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एसआईआर की प्रक्रिया सवालों के घेरे में

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  • बीएलओ भी फॉर्म भरना नहीं जानते
  • अभी तक लोगों तक नहीं पहुंचे फॉर्म
  • वोटरों को सता रहा है वोट काटे जाने का भय

देहरादून। राज्य में इन दिनों चल रही एसआईआर की प्रक्रिया में तमाम तरह की मुश्किलें आने और धांधली की खबरें आनी शुरू हो गई है। वहीं इस प्रक्रिया के अत्यंत ही धीमी गति से चलने और इस काम में लगे बीएलओ तथा सुपरवाइजर की लापरवाहियों की भी शिकायतें मिल रही हैं। मतदाताओं को अभी से इस बात की आशंकाएं सताने लगी है कि कहीं अन्य प्रदेशों की तरह उनके नाम भी मामूली सी आपत्तियों के कारण काटकर उन्हें मताधिकार से वंचित न कर दिया जाए।
राज्य में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कराई जा रही एसआईआर (गहन मतदाता सूची पुर्न निरीक्षण) की यह प्रक्रिया 8 जून को शुरू हुई थी। राज्य में लगभग 80 लाख से अधिक मतदाता हैं। जिसमें अब कुछ युवा मतदाताओं के नाम भी जोड़े जाने हैं तथा मृतक जिनके नाम सूची में है काटे जाने हैं साथ ही अवैध मतदाताओं की छटनी की जानी है। जानकारी के मुताबिक अब तक 80 फीसदी के लगभग मतदाताओं को फॉर्म भरने के लिए बांटे जा चुके हैं। लेकिन रुद्रप्रयाग, चमोली, कर्णप्रयाग में अधिसंख्य मतदाताओं के पास फार्म नहीं पहुंचे हैं। राजधानी दून के रायपुर, अनारवाला, जोहड़ी गांव, सिनौला, मालसी, राजपुर सहित दर्जन भर क्षेत्रों में भी अभी तक कई लोगों को फॉम नहीं मिले हैं, जो एसआईआर की सुस्त गति को दर्शाता है।
दूसरी ओर एसआईआर के काम में लगे बीएलओ जो अध्यापक और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां हैं उन्हें खुद भी फॉर्म भरना नहीं आता है। ऐसे में मतदाताओं की समस्याओं तथा फॉर्म भरने में आ रही दिक्कतों को वह दूर नहीं कर पाते हैं। केंद्र द्वारा चुनाव से एन पूर्व एसआईआर करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। देखना होगा कि यह एसआईआर कितना सफल और असफल रहता है।

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