देश की युवा शक्ति सरकार और सिस्टम से इस कदर नाराज है कि अब उसका आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। युवाओं का यह गुस्सा बेवजह नहीं है। दिन—रात मेहनत करने के बाद उन्हें अपना भविष्य अंधकार मेंं दिख रहा है। अभी बीते दिनों नीट की परीक्षा का पेपर लीक हो गया जिसके कारण 50 लाख युवाओं की मेहनत पर पानी फिर गया अब नीट की परीक्षा दोबारा होगी। अभी सीबीएसई के पेपर में धांधली की खबरें आई थी। अपने परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों ने जब पुर्न मूल्यांकन के लिए अपनी परीक्षा पुस्तिका मांगी तो वार्डन ने उन्हें ऐसी कॉपियां थमा दी जिसमें पहला पन्ना उनके नाम और रोल नंबर का, बाकी अंदर किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिकाएं थी कई मामले इस तरह के सामने आने पर अभी हंगामा चल ही रहा था कि एसएससी कांस्टेबल जीडी की परीक्षा जो बीते कल होनी थी उसके परीक्षा केंद्रो पर क्षमता से दो—दो गुने ज्यादा छात्रों को बुला लिए जाने से जो हंगामा हुआ तो युवाओं ने परीक्षा केंद्रो पर भारी तोड़फोड़ की कंप्यूटर से लेकर सीपीयू और फर्नीचर सबको तोड़फोड़ डाला गया तथा हाईवे तक को जाम कर दिया गया इस परीक्षा में 50 लाख से अधिक छात्र—छात्राओं को परीक्षा देनी थी लेकिन यूपी से लेकर बिहार तक भयंकर अव्यवस्थाओं और नकल के चलते इतना हंगामा बरपा कि इस परीक्षा को भी रद्द करना पड़ा। जो बेरोजगार इससे आस लगाए बैठे थे कि उन्हें रोजगार मिलेगा वह यह कहते दिखे कि सरकार और सिस्टम ने सचमुच में हमें कॉकरोच बना दिया है। जो अपने भविष्य की तलाश में सालों साल इधर—उधर भटकते रहते हैं और सरकार तथा उसका सिस्टम इस कदर नकारा निकम्मा या फेल हो चुका है कि वह एक परीक्षा भी ठीक से नहीं करा सकता है ऐसी सरकार और व्यवस्था का क्या फायदा है। पहले जैसे तैसे अपनी पढ़ाई पूरी करो और जब काम के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करो और जब परीक्षा के समय आए तो कभी पेपर लीक तो कभी यह अव्यवस्था और परीक्षा रद्द। और फिर इसी क्रम को क्रमशः दोहराते रहो। अभी जब नीट का पेपर लीक हुआ था तब छात्रों के आत्महत्याओं के कई मामले सामने आए जो लगातार जारी हैं। कई छात्रों के सुसाइड नोट तो दिल दहलाने वाले थे। देश की शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारी चयन आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार द्वारा देश के युवाओं के साथ जिस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है वह वास्तव में उनके लिए अब असहनीय हो चुका है। सिस्टम पर सवाल उठाने वालों पर पुलिस की लाठियां चलाई जा रही है ऐसी स्थिति में अब अगर न्यायपालिका उन्हें परजीवी व कॉकरोच जैसी शब्दावली से नवाज रही है तो इन युवा कॉकरोचो की भीड़ का सड़कों पर तांडव स्वाभाविक है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने लाखों समर्थकों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है लेकिन सरकार मौन साधे हुए हैं शायद उसे लग रहा है कि शिक्षा मंत्री को हटाया तो कॉकरोचों का हमला और अधिक तेज हो जाएगा। लेकिन सत्ता में बैठे इन नेताओं को इस मुगालते में भी नहीं रहना चाहिए कि वह किसी हिट से इन्हें हिट करेंगे तो वह मर जाएंगे या कहीं छिपने की भी जगह उन्हें नहीं मिलेगी। देश की 50 करोड़ की इस युवा आबादी की बात सत्ता में बैठे लोगों को सुननी चाहिए। रोजगार मेलों का आयोजन कर पीएम व सीएम हजार—दो हजार लोगों को कई सालों इंतजार के बाद नियुक्ति पत्र देकर अपनी नाकामी को नहीं छुपा सकते। कॉकरोचों से पंगा सरकार को बहुत भारी भी पड़ सकता है।




