नई दिल्ली। पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम है, 14 सितंबर से घर-घर में गणेश बप्पा विराजमान हो चुके हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार गणेश उत्सव 1० नहीं, 12 दिन का रहेगा। असल में गणपति बप्पा को घर लाने की खुशी जितनी खास होती है, उनकी विदाई का पल उतना ही भावुक होता है। ढोल-नगाड़ों और गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के बीच भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को विदा करते हैं। गणेश विसर्जन के लिए सिर्फ एक ही दिन तय नहीं होता? परिवार की परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या फिर अनंत चतुर्दशी के दिन भी बप्पा का विसर्जन किया जाता है।
गणेशोत्सव का मुख्य समापन अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर 2०26, शुक्रवार को होगा। इसी दिन देशभर में बड़ी संख्या में गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। वहीं, जिन घरों में कम दिनों के लिए गणपति स्थापित किए जाते हैं, वहां परंपरा के अनुसार पहले भी विसर्जन किया जा सकता है। विसर्जन के दिन सबसे पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आरती करें। बप्पा को फूल, दूर्वा, सिंदूर, फल और मोदक का भोग लगाएं। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य गणपति से सुख-समृद्धि और विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें। प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले घर या पूजा स्थल पर आरती करना और श्रद्धापूर्वक विदाई देना शुभ माना जाता है। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।
धार्मिक परंपरा में गणेश विसर्जन को भगवान के अपने धाम लौटने का प्रतीक माना जाता है। गणपति की स्थापना के दौरान भक्त उन्हें अपने घर का सदस्य मानकर पूजा करते हैं और उत्सव के बाद विदाई देते हैं। यह संदेश भी देता है कि जीवन में आगमन और प्रस्थान दोनों प्रकृति के नियम हैं।
प्रतिमा का सम्मानपूर्वक विसर्जन करें, गणपति की प्रतिमा को जमीन पर सीधे न रखें। संभव हो तो विसर्जन स्थल तक साफ कपड़े या पूजा की चौकी में रखकर ले जाएं। पर्यावरण का ध्यान रखें: मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमा का इस्तेमाल करना बेहतर है। विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाब या निर्धारित स्थान का उपयोग करें। फूल-माला, प्लास्टिक, सजावटी सामग्री और अन्य गैर-घुलनशील वस्तुओं को जल में न डालें। इन्हें अलग करके उचित तरीके से निस्तारित करें।
विसर्जन से पहले गणपति की आरती कर उनसे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है। विसर्जन को केवल प्रतिमा को पानी में प्रवाहित करने की प्रक्रिया न मानकर भगवान गणेश को भावपूर्ण विदाई देने की परंपरा माना जाता है।




