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आप का अब क्या होगा

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समाजसेवी अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की कोख से जन्मी आम आदमी पार्टी जितनी तेजी से देश के राजनीतिक फलक पर उभरी थी उससे भी अधिक तेजी से अब रसातल में जाती दिख रही है। देश में व्याप्त भयंकर भ्रष्टाचार को मिटाने का उद्देश्य लेकर पैदा होने वाली आदमी पार्टी के संयोजक और संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने जब इस पार्टी के गठन की मंशा जाहिर की थी तब अन्ना हजारे ने उन्हें यह कहकर रोकने का प्रयास किया था कि वह कीचड़ के दलदल से दूर रहे लेकिन उन्होंने यह दलील देकर की कीचड़ को अगर साफ करना है तो कीचड़ में उतरना ही पड़ेगा उनकी बात को खारिज कर दिया था। इस पार्टी को लेकर देश के बुद्धिजीवियों व कुछ युवाओं में इस कदर उत्साह देखा गया कि अनेक बड़े चेहरे इस पार्टी का हिस्सा तो बने लेकिन बाद में वह उतनी ही जल्दी चले भी गए और जो पार्टी में बने भी रहे वह अब पार्टी से पल्ला झाड़ झाड़ कर जा रहे हैं इसका ताजा उदाहरण है राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और उनके साथ 6 अन्य सांसद जिन्होंने कल विधि— विधिवत भाजपा का दामन थाम लिया है। पार्टी के 10 में से अगर 7 संासद चले गए हो तथा संजय सिंह को छोड़कर बाकी भी जाने को तैयार बैठे हो उसका सीधा मतलब यही है कि आधी आम आदमी पार्टी का विलय भाजपा में हो चुका है। चर्चा यह भी है कि भाजपा का अगला टारगेट अब पंजाब और वहां की मानं सरकार है। खैर यह भविष्य की बात है इस पर बात ही क्या करनी है ? राघव चड्ढा का कहना है कि इस पार्टी का जो मूल उद्देश्य था उससे पार्टी भटक चुकी है बड़ी सीधी सी बात है कि अब देश में वैसा मीडिया भी नहीं रहा है जो उनसे सवाल कर पाता कि जिस भाजपा का पटका आपने आज पहना क्या उसमें अब वह सब गुण नजर आ रहे हैं जो आम आदमी पार्टी में नहीं थे या जिन अवगुणों के कारण आपको इस पार्टी को छोड़ना पड़ा है उसका यही कारण था या फिर कुछ और? आप को छोड़ने वाले एक राज्यसभा सांसद के ठिकानों पर अभी पड़े छापे भी तो इसका कारण हो सकते हैं। संजय सिंह तो कह रहे हैं कि इन नेताओं ने पार्टी के साथ गद्दारी की है तथा ईडी और सीबीआई के डर से उन्होंने पार्टी छोड़ी है। इस बड़ी टूट—फूट और भविष्य में इससे भी बड़ी भगदड़ की संभावनाओं के बीच अब आम आदमी पार्टी का क्या वजूद शेष बच पाएगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा लेकिन बीते एक दशक में राजनीति का चाल चरित्र और चेहरा जिस तरह से बदला है और बदल रहा है उसमें अब किसी सुचिता और सिद्धांतों की बात भी नहीं की जा सकती है। संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक लाभ और सत्ता के लिए नेताओं के बीच जिस तरह की कुर्ता घसीटन चल रही है षड्यंत्र रचे जा रहे हैं वहां कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। शराब घोटाले में भले ही अरविंद केजरीवाल जीत गए हो लेकिन क्या जेल की हवा खाने से स्वयं को बचा पाए अब कैसे राजनीतिक कीचड़ साफ करो या मरो इसी राजनीति के कीचड़ में डूब कर। आम आदमी पार्टी कि अगर सबसे बड़ी उपलब्धि कुछ है तो वह मुफ्त की रेवडिं़या राजनीतिक सौगात जो उन्होंने देश को दी। जिसका खामियाजा अब पूरा देश भुगत रहा है।

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