देहरादून। पुलिस ने चार ठगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तमंचा, कारतूस व चाकू बरामद किये। पुलिस ने सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनको न्यायालय में पेश किया जहां से उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एसएसपी देहरादून को गोपनीय माध्यमों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ठगी की कई घटनाओं को अंजाम देने वाले ठग गिरोह के कुछ सदस्य के देहरादून में आने तथा किसी बड़ी घटना का अंजाम देने की फिराक में सहसपुर क्षेत्र में छुपे होने की सूचना प्राप्त हुई। आस पास के क्षेत्र में उक्त सूचना पर एसएसपी देहरादून द्वारा प्रभारी निरीक्षक सहसपुर को तत्काल प्रभावी कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया, जिस पर थाना सहसपुर में पुलिस की अलग—अलग टीमें गठित कर थाना क्षेत्र में अलग—अलग स्थानों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस टीम द्वारा सभावाला से सहसपुर की ओर जाने वाले रास्ते पर निर्माणाधीन हाइवे मार्ग पर सुनसान स्थान पर चोरी की योजना बनाते सुमित गौतम, विकास, रमेश गौतम तथा मोनू कुमार को एक तमंचा 01 जिन्दा कारतूस, 01 चाकू, 02 खुखरी व 27 एटीएम कार्ड तथा 02 मोटरसाईकिलों सहित गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उनके द्वारा बताया गया कि सुमित, विकास व रमेश सहरानपुर में एक ही गांव के रहने वाले है तथा मोनू जिला मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। उनके गिरोह का सरगना संजय पुत्र अमर सिंह जो कि चन्द्रपुर थाना बड़गांव जिला सहारनपुर का रहने वाला है तथा उसके द्वारा पूर्व में देहरादून में विकास नगर तथा ऋषिकेश क्षेत्र में एटीएम ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया गया था, जिसमे वह जेल गया था। बरामद एटीएम के सम्बन्ध में जानकारी करने पर उनके द्वारा उक्त एटीएमओ को एटीएम मशीन से पैसे निकालने आये लोगों से ठगी कर प्राप्त करना बताया गया। आरोपी एटीएम मशीन से पैसे निकलने आये व्यक्तियों को अपनी बातों में उलझाकर उनके पिन कोड की जानकारी प्राप्त कर एटीएम बदल लेते है तथा खाते में धनराशि होने पर उस कार्ड धारक के खाते से रकम निकाल लेते हैं। आरोपी लोगों को डराने धमकाने के लिए अपने पास तमंचे तथा खुखरी आदि रखते है। देहरादून में चारों आरोपियों की बैंक एटीएम व ज्वैलरी की दुकानों की रैकी कर चोरी की बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना थी, जिसके लिए वह अपने साथ तमंचा, कारतूस व खुखरी/ चाकू लेकर सुमित तथा मोनू की मोटरसाईकिलों से देहरादून आये थे, उनकी योजना रात्रि में किसी बैंक एटीएम या ज्वैलरी की दुकानो को तोड कर वारदात को अंजाम देना तथा उसके बाद वापस अपने गांव भागने की थी। पुलिस ने सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनको न्यायालय में पेश किया जहां से उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।




