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अराजकता का जिम्मेवार कौन?

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चुनाव नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल से जिस तरह की हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और अराजकता की तस्वीरे सामने आ रही हैं वह न सिर्फ निंदनीय और चिंताजनक है बल्कि उस लोकतंत्र जिस पर हम गर्व का ढिंढोरा पीटते रहते हैं उसके वर्तमान की हकीकत को बयां करने वाली है। पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी 4 मई से हो रहा है वह कोई अप्रत्याशित नहीं है इसकी पूरी स्क्रिप्ट पहले ही तैयार की जा चुकी है। भाजपा की जीत के बाद यह सब होना सुनियोजित था, सुनिश्चित था। भाजपा ने देश में 11 साल के अपने शासनकाल में जिस तरह का वातावरण तैयार किया है यह सब उसी की परिणिति है। चुनाव नतीजे आते ही जिस तरह भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा टीएमसी कार्यालय एवं और कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए हैं और हिंसा तथा आगजनी की गई है उसमें अब तक जगह—जगह से कहीं से दो तो कहीं से चार लोगों के मरने की खबरें आई है। भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा एक व्यक्ति को ममता जैसी साड़ी पहनाकर, जंजीरों में बांधकर सड़कों पर घूमाने और बुलडोजरों के साथ जुलूस निकाले जा रहे हैं तथा मीट विक्रेताओं की दुकानों में तोड़फोड़ की जा रही है। उसे अब प्रदेश भाजपा के नेताओं व प्रवक्ताओं द्वारा पोस्ट इलेक्शन की वारदातें बताकर या फिर हिंसा के लिए टीएमसी कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदार बना कर पल्ला झाड़ा जा रहा है, वह इस हिंसा की सच्चाई बताने के लिए काफी है। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का जो वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि अब सबका साथ, सबका विकास नहीं हमें यह नारा बदलना होगा जो हमारे साथ हम उसके साथ, जो हमारे साथ उसका विकास। बस उसी का विकास। उनके द्वारा पीएम मोदी के नारे को अब पूरी तरह से पलट दिया जाना भाजपा की नीति और नियत का खुलासा करने और भाजपा के असली चाल चरित्र को बताने समझने के लिए बहुत काफी है। केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने के लिए जो ढाई से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी वह सुरक्षा बल अब कहां है तथा वह क्यों इस हिंसा और आगजनी तथा अराजकता को नहीं रोक पा रहे हैं? इसका कोई जवाब अब किसी के पास नहीं है। भाजपा ने देश में धर्म और सांप्रदायिक राजनीति का वह जो बीज 11 सालों में बोया था वह किस हद तक वटवृक्ष बन चुका है तथा देश के आम आदमी को अब इसका किस तरह का खामियाजा भोगना पड़ रहा है? पश्चिम बंगाल के वर्तमान हालात को देखकर अब यहां भाजपा को वोट देने वाले भी सोचने पर विवश होंगे। सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल के हालात को नेपाल के तख्तापलट जैसी घटनाओं के दौरान फैली अराजकता और गोधरा कांड जैसी घटनाओं से इसकी तुलना की जा रही है। भले ही यह सब गलत सही लेकिन पश्चिम बंगाल के वर्तमान हालात को देश और समाज के लिए ही नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र के लिहाज से भी कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इसके दूरगामी परिणाम देश की राजनीति और समाज पर पढ़ने तय हैं। पश्चिम बंगाल में भले ही भाजपा चुनावी नतीजों में जीत गई हो लेकिन सच बात यह है कि चुनावी नतीजों के बाद यहां जो कुछ हो रहा है वह भाजपा की सबसे बड़ी हार है। इस चुनाव की निष्पक्षता तो पहले से ही सवालों के घेरे में थी रही सही कमी अब परिणाम के बाद पैदा हुए हालात ने पूरी कर दी है। जिसके लिए सिर्फ भाजपा ही जिम्मेदार है, कोई और नहीं।

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