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नागरिकता जाने का डर

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क्या आप भारत के नागरिक है? यह सवाल आजकल हर एक भारतवासी को डरा रहा है। यह डर बेवजह इसलिए नहीं है क्योंकि अब तक आपकी जेब में जितने भी कार्ड थे जिन्हें बनवाने के लिए आप लंबी—लंबी कतारों में खड़े रहते थे तथा सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे हैं उनमें से कोई भी कार्ड इस बात को प्रमाणित नहीं करता है कि आप भारत के ही नागरिक हैं भले ही वह आधार कार्ड हो, पैन कार्ड हो अथवा आपका वह पासपोर्ट जिसे लेकर आप विदेशों की सैर पर जाते हैं और इसे दिखाकर दावा करते हैं कि आप भारत के नागरिक हैं। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि आपका पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा का अनुमति पत्र है नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं। निर्वाचन आयोग आपके वोटर कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं मानता है वह सिर्फ आपको वोट डालने का ही अधिकार देता है जैसे राशन कार्ड और गैस सिलेंडर खरीदने का। खास बात यह है कि अगर इन सभी कार्डों का भारत की नागरिकता से कोई मतलब नहीं है तो फिर इन कार्डों को बनवाना अनिवार्यता क्यों कहा जाता रहा है? आधार कार्ड को लेकर कहां जाता है कि यह आपका सबसे बड़ा पहचान पत्र है। कहीं जाइए सबसे पहले आपसे आधार कार्ड दिखाने की बात ही कही जाती है। एक अहम और महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब भी नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपनी नागरिकता को प्रमाणित करने के लिए कौन सा दस्तावेज दिखाना पड़ेगा? या जरूरी है इस सवाल के जवाब में वही पुरानी संवैधानिक व्यवस्था जिसमें उसकी वंशावली, जन्म स्थान जैसी चार अहिर्ताए शामिल है का हवाला दिया जाता है। 5—6 दशक पूर्व जिन लोगों का जन्म हुआ है उन्हें पता है कि पहले सरकारी स्तर पर उस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी कि जन्म और मृत्यु के प्रमाण पत्र जारी किए जाते हो। माता—पिता तक को अपने बच्चों की जन्मतिथि सही—सही पता नहीं होती थी स्कूलों में प्रवेश के समय मास्टर जी ही अपनी मर्जी से बच्चों की जन्म तिथि लिख देते थे और नागरिकता का प्रमाण पत्र वही दस्तावेज बन जाते थे। लेकिन अब यह मोदी का नया भारत है वह भी बदला हुआ भारत है। जहां सब कुछ बदला जा चुका है या बदले जाने की कोशिशें जारी है। अब इस भारत में घुसपैठियों का शोर है जिन्हें सरकार खदेड़ने का दावा कर रही है? यह अलग बात है कि पश्चिम बंगाल मेंं चुनाव से पूर्व 27 लाख वोटरों का नाम मतदाता सूची से काटने का जो कारनामा एसआईआर के जरिए किया गया उन्हें न्यायालय भी वोट का अधिकार नहीं दिला पा रहा है लेकिन सरकार अभी तक 100—200 घुसपैठियों को न तलाश कर सकी है न देश से निकाल सकी है भारत का संविधान कहता है कि हर भारतीय को वोट का अधिकार है। यानी कि जो वोट डालने का अधिकार रखता है वह भारत का नागरिक है। क्योंकि यह अधिकार सिर्फ नागरिकों को ही प्राप्त है किसी विदेशी को नहीं हो सकता। तब फिर वोटर कार्ड रखने वालों को भारत का नागरिक क्यों नहीं माना जा रहा है। क्यों उनके वोट का अधिकार छीना जा रहा है? इसके पीछे क्या कोई बड़ा सरकारी षड्यंत्र छिपा है? पीएम मोदी का अपने बारे में कहना है कि जब उनका जन्म हुआ था तो आईटी के एक्सपर्टो द्वारा उनके दिमाग में एक ऐसी चिप फिट कर दी गई थी कि वह छोटा तो सोच ही नहीं सकते हैं। आज तक हालांकि वह स्वयं की पैदाइश को नॉन बायोलॉजिक बताने से लेकर अपने बारे में क्या—क्या कहते रहे हैं उनकी शिक्षा और चाय बेचने वाली तक हर बात एक रहस्य से कम नहीं है। वह क्या कुछ बड़ा करने वाले हैं यह तो पता नहीं लेकिन चर्चा यही है कि यह एनआरसी की तैयारी है। कुछ भी सही फिलहाल हर आदमी को इस बात का डर जरूर सता रहा है कि वह अपनी नागरिकता का प्रमाण पत्र दे भी पाएगा या नहीं? पता नहीं सरकार क्या—क्या मांग ले।

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