- एफ आईआर की मांग, 1 सितंबर को सचिवालय का घेराव किया जाएगा: कांग्रेस
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खड़गे की जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल (हल्द्वानी रामलीला मैदान) के कथित शुद्धिकरण प्रकरण के विरोध में विकासनगर क्षेत्र के सहसपुर थाने में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचकर तहरीर दी है और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने देहरादून जिले के सहसपुर/विकासनगर क्षेत्र के थानों में तहरीर सौंपकर इस कृत्य को बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।

उत्तराखंड कांग्रेस द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों और थानों में तहरीर दी जा रही है, जिसमें दोषियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के निर्देश पर कांग्रेस के जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों, नगर अध्यक्षों एवं ब्लॉक अध्यक्षों के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने—अपने क्षेत्रों की कोतवालियों, थानों एवं पुलिस रिपोर्टिंग चौकियों में पहुंचकर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग को लेकर लिखित तहरीर दी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष समाज में किसी व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल के नेता की उपस्थिति के बाद सार्वजनिक मंच का ट्टशुद्धिकरण’ करना न केवल सामाजिक सौहार्द के विरुद्ध है, बल्कि यह संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का भी अपमान है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि घटना के संबंध में पर्याप्त समय बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के विरोध में आज प्रदेशभर में कांग्रेस संगठन द्वारा पुलिस प्रशासन को तहरीर सौंपकर संबंधित असामाजिक तत्वों तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ की भूमिका की जांच करते हुए, कानून के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई एवं मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की गई। कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि तहरीरों पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वह प्रदेश प्रभारी कुमारी श्ौलजा के निर्देश पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में 1 सितंबर को सचिवालय घेराव करेगें।
वही दूसरी ओर आज हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण का मामला अब अल्मोड़ा में भी सियासी चिंगारी भड़काने लगा है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंचे और घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया। कांग्रेसियों ने साफ कहा कि राजनीतिक विरोध की आड़ में सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
कोतवाली पहुंचे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष स्वाभाविक है, लेकिन किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम स्थल का कथित तौर पर गंगाजल से शुद्धिकरण करना विरोध की राजनीति को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या अब राजनीतिक असहमति का जवाब धार्मिक प्रतीकों के जरिए दिया जाएगा? कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। नेताओं ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और राजनीतिक प्रभाव के कारण किसी को कार्रवाई से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस—प्रशासन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि घटना सामने आने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो इससे कानून—व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होंगे। उनका कहना था कि कानून की किताब में आरोपी का राजनीतिक झंडा नहीं देखा जाता, अपराध देखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार ऐसी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें असली मुद्दों से ध्यान हटाकर धार्मिक और भावनात्मक विषयों को आगे किया जा रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की तो पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। हल्द्वानी का मंच शुद्धिकरण प्रकरण अब केवल एक शहर तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक मर्यादा, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर प्रदेशभर में मुद्दा बनाने की तैयारी में दिखाई दे रही है। अल्मोड़ा में कोतवाली पहुंचकर एफआईआर की मांग इसी राजनीतिक रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत पहले ही गरम है। ऐसे में मंच शुद्धिकरण का विवाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती तल्खी को और हवा दे सकता है।




