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यात्रियों की संख्या पर नियंत्रण के बिना नहीं सुधरेगी व्यवस्थाएं

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  • अभी भी धामों में यात्रियों का भारी हुजूम
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय का दखल, सरकार की विफलता

देहरादून। तमाम कोशिशों के बावजूद भी चारों धामों में श्रद्धालुओं का उमड़ता सैलाब कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने अधिकारियों की पूरी फौज को यात्रा प्रबंधन के लिए फील्ड में उतार दिया है। धामों की क्षमता से अधिक यात्रियों के पहुंचने से हालात पर नियंत्रण मुश्किल हो रहा है।
बीते तीन दिनों में अगर केदार धाम जाने वाले यात्रियों की संख्या पर गौर करें तो वह 39—35 व 32 हजार के आसपास रही है जो अभी भी धाम की क्षमता से दोगुना से भी ज्यादा है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 12 मई को खुले थे लेकिन अब तक बीते 10—11 दिनों में अगर 2 लाख से अधिक यात्री पहुंचे हैं तो यह औसतन 20 हजार प्रतिदिन होता है। जबकि क्षमता 10—12 हजार से भी कम है। अभी रुद्रप्रयाग से यात्रियों की भीड़ की जो तस्वीर सामने आई थी वह डराने वाली थी। धामों में दर्शनों के लिए जिस तरह मारामारी हो रही है और लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है ऐसे में किसी भी छोटी सी लापरवाही या दुर्घटना के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
राज्य के अधिकारी और सत्ता में बैठे लोग भले ही यात्रा के सुचारू संचालन की बात कह रहे हो और इस भारी भीड़ के बीच भी यात्रा यथावत चल रही हो लेकिन अगर सब कुछ सामान्य होता तो शायद केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को न यात्रा की मॉनिटरिंग करने की जरूरत पड़ती और न राज्य के अधिकारियों को यह दिशा निर्देश देने पड़ते कि वह यात्रा पड़ावों पर यात्रियों की संख्या तथा धामों में पहुंचने वाले यात्रियों की जानकारी हर रोज केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजें। यह अलग बात है कि केंद्र सरकार द्वारा यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए हर संभव सहायता करने का भरोसा दिलाया गया है।
ऐसा नहीं कहा जा सकता कि सरकार को इस बात का पूर्व अनुमान नहीं था कि यात्रा में कितनी भीड़ आने वाली है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन खुलते ही यह साफ हो गया था कि इस साल पिछले साल से कहीं अधिक यात्रियों का आना तय है। लेकिन चुनावी व्यवस्था या अन्य जो भी कारण रहे हो यात्रा के लिए अनुकूल व्यवस्था समय से नहीं हो पाई तथा भीड़ को नियंत्रित करने का कोई मेकैनिज्म सरकार के स्तर पर तैयार नहीं किया गया। जब तक भीड़ को नियंत्रित करने और प्रतिदिन हर धाम में कितने यात्रियों को भेजा जा सकता है इसकी पुख्ता व्यवस्था नहीं होगी तब तक यात्रा व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जा सकता है।

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