पाकिस्तान के हुक्मरान या फिर देश के किसी भी कोने में छिप कर बैठी फिकरापरस्त ताकते अगर यह समझें बैठी है कि पहलगाम में किए गए बड़े आतंकी हमले के जवाब में भारत कुछ नहीं करने वाला है तो यह उनकी भूल ही है। समय जैसे—जैसे बीत रहा है वैसे—वैसे इस बात की संभावनाएं मजबूत होती चली जा रही है कि इस बार पाकिस्तान के खिलाफ कुछ इतना बड़ा होगा जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता है। क्योंकि पहलगाम में किया गया हमला सिर्फ आतंकी हमला नहीं है। उन निर्दाेष हिंदुओं का कत्ल है जिसके लिए उसे कोई माफी दिया जाना संभव नहीं है। दरअसल बात यह है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से जो आतंक का खेल दशकों से खेला जा रहा है अब उसकी सारी सीमाओं को पाकिस्तान लंाघ चुका है। और उसने भारत के अब तक के रवैये को हमारे देश की कमजोरी मान लिया है। जिसके तहत उसका हौसला इस कदर बढ़ चुका है कि अपनी परमाणु ताकत की धमकियां देने वाले पाक के नेताओं को न पिछला इतिहास याद रहा है न इस बात का अनुमान हो पा रहा है कि भारत किस हद तक जा सकता है। भारत की धरती पर जिस तरह तालिबानी हिमाकत पहलगाम में की गई है वह हमारे देश और सनातन धर्म पर इतना बड़ा हमला है कि उसमें माफी की कोई गुंजाइश शेष नहीं बची है। पाकिस्तान में बैठे लोग समय बीतने के साथ भले ही यह सोच रहे हैं कि धीरे—धीरे मामला शांत हो जाएगा लेकिन भारत की सरकार और आम लोग क्या सोच रहे हैं इसका अंदाजा पाकिस्तान के नेताओं को नहीं हो सकता है। भारत की सरकार को इस बात से अब फर्क नहीं पड़ता है कि पाक का मीडिया और नेता क्या—क्या बकवास कर रहे हैं भारत का फोकस इस वक्त सिर्फ और सिर्फ इस बात पर है कि उसे क्या करना है। सरकार और प्रधानमंत्री मोदी जो कह चुके हैं वह अब होकर ही रहेगा, यह अलग बात है कि इसमें समय कितना लगता है। इस बात को कोई नहीं जानता है कि जो होगा वह कितना बड़ा होगा? लेकिन जो कुछ होगा पूरी तैयारी के साथ होगा और होना भी चाहिए क्योंकि यह अब पूरा देश चाहता है और देशवासियों द्वारा इसकी पूरी छूट सरकार को दे दी गई है कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सेनाध्यक्षों को कोई भी कार्यवाही करने और अपने टारगेट खुद तय करने की आजादी दे दी गई है। दिल्ली में लगातार जिस तरह से हाई लेवल मीटिंगों का दौरा जारी है वह बेवजह नहीं है। सरकार एक—एक कदम आगे बढ़ रही है इस बार जो सरकार को पूरे देश के अंदर से समर्थन मिल रहा है खास कर कश्मीर के लोगों का वैसा इससे पूर्व कभी नहीं देखा गया है इसलिए यह कहना भी गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के पास एक सुनहरा मौका है। जब वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसे साहसिक फैसले लेने का जोखिम उठा सकते हैं और पाकिस्तान का फन कुचल सकते हैं जो इसके बाद देश की धरती पर दोबारा कभी हुंकारने का साहस न कर सके। भारत की तरफ से क्या कुछ किया जाता है इसके लिए थोड़े समय का इंतजार कीजिए। भले ही इस बात को समझने में बहुत समय लगा हो कि पाकिस्तान को इंसानियत की भाषा समझ नहीं आ सकती है लेकिन अब फैसले की घड़ी नजदीक आ चुकी है और इसका मौका भी पाकिस्तान ने भारत को स्वयं ही मुहैया कराया है। इसलिए उसके साथ होने वाले किसी भी सलूक के लिए भी वह खुद ही जिम्मेवार होगा।




