`न खाऊंगा न खाने दूंगा, ‘न सोऊंगा न सोने दूंगा, अगर किसी देश का प्रधानमंत्री पद संभालते ही देश की जनता को ऐसे शब्दों से संबोधित करें तो जनता का उस पर गर्व करना और इस बात को लेकर आस्वस्त होना स्वाभाविक है जनता यही सोचेगी कि वाकई अब उसके अच्छे दिन आने ही वाले हैं। लेकिन 12 साल बाद अगर देश की कोई अदालत सरकार की लूट और अवैध वसूली के मामले में यह कहकर निर्देशित करें कि इन आरोपों से लगता तो यही है कि इस गंभीर मामले की जांच होनी ही चाहिए और बेंगलुरु के विकासनगर थाने में देश की वित्त मंत्री सीतारमण, तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, वर्तमान व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा कर्नाटक एवं ईडी के अधिकारियों के खिलाफ संगठित आर्थिक अपराध की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया जाए। इस मामले की लड़ाई लड़ रही आदर्श जन संघर्ष परिषद ने कॉर्पाेरेट घरानों से 8000 करोड़ की अवैध वसूली के लिए वित्त मंत्री द्वारा ईडी को छापेमारी, गिरफ्तारी और डराने धमकाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जो इलेक्टोरल बांड के माध्यम से जाने—माने बिल्डर ग्रुप एसएमई वेदांता और एक अन्य कंपनी से की गई। खास बात यह है कि परिषद द्वारा इसके तमाम साक्ष्यों के साथ इस मामले को अदालत तक ले जाया गया है। इन आरोपों के साबित होने का मतलब होता है कि इस राजनीतिक वसूली में पूरी सरकार को जेल हो सकती है। यह मामला सीधे तौर पर उस इलेक्टोरल बांड से जुड़ा है जिसे देश की सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक बता कर रद्द कर दिया गया है। इस एफआईआर के होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन का कहना है कि हम तो बहुत पहले से संसद में इसे उठाते रहे हैं कि ईडी का इस्तेमाल सरकार द्वारा कॉरपोरेटरों को डरा—धमका कर राजनीतिक वसूली के लिए किया जा रहा है अब एफआईआर हो गई तो देखे क्या होता है? सत्ता और संवैधानिक प्रतिष्ठानों की मिली भगत से होने वाली इस वसूली से देश में क्या—क्या बदला है? जिस चुनाव में 2014 से पहले 10 15 हजार कुल खर्च होता था वह अब एक लाख करोड़ से ऊपर जा चुका है। चुनाव के लिए पैसा तो चाहिए? यह कहां से आता है और कैसे आता है यह भी सभी जानते हैं। लेकिन इसमें सत्ता की जिस भागीदारी का मामला सामने आया है वह अत्यंत ही गंभीर है। एफआईआर कराने वाली परिषद ने अपने आरोप पत्र में इसका ब्यौरावार खुलासा किया गया है कहां से कब—कब कितनी वसूली की गई और किसने इन बांड को भुनाया। कोरोना काल में पीएमओ के पते पर बनाए गए केयर फंड की कहानी भी हर देश के नागरिक के सामने है। जिसके सदस्यों में गृहमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक के नाम शामिल थे। उस समय इस केयर फंड में 12 से 14000 करोड़ तक पैसा आने की बात कही जाती है 3000 करोड़ अभी भी इसमें पड़े हैं यह पैसा कहां से आया और कहां खर्च किया गया इसका कोई हिसाब देने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया गया सरकार का कहना है कि इससे उसका कोई लेना—देना नहीं है। इससे बड़ा कमाल और क्या हो सकता है। इसे लेकर लोग भाजपा नेताओं पर यह कहकर आरोप लगाते रहे हैं कि आपदा में अवसर तलाश में का काम सिर्फ भाजपा ही कर सकती है। बीते एक दशक में किसने क्या लूटा और कैसे—कैसे लूटा और लूटने वालों को क्या कोई सजा हुई? यह सवाल सिर्फ सवाल ही बना हुआ है। हां पर यह जरूर है कि यह लूट का स्तर इतना व्यापक रहा है कि आम आदमी को 2 जून की रोटी भी अब मुश्किल हो चुकी है आर्थिक मंदी के तूफान के भंवर में पूरा देश फंसा हुआ है। बाहर आने का कोई रास्ता भी किसी को नहीं सूझ रहा है। न्याय के लिए भी अब आम आदमी कहां जाए? बात भ्रष्टाचार की हो या बेरोजगारी या आर्थिक संकट की। ऐसे लोग अब कॉकरोच जनता पार्टी की ओर ही देख रहे हैं। शायद कॉकरोच ही इस संकट से जनता को बचाएं?




