लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल उत्तराखंड आए जरूर लेकिन मानसूनी आपदा से होने वाले नुकसान को अपनी आंखों से देखने के लिए वह जौलीग्रांट से आगे नहीं जा सके। प्रधानमंत्री ने जौली ग्रांट हवाई अड्डे पर आपदा राहत काम में जुटी टीमों के लोगों से हालात की जानकारी ली तथा आपदा प्रभावित कुछ लोगों से भी उनका हाल—चाल जाना, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं और अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रजेंटेशन भी देखा तथा 1200 करोड़ की सहायता राशि की घोषणा की गई। उन्होंने आपदा में जान गवाने वाले लोगों के आश्रितोंं को दो—दो लाख तथा घायलों को 50—50 हजार व अनाथ हुए बच्चों की देखभाल के लिए अलग से सहायता देने को भी कहा है। अच्छा तो यही होता कि पीएम आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में जाकर खुद तबाही के उस मंजर को देख पाते जो लोगों की आपबीती है। लेकिन खराब मौसम के कारण वह हवाई सर्वे पर नहीं जा सके। सच बात यह है कि अगस्त के पहले ही सप्ताह से राज्य में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं के कारण भारी तबाही हुई है। अकेले उत्तरकाशी जिले में 100 से अधिक लोगों की जाने जा चुकी है। राज्य के अन्य स्थानों पर भले ही इस आपदा काल में हुए जान माल का कोई सही आकलन न किया जा सके लेकिन धराली की आपदा के समय कितने लोग मलवे में दबकर मर गए। उनका कोई सही आंकड़ा अभी भी सामने नहीं आ सका है। क्योंकि मलबे में दबे लोगों को तलाशना भी संभव नहीं हो पा रहा है। इस आपदा काल में सड़कों और कृषि भूमि को कितना नुकसान हुआ है, के अलावा लोगों के घर, मकान होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों को हुए भारी नुकसान के कारण उनके सामने रोजी—रोटी का संकट मुंह बाए खड़ा है। खास बात यह है कि पूरे राज्य में हालात लगभग एक जैसे ही हैं। उससे भी चिंताजनक बात यह है कि अभी भी बर्बादी का यह मंजर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब प्रधानमंत्री देहरादून में थे उसी समय नैनीताल से भवाली सड़क का लगभग आधा किलोमीटर का हिस्सा पहाड़ के साथ गहरी खाई में समा गया। इस मार्ग को सुचारु करने में महीनों का समय लग सकता है। गंगोत्री हाईवे और यमुनोत्री हाईवे लंबे समय से बंद होने के कारण चार धाम यात्रा पूर्णतया बंद है। राज्य की सड़कों पर आवागमन या तो पूरी तरह ठप हो चुका है या फिर इतना असुरक्षित हो गया है कि लोग जान हथेली पर रखकर आवाजाही कर पा रहे हैं। पीएम ने पंजाब के लिए 1600 करोड़ और हिमाचल के लिए 1500 करोड़ और अब उत्तराखंड के लिए जो 1200 करोड़ की मदद देने की बात कही है उससे पीड़ितों को कितनी राहत मिल सकेगी इस पर कुछ भी कहना बेकार है। केंद्रीय टीम ने सर्वे किया है उस पर केंद्र कितनी सहायता देगा पता नहीं उत्तराखण्ड सरकार की 5702 करोड़ की मांग थी। पीड़ितों व प्रभावितों की विस्थापन की मांग का क्या होगा, 350 गांव पहले ही विस्थापन की सूची में है। इस आपदा के जख्म कैसे भर पाएंगे यह सवाल सभी को परेशान कर रहा है।




