क्या देश के राजनीतिक फलक और सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव होने जा रहा है? या फिर परिवर्तन का यह शोर सिर्फ एक सामान्य प्रतिरोध तक ही सीमित है इस दौर में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो कुछ भी घटित हो रहा है उसका जो प्रभाव आम आदमी की जिंदगी पर पड़ रहा है उसे सिर्फ सामान्य बात मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता है यही कारण है कि इस समय सोशल मीडिया पर होने वाली पूरी चर्चा इसी सवाल के इर्द—गिर्द घूम रही है। बात चाहे पीएम मोदी के आर्थिक संकट की घोषणा की हो और लोगों से राष्ट्रीय हित में अपने खर्चों में कटौती करने की हो अथवा सीजेआई का कॉकरोच और पैराडाइज वाले बयान की हो अथवा दीपके द्वारा डिजिटल प्लेटफार्म पर कॉकरोच जनता पार्टी के गठन की तथा सरकार द्वारा उनके अकाउंट को राष्ट्रीय एकता व संप्रभुता को खतरा बताकर उसे बैन करने की हो। कोई भी घटना सामान्य नहीं कहीं जा सकती है। महज 5 दिन में कॉकरोच जनता पार्टी की फॉलोइंग का 2 करोड़ से ऊपर पहुंच जाना कोई मामूली घटना नहीं है। और न इस पार्टी द्वारा बताई गई वह पांच प्राथमिकताएं सामान्य बात है जिसमें सेवानिवृत्ति जजों को राज्यसभा की सदस्यता पर बैन से लेकर एक देशवासी का वोट काटने पर मुख्य चुनाव आयुक्त को राष्ट्रीय द्रोह में जेल भेजने और दल बदलू नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध जैसी बातें कही गई है। इजरायल—ईरान युद्ध के बीच लाल सागर के अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग को रोके जाने और अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा छेड़े गए टैरिफ वार तक सब कुछ अत्यंत ही गंभीर बातें हैं। जिनका असर पूरे विश्व की आबादी पर पड़ रहा है। असल में इनमें से कोई भी समस्या एक दिन में या अचानक पैदा नहीं हुई है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति इन समस्याओं को लेकर यह सोच बैठा है कि इनका समाधान रातों—रात निकल आएगा तो उसकी सोच गलत है। कोई भी सरकार या किसी भी राष्ट्र का सिस्टम अगर इतना सड़ चुका हो और दीमक ने उसमें लाखों छेद कर दिए हो तो फिर उसे आप किसी छोटे प्रयास से नहीं सुधार सकते हैं। इसके लिए या तो आपको बड़ी सर्जरी करनी पड़ेगी? या फिर पूरे ही सिस्टम को समाप्त कर नईं इमारत खड़ी करनी पड़ेगी। बीते दिनों हमने बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में जो कुछ देखा था वह सिस्टम के खिलाफ एक जनाक्रोश ही था। जिसे जेन जे के नाम से जाना गया। भारतीय जनता पार्टी जो देश में बीते 12 सालों से सत्ता में है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रयासों से इतनी डरी हुई है कि उसे ऐसा लगता है अब देश के युवा सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाकर ही चैन से बैठेंगे। भाजपा ने अपने शासन के 12 सालों में अगर कुछ भी ऐसा किया होता जैसा उसके नेता कहते रहे हैं तो शायद उसकी आज वैसी हालत नहीं होती जिन युवाओं और महिलाओं के वोट पर भाजपा सत्ता में है वह भी जानते हैं कि उनके साथ धोखा किया गया है। अभी हलिया चुनाव में तमिलनाडु में जनता ने जिस तरह से राष्ट्रीय दलों को नकारते हुए टीवीके को सत्ता के शीर्ष पर बैठा दिया गया उस चुनावी नतीजे का संदेश भाजपा और कांग्रेस जैसे दोनों दलों को समझने की जरूरत है। भले ही कॉकरोच जनता पार्टी कुछ करें न करें लेकिन उसने सरकार तथा सिस्टम को जड़ से हिला तो दिया ही है। देश के आम आदमी और युवाओं के सामने जब मरता क्या न करता जैसी स्थिति अगर है तो इसमें संशय भी नहीं होना चाहिए। देश की राजनीति में कुछ भी और कभी भी हो सकता है जो राजनीति ही नहीं सिस्टम को बदलकर रख दे। कब होगा? कैसे होगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।




