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गालियों वाली राजनीति

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एक ऐसा व्यक्ति जिसकी राजनीति में अपनी कोई पहचान नहीं है। राहुल गांधी की बिहार में अभी संपन्न हुई वोट का अधिकार यात्रा के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वर्गीय माता जी को अभद्र भाषा का इस्तेमाल (गाली) देता देखा गया था। इस व्यक्ति को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। पता चला कि वह टेंपो चालक है तथा वह कभी किसी दल का समर्थक रहा है तो कभी किसी दल का। तथा वर्तमान में औवेसी की पार्टी का कार्यकर्ता है। पुलिस उसके खिलाफ जो भी कानूनी कार्यवाही हो सकती है, कर रही है। कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल एक स्वर से इस व्यक्ति के घृणित कार्य और सोच की निंदा कर रहे हैं जो होनी भी चाहिए क्योंकि मंा से अधिक सम्मानित शब्द सनातन में कोई नहीं हो सकता। मां का दर्जा तो भगवान से भी बड़ा माना जाता है। इस मामले ने तूल उस समय पकड़ा जब प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार जाकर अपनी जनसभा में कांग्रेस व विपक्षी दलों की घेराबंदी करते हुए अपने 35 मिनट के संबोधन में इस मुद्दे पर 30 मिनट का भाषण ही नहीं दिया अपितु रोने धोने का काम किया। भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे को ऐसा विक्टिम कार्ड बना डाला कि बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी दिखावटी आंसू बहाते दिखे। हर एक राज्य में भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ उनके कार्यालयों पर प्रदर्शन और तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। बात यंही समाप्त नहीं हुई आज बिहार बंद किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या देश भर में कोहराम मचाने वाली भाजपा के लिए क्या इससे बड़ा कोई अन्य मुद्दा रहा ही नहीं है। जब भाजपा इस मुद्दे को इतना बड़ा बना चुकी है तो अब लोग भी पूछ रहे हैं कि क्या बीजेपी उन तमाम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इसे इतना बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है जिसके कारण अब उसकी राजनीतिक जमीन खिसकती दिख रही है। बिहार में नवंबर में चुनाव होने जा रहे हैं। उससे पूर्व विपक्ष ने यहां वोट अधिकार यात्रा के जरिए जो तहलका मचा दिया है और वोट चोरी और बिहार में जारी एसआईआर के मुद्दे को इतनी बुलंदियों तक पहुंचा दिया है कि बिहार चुनाव में उसे अपनी जीत सुनिश्चित दिखाई दे रही है और इससे घबराकर भाजपा विपक्ष के इस नैरेशन को तोड़ने का प्रयास कर रही है। इसे लेकर प्रशांत किशोर से लेकर अन्य तमाम दलों के नेता भी भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ा रहे हैं। दिल्ली में होने वाली प्रेस वार्ताओं तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कब—कब किस—किस महिला के लिए क्या—क्या कहा या अन्य भाजपा नेताओं ने कितनी गंदी भाषा श्ौली का उपयोग किस—किसके लिए किया एक—एक कर सभी को न सिर्फ गिनाया जा रहा है बल्कि अब उल्टे मोदी से ही यह पूछा जा रहा है कि क्या वह सभी महिलाएं किसी की मां या बहन नहीं है। राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी से लेकर राजद प्रवक्ता सरिता पासवान तक ऐसी अनगिनत महिलाओं के नाम की लंबी फेहरिस्त विपक्ष के पास है विपक्ष भाजपा नेताओं से पूछ रहा है कि क्या वह अपने इन नेताओं के खिलाफ भी कोई कार्यवाही करेगे? एक जो इस मुद्दे का चिंतनीय सवाल है वह यह है कि सभी को पता है कि किसी कांग्रेसी नेता ने इस कृत्य को नहीं किया है तो फिर भाजपा कांग्रेस को लेकर क्यों उग्र है दूसरा सवाल यह है कि नरेंद्र मोदी जो सर्वाेच्च और सम्माननीय पद पर आसीन हैं क्या उन्हें इस तरह की राजनीति करनी चाहिए। जो सोनिया गांधी को कांग्रेस की विधवा और जर्सी गाय जैसे भद्दे शब्द बोलते रहे हैं। ममता बनर्जी जिनके लिए वह चुनाव प्रचार में दीदी ओ दीदी का संबोधन आपत्तिजनक तरीके से करते थे जिसकी पूरे देश में भर्त्सना भी हुई क्या उन्हें इस तरह के मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए। लेकिन जब सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर बैठे पीएम खुद ही इसे हवा दे रहे हैं तब देश की राजनीति का स्तर गिरना तय है। इस गाली वाली राजनीति का अगला दौर क्या होगा? चिंतनीय है।

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