते ही राजधानी पर नहीं करता है कोई भी बात
  • हकीकत में प्रदेश के आमजन की हसरत आज भी है अधूरी

देहरादून। चुनावी साल में आरोप-प्रत्यारोपों का दौर यह तो प्रजातंत्र में नेताओं के लिए खजाना है और इस खजाने से कब कौन सा अस्त्र बाहर निकालना है यह नेताओं को खूब पता होता है। बात चली है तो भाजपा और कांग्रेस के उस सफेद झूठ के बारे में करते हैं, जिसे बोलकर सत्ता पर काबिज होना इन दोनों दलों को अच्छी तरह से आता है। यह मुद्दा है प्रदेश की राजधानी की। राज्य बने 25 साल हो गए, लेकिन आज भी राज्य की राजधानी का मुद्दा हर चुनाव के समय उठ जाता है और शुरू हो जाता है आरोप-प्रत्यारोपों का दौर।
बता दें कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बना और राज्य की देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया। उस समय भी यह उम्मीद जताईई गई थी कि भविष्य में राजधानी के प्रश्न पर व्यापक विचार किया जाएगा। लेकिन धीरे-धीरे समय बीतता गया और अस्थायी राजधानी स्थायी व्यवस्था का रूप लेती चली गई। राज्य के लोगों की गैरसैंण राजधानी की मांग धूमिल होती चली गई। नेताओं को अपने ठाठ-बाठ के लिए पहाड़ चढ़ना मंजूर नहीं था और नेतागिरी करने के लिए यह मुद्दा तो लंबा चलाना था। साल-दर-साल चुनाव होते रहे, गैरसैंण का मुद्दा चुनाव के समय उठता रहा, लेकिन हकीकत आज भी यह है कि आमजन की हसरत आज भी अधूरी है।
इसके साथ ही जब-जब गैरसैंण पर बात हुई तो कुछ न कुछ हुआ और इसी का परिणाम था कि जब भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन का निर्माण हुआ तो पहाड़ के लोगों के भीतर एक नईई आशा जगी। उन्हें लगा कि शायद अब राज्य की सत्ता धीरे-धीरे पहाड़ की ओर लौटेगी। लेकिन आज भी कभी कभार सपने की तरह यहां नेताओं को हुजूम उमड़ता है और कुछ दिन मौज-मस्ती पर फिर गैरसैंण बीरान हो जाता है।
आज की स्थिति यह है कि भराड़ीसैंण का विधानमंडल परिसर अत्यंत भव्य और आधुनिक है। वहां विधानसभा भवन, विधायक आवास, अधिकारियों के आवास और कईई अन्य बुनियादी ढांचे विकसित किए गए हैं। इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन इन सबके बावजूद साल भर में केवल कुछ ही दिनों के लिए वहां विधानसभा सत्र आयोजित होता है।
अब चुनावी साल है और भाजपा कांग्रेस का यह फिर मुद्दा होगा, लेकिन सिर्फ चुनावी। चुनाव खत्म होते ही सभी नेता देहरादून में एसी की हवा खाने में मस्त हो जाएंगे और पांच साल तक चप्पी साधे रहेंगे। हर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने गैरसैंण को लेकर सफेद झूठ बोला है और आगे भी बोलेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राजनैतिक दलों ने गैरसैंण की समस्या का समाधान कर दिया तो आने वाले समय में किस बात की राजनीति करेंगे। शायद यही कारण है कि आज भी इस मुद्दे को दोनों दल अलझाये हुए हैं।


लंबे समय बाद दिखे भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत
लंबे समय बाद भाजपा के प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम प्रदेश में दिखे। भाजपा की संगठनात्मक बैठक में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। देहरादून में कुआंवाला में आयोजित बैठक में गौतम ने मुख्यमंत्री धामी को 4 वर्ष पूरे करने वाले पाटीं के पहले मुख्यमंत्री बनने की बधाईई दी। उनके कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा, वह आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप राज्य का निर्माण कर रहे हैं। े जनता के मन जीतने का तो काम कर ही रहे हैं, साथ ही पीएम मोदी के कहे अनुशार उत्तराखंड का दशक लाने के लिए जी जान से जुटे हैं। उनके नेतृत्व में आपदा का भी समाधान निकालकर, राज्य आज विकसित भारत के मिशन में सर्वोपरि नामों में शुमार है।

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