देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सत्ता संभालने से ही जिस तरह बड़ी—बड़ी बातें, वायदे और दावे किए भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ट्टमोदी है तो मुमकिन है’ के नारे के जरिए इसे इस कदर हवा दी गई कि देश के लोग तो भ्रमित हो ही गए खुद नरेंद्र मोदी भी स्वयं की उत्पत्ति को नॉन बायोलॉजिक घोषित की भ्रांति का शिकार हो गए। सत्ता के शीर्ष पर बैठे किसी व्यक्ति को अगर अपने भगवान होने का भरम पैदा हो जाए तो इसके क्या परिणाम होंगे वर्तमान की राजनीतिक और सामाजिक स्थितियां इसकी गवाही दे रही है हास्यास्पद बात यह है कि देश पर आए बड़े आर्थिक संकट की बात कहकर और राष्ट्रवाद के नाम पर जनता से अपने सुख तथा संसाधनों के त्याग की अपील करने के बाद पांच देशों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड में लोगों को संबोधित करते हुए जिस तरह भारत के विकास और देश के युवाओं के लिए लिमिटलेस एफर्ट का उपदेश दिया और भारत के विश्व गुरु होने की बात कही उस पर भले ही नीदरलैंड के लोग तालियां बजा रहे हो लेकिन देश के लोग उनका मजाक बना रहे हैं। लोग सोच रहे हैं कि पीएम मोदी कैसे इतने बड़े—बड़े झूठ बोल लेते हैं? एक तरफ देश के युवा रोजगार के लिए धक्के खा रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सरकारी सेवाओं के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और युवा आत्महत्याए करने पर मजबूर हो रहे हैं? अभी—अभी नीट की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने से कोहराम मचा हुआ है। गोवा के एक छात्र ने आत्महत्या से पूर्व अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि अब वह कोई प्रतियोगी परीक्षा नहीं देगा। इस छात्र का यह अंतिम प्रयास था जो पेपर लीक होने के कारण रद्द की गई परीक्षा के वजह से बेकार चला गया उसका दर्द न तो सरकार समझ सकी न ही वह सिस्टम जो भाजपा की सरकार द्वारा बनाया गया है। उसके परिवार का दर्द जिसने अपने 22 साल के पढ़े लिखे बच्चे को खो दिया प्रधानमंत्री मोदी का भाषण जले पर नमक छिड़कने से कम नहीं है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने नीट की परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक मामले को लेकर अपने एक्स हैंडल पर जो पोस्ट लिखी गई है काबिले गौर है अब तक 80 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की बात लिखते हुए उनके द्वारा भाजपा तथा संघ द्वारा तैयार किए गए उस नेक्सस पर उन्होंने तीखा वार किया है जिसने देश के एजुकेशन सिस्टम और प्रतियोगी परीक्षा को कमाई का धंधा बना दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को 2 करोड़ हर साल रोजगार देने का वायदा किया था लेकिन वह 2 लाख को भी रोजगार नहीं दे सके हैं। कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने सबसे पहले उन्हें जब फेकू प्रधानमंत्री कहा था तब तमाम भाजपा के नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री की शान में गुस्ताखी बताया था। लेकिन अब सोशल मीडिया पर पीएम के झूठों की फेहरिस्त देखी जा सकती है सब कुछ सबके सामने है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भले ही भाजपा चुनाव दर चुनाव जीत रही हो लेकिन अब उनकी कितनी विश्वसनीयता शेष बची है? इसे अब भाजपा के नेता भी जान चुके हैं जनता की बात तो छोड़ ही दीजिए। हैरता की बात यह है कि उनके द्वारा अभी भी लंबी—लंबी फेंकने में कोई कमी नहीं की जा रही। विकसित भारत और पांच ट्रिपलिन वाली इकोनामी तथा युवाओं के युक्त देश की तस्वीर। इससे बड़ी और दूसरी कोई विडंबना भला क्या हो सकती है। यह भी इसलिए संभव है क्योंकि मोदी है तो मुमकिन है।




