June 13, 2026उत्तराखंड में भाजपा ने गांव-गांव तक पहुंचा दिया चुनावी संदेश भाजपा की प्रदेश में मोदी लहर को फिर से बनाने की है कवायद मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर प्रदेशभर में हो रहे हैं कार्यक्रम मंत्री, विधायक और संगठन पदाधिकारी जिलों में कर रहे जनसंपर्क लाभार्थी सम्मेलनों के जरिए वोटरों तक पहुंचने की बनी है रणनीति विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी दूर हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने को एक बड़े राजनीतिक अभियान में बदल चुकी है। प्रदेश के हर जिले में कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा न केवल केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिना रही है, बल्कि 2027 के चुनाव के लिए माहौल बनाने की कोशिश भी कर रही है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, जिला प्रभारी और संगठन के पदाधिकारी लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। जनसभाएं, संवाद कार्यक्रम, लाभार्थी सम्मेलन, चौपाल और प्रेस वार्ताओं के माध्यम से भाजपा जनता के बीच यह संदेश देने में जुटी है कि उत्तराखंड के विकास की कहानी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व से जुड़ी हुई है।भाजपा की रणनीति का केंद्र बिंदु मोदी ब्रांड है। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि उत्तराखंड में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता आज भी उसके सबसे मजबूत राजनीतिक हथियारों में से एक है। केदारनाथ धाम से प्रधानमंत्री मोदी का भावनात्मक जुड़ाव, चारधाम परियोजनाओं में केंद्र की भूमिका और सीमांत क्षेत्रों के विकास को भाजपा चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बना रही है। भाजपा का सबसे बड़ा फोकस उन लाखों लोगों पर है जो केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि, हर घर जल और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं के लाभार्थियों को पार्टी अपने सबसे मजबूत समर्थक वर्ग के रूप में देख रही है।संगठन की ओर से बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वह लाभार्थियों से संपर्क करें और उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ भाजपा की नीतियों से जोड़ें। यही कारण है कि हाल के कार्यक्रमों में लाभार्थी सम्मेलन प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अभी से चुनावी विमर्श अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही है। पार्टी चाहती है कि 2027 का चुनाव स्थानीय असंतोष, बेरोजगारी, पलायन और महंगाई जैसे मुद्दों के बजाय विकास, राष्ट्रवाद और मोदी नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमे।भाजपा नेताओं के भाषणों में लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि उत्तराखंड में सड़क, रेल, स्वास्थ्य और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, ऑल वेदर रोड, केदारनाथ पुनर्निर्माण, मानसखंड मंदिर माला मिशन और सीमांत गांवों के विकास को उपलब्धियों के रूप में गिनाया जा रहा है। भाजपा प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यों को भी प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है। समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, सख्त भू-कानून और निवेश को बढ़ावा देने जैसे फैसलों को डबल इंजन सरकार की सफलता के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को एक साथ जनता के सामने रखा जाए तो इसका राजनीतिक लाभ 2027 में मिल सकता है।भाजपा के इस व्यापक अभियान ने कांग्रेस की चिंता भी बढ़ा दी है। कांग्रेस लगातार बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भर्ती घोटालों जैसे मुद्दों को उठाकर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है। लेकिन भाजपा की कोशिश है कि चुनावी बहस को राष्ट्रीय नेतृत्व और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन और मोदी की लोकप्रियता है, जबकि कांग्रेस अभी भी संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व के सवालों से जूझती दिखाई देती है।भाजपा के कार्यक्रमों की श्रृंखला को राजनीतिक गलियारों में विधानसभा चुनाव 2027 के लिए शुरुआती चुनावी अभियान के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है, बूथ समितियों को मजबूत बनाया जा रहा है और सोशल मीडिया के माध्यम से युवा मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम चल रहा है। स्पष्ट है कि भाजपा उत्तराखंड में 2027 की चुनावी लड़ाई को केवल राज्य सरकार के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी का पूरा जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल, केंद्र सरकार की योजनाओं और राष्ट्रीय नेतृत्व की छवि को चुनावी मुद्दा बनाने पर है। आने वाले महीनों में यह अभियान और तेज होने की संभावना है, क्योंकि भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर चुकी है।