इस देश का समाज और सिस्टम इन दिनों किस दिशा में जा रहा है? इस सवाल को लेकर देश के आम आदमी के चेहरे पर खिची उन चिंताओं की तथा असुरक्षा की रेखाओं को हर कोई गंभीरता से महसूस कर रहा है जिसके पीछे नफरत की और सामाजिक विभाजन की वह गहरी खाई तैयार किया जाना है जिसे सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। सबका साथ सबका विकास और सब का विश्वास जीतने का नारा देने वालों का यह नारा कब नफरत के उसे भंवरजाल तक पहुंच गया जहां सत्ता की सहयोगी करणी सेना का एक सदस्य बकायदा अपना एक पोस्ट कर रहा है जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और 25 उन सांसदों को घर में घुसकर गोली मारने की धमकी दी जाती है, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के ऑफिस में घुसकर कथित तौर पर हंगामा किया था। करणी सेना का यह सदस्य ओम बिड़ला का नजदीकी बताया जाता है उसकी बिड़ला के साथ कई तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं। राज सिंह नाम के इस युवक ने शासन—प्रशासन को 24 घंटे का समय देते हुए अल्टीमेटम दिया है कि अगर विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वह सभी को उनके घर में घुसकर गोलियों से मार देगा। सवाल यह है कि इस तरह के हालात कोई एक दिन में पैदा नहीं हुए हैं। लंबे समय से देश में देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को और सर तन से जुदा जैसे नारे और किस्सों के साथ नेताओं द्वारा जो हिंदू—मुस्लिम का राग अलापा जा रहा है और मंचों से वह तुम्हारी बहू बेटियों को उठा ले जाएंगे, उनके मंगलसूत्र छीन ले जाएंगे, तुम्हारी भ्ौंस खोल दी जाएगी जैसे भाषण दिए जा रहे हैं तथा लव जिहाद और लैंड जिहाद का डंका पीटा जा रहा है उसे देश के लोग सालों से देख और सुन रहे हैं। बीते 24 घंटे में इस घटना जिसमें 25 सांसदों को गोली मारने की बात कही गई है इसके अलावा एक और अन्य घटना देश की राजधानी दिल्ली की नंद नगरी से सामने आई जो दिल दहला देने वाली है। कुछ गुंडे एक 15 वर्षीय नाबालिक को घेर कर पीटना शुरू कर देते हैं और जब वह बच्चा अपने पिता जिनका नाम उमरुद्दीन बताया जा रहा है से फोन पर गुहार लगाता है मुझे बचा लो। एक पिता जब अपने इस बच्चे को बचाने पहुंचता है उसे गोली मार कर उसकी हत्या कर दी जाती है। इस घटना का इस बच्चे के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा क्या इस खौफनाक सदमें से वह कभी उभर पाएगा? शायद इस मुद्दे पर आज समाज में या सत्ता में बैठे लोग नहीं सोच सकते? हर रोज होने वाली इन घटनाओं से देश के समाज और भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी परवाह न तो उन नफरती चिंटुओ को है जो इस तरह की घटनाओं का हिस्सा बने हुए हैं न शासन प्रशासन में बैठे अन्य किसी को भी। लेकिन निश्चित तौर पर यह हालात अत्यंत ही डरावने हैं। अभी बीते दिनों कोटद्वार में जिस मोहम्मद दीपक ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी अब उसकी हत्या के लिए कुछ लोग इनाम घोषित कर रहे हैं। सत्ता की विचारधारा के खिलाफ बोलने वालों को आतंकी बता दिया जाना, देशद्रोही कहा जाना सिर्फ चिंतनीय नहीं है। नफरत की जो फसल बीते कुछ सालों में बोई गई है वह देश और समाज पर आने वाले संभावित खतरे की घंटी है। डर और आतंक के बीच समाज और मीडिया की खामोशी भी हैरान करने वाली है। 1948 में तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ प्रमुख को एक पत्र लिखकर इस तरह की घटनाओं को बल मिलने की आशंका जताई गई थी। जिसके बाद संघ पर प्रतिबंध लगाया गया। हिंदू राष्ट्र और गौ रक्षा के नाम पर हिंदुओं को एक जुट किया जाना गलत न सही लेकिन यह काम विपक्ष को या देश के समाज के अन्य वर्गों को निशाना बनाकर नहीं किया जाना चाहिए अन्यथा फिर हमें किसी बड़ी अनहोनी का सामना करने को तैयार रहना होगा।




