अब टोकन से होंगे बाबा के दर्शन

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व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रहा है श्रद्धा का सैलाब
घोड़े—खच्चरों की हिफाजत को भी टीम तैनात

देहरादून। चार धाम यात्रा को शुरू हुए अभी एक माह का समय भी पूरा नहीं हुआ है अब तक रिकॉर्ड 14 लाख से अधिक यात्री चार धामों की यात्रा कर चुके हैं। सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं का दबाव केदारधाम में ही रहा है। यही कारण है कि सबसे ज्यादा अव्यवस्थाएं भी यही देखी गई है। व्यवस्थाओं को सुधारने की शासन—प्रशासन स्तर पर जो कवायद की जा रही है उस पर श्रद्धालुओं का सैलाब भारी पड़ रहा है। केदारधाम में कई—कई किलोमीटर लंबी श्रद्धालुओं की लाइन को कम करने के लिए अब धाम में टोकन व्यवस्था की गई है जिसमें दर्शनों के लिए टोकन नंबर जारी किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को कई—कई घंटे लाइनों में न लगना पड़े।
उल्लेखनीय है कि धामों में श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया गया था लेकिन फिर भी भीड़ कम नहीं हो सकी है। रजिस्ट्रेशन के बिना चार धाम जाने वाले यात्रियों को लौटाए जाने और रजिस्ट्रेशन फुल होने के कारण यात्रियों को इंतजार कराए जाने से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वही ट्रांसपोर्टरों से लेकर यात्रियों तक के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ रहा है। भारी भीड़ के कारण समस्याएं भी बढ़ी है। केदारधाम में अब तक 60 से अधिक यात्रियों की मौत हो चुकी है वहीं 103 घोड़े—खच्चरों की मौत हो गई है। धाम में गंदगी के अंबार लग गए हैं जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंता जता चुके हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन व्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए पहले दो मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई थी अब काबीना मंत्री सौरभ बहुगुणा भी धाम की व्यवस्थाओं को सुधारने में जुटे हैं। घोड़े खच्चरों के साथ किसी तरह का अमानवीय व्यवहार न हो इसकी निगरानी के लिए उन्होंने केदार धाम में पूरे पैदल मार्ग पर एक टीम तैनात कर दी गई है। शिकायत मिली थी कि इन बेजुबानोंं के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है। जिसके कारण इनकी मौतें हो रही है। मेनका गांधी ने भी इस मामले को उठाया था। यात्रियों का कहना है कि इन जानवरों के शव मार्गो पर बिखरे पडे़ है जिनसे यात्रियों को परेशानी हो रही है।
हरिद्वार और ऋषिकेश में रजिस्ट्रेशन कराने को लेकर यात्रियों का जमावड़ा है और वह सड़कों पर रात गुजार रहे है। जो अतिथि देवो भवः की संस्कृति की हकीकत को बंया कर रहे है। उधर यात्रियों के साथ ठगी के मामले भी सामने आ रहे है। ट्रांसपोर्टर अलग से धरना—प्रदर्शन कर रहे है तमाम तरह की समस्याओं के बावजूद भी भीड़ बेकाबू हो रही है। जिसको नियंत्रण करना शासन—प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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