May 12, 2026देहरादून। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 6 जून 1967 की द हिन्दू की कथित फ्रंट पेज तस्वीर फर्जी निकली है। अखबार द हिन्दू ने स्वयं स्पष्ट किया है कि यह पेज उनके आधिकारिक आर्काइव का हिस्सा नहीं है और इसे डिजिटल रूप से एडिट किया गया है।दरअसल, हाल के दिनों में एक कथित खबर तेजी से शेयर की जा रही थी, जिसमें दावा किया गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी। अब द हिन्दू ने बयान जारी कर कहा है कि वायरल इमेज असली नहीं है। अखबार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पुरानी खबर या दस्तावेज को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें, ताकि फर्जी सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सके।टाइम्स नाउ समेत कई समाचार संस्थानों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विभिन्न नेताओं, जैसे कर्नाटक भाजपा प्रवक्ता विजय प्रकाश, ने इंदिरा गांधी के कथित ट्टसोना न खरीदने’ वाले बयान की कहानी को प्रमुखता से प्रसारित किया। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सोना खरीदने को लेकर की गई अपील से समानता दिखाना था।यह दावा उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित किया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पीएम मोदी ने देशवासियों से अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए खर्चों में कटौती करने की अपील की। उन्होंने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव का उल्लेख करते हुए नागरिकों से गैर—जरूरी सोने की खरीदारी यहां तक कि शादी—ब्याह के लिए सोना खरीदने को भी कम से कम एक साल के लिए टालने का आग्रह किया।
May 12, 2026देहरादून। आरटीओ के एक दारोगा पर एक व्यापारी द्वारा रिश्वत लेेने का आरोप लगाते हुए उसे बंधक बना लिया गया। मामले की जानकारी मिलने पर विभागीय मंत्री को कहना पड़ गया कि जांच में दोषी पाए गए कर्मी को दंडित किया जाएगा, जिसे संस्पेड कर दिया गया है साथ ही मामले से जुड़ी तहरीर पुलिस चौकी में भी दे दी गयी है। आरोपी आरटीओ के दारोगा का कहना है कि वह तो वहंा रसमलाई खाने आया था। जिसे इस प्रकरण में फंसा दिया गया है।रिश्वत खोरी का यह मामला देहरादून के मियांवाला क्षेत्र का है। इस इलाके में गजराम सिंह चौहान का कार्यालय है। सोशल मीडिया में खबर वायरल हुई कि ट्रांसपोर्टर गजराम ने अपने कार्यालय में एक दो स्टार वर्दीधारी आरटीओ कर्मी को बंद कर दिया। जिस पर मौके पर भीड़ जमा हो गयी।बताया जा रहा है कि आरटीओ कर्मी एक घण्टे से अधिक समय तक अंदर बन्द रहा। मीडिया कर्मियों के आने के बाद ही सिंह एंटर प्राइजेज का शटर ऊपर उठाया गया। अंदर का नजारा बेहद दिलचस्प था। आरटीओ कर्मी हेलमेट समेत बैठा हुआ था। और गजराम सिंह चौहान खुलेआम आरोप लगा रहे थे कि ये कर्मी हर महीने दुकान पर आता है। और 8 हजार रुपए महीना ले जाता है।आज भी यह पैसे लेने आया था। और हमने इसे अंदर ही बन्द कर दिया। उधर, आईटीओ कर्मी ने कहा कि गजराम ने उन्हें रस मलाई खिलाने के लिए बुलाया था। वो यहां आते रहते हैं। जबकि गजराम ने मेज पर रखे नोटों का लिफाफा भी दिखाया। गजराम ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में ली गयी रिश्वत के वीडियो फुटेज उनके पास है। जबकि विश्वास से लबरेज नजर आ रहे आरटीओ कर्मी ने चुनौती देते हुते रिश्वत लेने से जुड़े फुटेज दिखाने को कहा। इस बीच समूचे झगड़े की वीडियो बनती रही। आरटीओ कर्मी अपने उच्चाधिकारियों से भी मोबाइल पर पूरी स्टोरी बताता रहा। और ऊपर से निर्देश भी लेता रहा। दो तीन घण्टे तक चले ड्रामे के बाद आरटीओ कर्मी मोटरसाइकिल पर किक मार कर चलता बना।आरटीओ प्रवर्तन दल में मौजूद कर्मी का कहना था कि वो अक्सर इनकी दुकान में आते रहते हैं। रिश्वत लेने जैसी कोई बात ही नहीं है। जबकि संत कबीर स्कूल के पास निर्माण सामग्री कारोबारी गजराम सिंह ने आरोप लगाया कि एक आरटीओ कर्मी उनके कार्यालय में रिश्वत लेने ही पहुंचा था। और इसीलिए उन्होंने शटर बन्द कर दुकान में कैद कर दिया।व्यापारी गजराम सिंह ने कहा कि वह अपने कारोबार में पारदर्शिता रखते हैं और अपने प्लॉट में बिकने वाली हर सामग्री के दाम सार्वजनिक रूप से लिखते हैं। उनका आरोप है कि इसी ईमानदारी के बावजूद उनसे अवैध रूप से पैसे मांगे जा रहे थे।इस मसले की गूंज परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा तक भी पहुंची। बत्रा ने जांच का भरोसा दिया है। इसके अलावा आरटीओ के अन्य अधिकारी वॉयरल वीडियो के ट्टप्रभाव’ को कम करने की कोशिश में कुछ पत्रकारों से गुहार करते नजर आए। मामले की लीपापोती भी शुरू हो गयी है। वहीं समाचार लिखे जाने तक आरटीओ का यह दारोगा संस्पेड कर दिया गया था।
May 12, 2026आरटीआई ने एएसआई पर बनाया दबाव देहरादून। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आखिरकार 2015 में टिहरी के एक दूरदराज के गाँव में मिली तलवारों और हथियारों की वैज्ञानिक जाँच पूरी कर ली है। टिहरी गढ़वाल के पेपोला ढुंग में सड़क निर्माण के काम के दौरान जमीन से निकली एक तलवार ने एएसआई को भी हैरान कर दिया है।इस तलवार के बारे में टिप्पणी करते हुए, वैज्ञानिक जाँच पर आधारित एएसआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है, इसके अलावा, तांबे और जस्ता (जिंक) से भरपूर एक हिस्से (संभवतः एक क्विलॉन ब्लॉक या क्रॉस गार्ड) की खोज से पता चलता है कि हथियार बनाने के कुछ हिस्सों में जानबूझकर पीतल का इस्तेमाल किया गया था, जो अन्य चीजों की मुख्य रूप से लोहे की बनावट से अलग है। यह ऐतिहासिक हथियारों में धातु के चुनाव के प्रति एक बारीक और सोची—समझी सोच को दिखाता है।टिहरी गढ़वाल के पेपोला ढुंग में मिले 94 हथियार 2015 से ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के देहरादून कार्यालय के स्टोर में रखे हुए थे। देहरादून के आरटीआई कार्यकर्ता राजू गुसाईं ने 17 फरवरी 2025 को एएसआई में एक आरटीआई अर्जी दाखिल कर बरामद हथियारों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। इसका जवाब चौंकाने वाला था, जिसमें बताया गया कि अभी तक इन हथियारों की वैज्ञानिक जाँच नहीं की गई है। उनकी आरटीआई के दबाव में एएसआई को इन हथियारों को जाँच के लिए भेजना पड़ा। लेकिन, इसके बाद भी वैज्ञानिक जाँच शुरू नहीं हो रही थी, इसलिए गुसाईं ने नियमित रूप से आरटीआई अर्जियाँ दाखिल कर इस बारे में जानकारी मांगी। हाल ही में, एएसआई ने आवेदक को चार पन्नों की एक रिपोर्ट भेजी है।मिले 94 हथियारों में से एएसआई ने कुल 80 हथियारों की वैज्ञानिक जाँच की। एएसआई की ट्टवैज्ञानिक और संरक्षण शाखा’ ने यह अध्ययन किया। यह जाँच 8 और 9 मई 2025 को की गई थी, और इसकी शुरुआती रिपोर्ट 26 मई 2025 को तैयार की गई। साल 2015 में, टिहरी गढ़वाल के एक दूरदराज के गाँव में जमीन से तलवारें, भाले और अन्य हथियार मिले थे। इन हथियारों के मिलने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन इनकी कोई वैज्ञानिक जाँच नहीं कर रहा था। आरटीआई के दबाव में ही एएसआई को यह जाँच करवानी पड़ी, और यहाँ तक कि वैज्ञानिक जाँच की रिपोर्ट भी आरटीआई के जरिए ही हासिल की गई।
May 12, 2026प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर आज भी यह समझ बैठे हैं कि वह देशवासियों को अगर यह कहेंगे कि भूत आ रहा है और तुम्हें खा जाएगा इसलिए सर के बल खड़े हो जाओ तो वह सर के बल खड़े हो जाएंगे? तो वह बहुत बड़े मुगालते में है वह समय अब बहुत पीछे छूट चुका है जब उनके कहने पर इस देश के लोगों ने घरों की छतों और बालकोनियों में खड़े होकर ताली और थालियां बजाई थी। उनके द्वारा अपने इमोशंस का इस्तेमाल करने की सभी सीमाएं पार हो चुकी हैं। वर्तमान समय में वह देश के लोगों से देश की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राष्ट्र प्रेम और राष्ट्रीय हितों की दुहाई देते हुए एक साल तक सोना न खरीदने पेट्रोल—डीजल की बचत करने के लिए मेट्रो में सवारी करने, खाघ तेल और उर्वरकों का इस्तेमाल न करने सहित विदेश घूमने न जाने तक तमाम जो बातें की जा रही है उनका लोग न सिर्फ मजाक बना रहे हैं बल्कि उनसे सीधे सवाल कर रहे हैं कि आज अगर देश की अर्थव्यवस्था इस बदहाल स्थिति में आकर खड़ी हो गई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? देश के लोगों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 95 तो अब पहुंचा जब 85 पर था तब खाड़ी में युद्ध नहीं हो रहा था तब सरकार कहां सोई हुई थी? इजरायल ईरान युद्ध तो अभी 2 महीने पहले ही शुरू हुआ है क्या इन दो महीना में ही अर्थव्यवस्था डूब गई है जी नहीं इस अर्थव्यवस्था की बदहाली ऐसी होने में पूरे एक दशक का समय लगा है। जिसमें देश के लघु और मध्यम उघोगों को चौपट करने का काम सरकार ने किया है। नोटबंदी के एक तुगलकी फैसले ने देश के उघोग धंधों की ऐसी कमर तोड़ी कि वह फिर संभल ही नहीं सके। जब सत्ता में आए थे और विदेशों में जमा काला धन वापस लाने का और गरीबों के खातों में 15—15 लाख डालने का सफेद झूठ बोला था उसे अगर चुनावी शगुफा भी मान लिया जाए तो क्या हर साल 2 करोड़ रोजगार का वायदा भी शगुफा था अगर हां तो फिर इन शगूफो की फेरहिस्त इतनी लंबी हो चुकी है कि प्रधानमंत्री की किसी भी बात पर देश के लोग भला कैसे भरोसा कर सकते हैं। चुनाव दर चुनाव उनकी जीत को आधार बनाकर उनके अंध भक्तों का यह तर्क की अगर मोदी ने कोई काम नहीं किया है तो लोग उन्हें वोट क्यों दे रहे हैं? महज एक कुतर्क ही कहा जा सकता है क्योंकि अब पूरा देश जान चुका है कि भाजपा सरकार ने चुनावों को भी एक इवेंट मैनेजमेंट कैसे बना दिया है। देश के आम आदमी का जीवन बदहाली के जिस कगार पर आकर खड़ा हो गया है और शिक्षित बेरोजगारों की फौज बढ़ती जा रही है तथा आय के संसाधन घटते जा रहे हैं विदेशी निवेशक शेयर बाजार से अपनी पूंजी निकाल कर भागते जा रहे हैं रुपए की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई कीमत शेष बची ही नहीं है और सरकार कृत्रिम तरीकों के सहारे बेरोजगारी तथा बढ़ती महंगाई की समस्याओं का समाधान खोज रही है उससे अब देश का कोई भला नहीं होने वाला है। आने वाले दिनों में महंगाई और बेरोजगारी का जो बम फटने वाला है इसका अंदाजा सत्ता में बैठे लोगों को हो चुका है। विकसित भारत का सपना बेचने वालों को पता है कि अभी तो सोना न खरीदने की अपील से शायद कुछ दिन काम चल जाएगा लेकिन आने वाले दिनों में उन्हें राष्ट्र के नाम सोना दान करने की कहीं अपील न करनी पड़ जाए? सगूफे और लफ्फे लफ्फाजी से आप लोगों को कितने समय तक मूर्ख बना सकते हैं सरकार चलाने के लिए जनता का विश्वास चाहिए होता है उसे देश के नेता अब खो चुके हैं। पीएम की यह अपील खुद इसका सबूत है कि उन्होंने देश को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
May 12, 2026शहरों की नींव में दफन हो रहे हैं पहाड़ के गांवों के पुश्तैनी आंगन रोजगार की तलाश में शहर गए बेटे, गांव में अकेले रह गए मां-बाप बुजुर्ग आंखें आज भी हर बस और हर कदम में तलाशती हैं अपनों को आज के दौर में वीडियो काल को बना दिया है डिजिटल आत्मीयता देहरादून। पहाड़ की ऊंची चोटियों पर जब कोहरा उतरता है, तो पहाड़ के किसी दूरस्थ गांव की एक धुंधली सी खिड़की में एक बूढ़ा चेहरा टकटकी लगाए नीचे सड़क की ओर देखता मिलता है। वह सड़क जो सालों पहले उनके बेटे को साहब बनाने के लिए शहर ले गई थी। आज सड़क तो चकाचक डामर वाली हो गई है, लेकिन उस पर चलने वाले कदम अब गांव की ओर कम और शहर की ओर ज्यादा बढ़ते हैं।उत्तराखंड के हजारों गांवों की यही कहानी है। पलायन ने सिर्फ गांव खाली नहीं किए, उसने मां-बाप के जीवन से सहारा भी छीन लिया। जिन हाथों ने बच्चों को चलना सिखाया, आज वही हाथ बुढ़ापे में सहारे को तरस रहे हैं। कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनके बच्चे साल में सिर्फ एक-दो बार गांव आते हैं। पहाड़ में पलायन ने केवल गांव खाली नहीं किए, उसने बुढ़ापे का लाठी भी छीन ली है। आज उत्तराखंड के हजारों बुजुर्ग पहरेदार बनकर रह गए हैं। वह अपनी पुश्तैनी जमीन और खंडहर होते मकानों की रखवाली कर रहे हैं इस उम्मीद में कि शायद किसी मोड़ पर उनका लाल वापस आएगा।यह पहाड़ की आज की हकीकत है दो बूढ़े चेहरे एक-दूसरे को निहारते हुए रात काट लेते हैं। आज पहाड़ के गांवों में रिश्तों की डोर व्हाट्सएप वीडियो काल पर टिक गई है। रविवार के दिन जब नेटवर्क साथ देता है, तो शहर में बैठा बेटा चंद मिनटों के लिए अपने बच्चों को दादा-दादी का चेहरा दिखाता है। आज के दौर में बीमार मां या पिता को अस्पताल ले जाने के लिए अब बेटा नहीं, बल्कि गांव का कोई पड़ोसी या टैक्सी वाला सहारा बनता है।आज गांवों तक सड़क पहुँची तो उम्मीद जागी थी कि दूरियां घटेंगी। लेकिन विडंबना देखिए इन्हीं सड़कों पर सवार होकर पहाड़ की जवानी मैदानों की ओर ऐसी उतरी कि फिर मुड़कर वापस नहीं आई। पीछे छूट गए वह बूढ़े मां-बाप जिन्होंने तिनका-तिनका जोड़कर अपने बच्चों को इस काबिल बनाया कि वह शहर जा सकें। आज उन्हीं बच्चों के पास अपने उन माता-पिता के लिए वक्त नहीं है, जिन्होंने अपनी पूरी उम्र पहाड़ की पथरीली खेती और अभावों में काट दी।
May 12, 2026हरिद्वार। 2.5 लाख रूपये व वाहन लूट की फर्जी सूचना पुलिस को देना पांच लोगों को भारी पड़ गया है। पुलिस ने उन्हे गिरफ्तार कर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार कोतवाली भगवानपुर को सलीम पुत्र अलीहसन निवासी 62 फुटा रोड मौहल्ला खाताखेडी थाना मण्डी जिला सहारनपुर उ.प्र. द्वारा सूचना दी गयी कि कुछ लोग मुझसे ग्राम खेड़ी शिकोहपुर से जबरदस्ती मेरी गाड़ी व गाड़ी में रखे करीब ढाई लाख रूपये छीनकर भाग गए है। मामले में पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शूरू कर दी गयी। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरो को खंगालते हुए अपराधियों की तलाश शुरू की जिसके पश्चात नबीर पुत्र जमील उम्र 19 वर्ष, शौकिन पुत्र बाबू उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम मानक माजरा कोतवाली भगवानपुर जनपद हरिद्वार और साहिब पुत्र आलीम उम्र 32 वर्ष निवासी डाडाजलालपुर कोतवाली भगवानपुर जनपद हरिद्वार द्वारा जबरदस्ती वाहन को अपने साथ लेकर जाना पाया गया। जिस पर पुलिस ने तीनो व्यक्तियो को पूछताछ हेतु थाना लाया गया। पूछताछ में आपसी पैसो के लेन देने के सम्बन्ध में प्रकाश में आया। सूचना देने वाले ने एक प्लानिंग के तहत पुलिस को गुमराह करने की नीयत से पुलिस को झूठी सूचना दी गई थी जिस कारण पुलिस ने कार्यवाही करते हुए उपरोक्त तीनों व्यक्तियो जिनके द्वारा मोटरसाइकिल ले जाई थी व सूचना देने वाले अन्य दो व्यक्तियो सलीम पुत्र अलीहसन निवासी 62 फुटा रोड मौहल्ला खाताखेडी थाना मण्डी जिला सहारनपुर उ.प्र. उम्र 48 वर्ष, नौशाद पुत्र शमशाद निवासी सम्राट कालोनी मण्डी समिती रोड थाना मण्डी जिला सहारनपुर उ0प्र0 उम्र 55 वर्ष के विरूद्व अन्तर्गत धारा 172 बीएनएसएस के तहत कार्यवाही की गयी है।