April 23, 2026देश की आधी आबादी को अपने पक्ष में रखने के लिए जारी राजनीतिक रस्साकशी में पक्ष—विपक्ष के नेताओं ने अपना क्या खूब तमाशा बनाया हुआ है? इसे देश की मातृशक्ति तो देख ही रही है साथ—साथ लोग भी इसका भरपूर लुत्फ ले रहे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा जिसने 3 साल पूर्व नारी वंदन बिल लाकर इसआधी आबादी के वोट बैंक को अपने पाले में खींच लिया था उसकी एक गलती से अब जीती हुई बाजी हारती दिख रही है। भाजपा सरकार इस आरक्षण बिल को एक दशक तक लंबित रखने की गलती न की होती तो उसे न तो बिहार में लाखों महिलाओं के खातों में 10 हजार नगद डालने की जरूरत पड़ती न प्रधानमंत्री को आरक्षण संशोधन बिल व परिसीमन बिल गिरने पर घड़ियाली आंसू बहाने और न राष्ट्रीय संबोधन की जरूरत पड़ती जिसे लेकर अब उनकी चारों तरफ निंदा हो रही है। लोकसभा में बिल पारित न होने के बाद 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने जो राष्ट्र के नाम संबोधन किया उसने तो उनका सारा ही खेल खराब कर दिया। इस राष्ट्रीय संबोधन में पीएम मोदी ने राष्ट्रहित की कोई एक बात भी न कहते हुए सिर्फ विपक्षी दलों पर महिलाओं का विरोधी होने, पाप करने तथा महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाते हुए यही कहा गया कि महिलाएं अपना अपमान कभी नहीं भूलती हैं और वह अब इन दलों व नेताओं को करारा सबक सिखाएगी। उनका यह राष्ट्रीय संबोधन सिर्फ चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन ही नहीं था सरकारी टीवी और रेडियो पर प्रसारित होने वाले संबोधन को लेकर जहां देश के 700 लोगों ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को खत लिखकर सांसदों के विशेषाधिकार हनन का मामला बताते हुए पीएम मोदी के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही गई है। सांसदों के विशेषाधिकार का दोषी पाए जाने पर उनकी संसद की सदस्यता निलंबित किए जाने से लेकर जेल की सजा तक का प्रावधान है लेकिन हम सभी को यह पता है कि लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य चुनाव आयुक्त उन पर कोई कार्रवाई करने वाले नहीं है। लेकिन समूचे विपक्ष ने देश भर में इस बात का प्रचार प्रसार करने के लिए महिलाओं को आरक्षण के नाम पर भाजपा सरकार और पीएम मोदी द्वारा जो संसद से लेकर अपने राष्ट्रीय संबोधन तक नौटंकी कर रहे हैं इसका उद्देश्य महिलाओं को क्या आरक्षण दिलाना था। इसके पीछे उनकी मंशा महिलाओं का हक हड़पने और उनके वोट पर एकाधिकार के जरिए हमेशा सत्ता में बने रहने का एजेंडा ही छिपा था जिसे विपक्ष द्वारा नाकाम कर दिया गया है। इन बिलों के गिरने के बाद भाजपा ने पार्टी की महिलाओं को विरोध प्रदर्शन के लिए उतारा जरूर गया है लेकिन देश की महिलाएं जो उनके मंसूओं को जान समझ चुकी थी उन्होंने भाजपा के इस शो को भी फ्लाप कर दिया है। अब इसे लेकर आम महिलाएं तमाम उन महिला अपराधों को सामने रखकर जिनमें भाजपा नेताओं की संलिप्तता चर्चाओं में रही हैं उनसे ही पूछ रही हैं क्या यही है भाजपा का महिलाओं को दिए जाने वाला सम्मान। कुल मिलाकर भाजपा का यह दांव अब भाजपा पर ही भारी पड़ चुका है। मीडिया खास तौर पर सोशल मीडिया पर इस पूरे प्रकरण को लेकर मोदी और भाजपा पर जबरदस्त हमले किए जा रहे हैं। राजनीति के ज्ञाता तो यहां तक कह रहे हैं कि भाजपा और मोदी ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को फिर से जिंदा होने का अवसर दे दिया है बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो जाती है अब इसे लेकर भाजपा के नेताओं के बीच भी भारी मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण भले ही मिलना तय हो गया हो लेकिन भाजपा को भविष्य में इसका कोई राजनीतिक लाभ होगा इसकी संभावनाएं तो समाप्त हो ही गई है बल्कि इसका उल्टा नुकसान ही होने वाला है।
April 23, 2026रुद्रप्रयाग। सड़क दुर्घटना में देर रात एक तेेज रफ्तार अनियंत्रित कार के गहरी खाई में गिर जाने से तीन लोगों की मौके पर हीं मौत हो गयी। सूचना मिलने पर पुलिस व एसडीआरएफ टीम ने मौके पर पहुंच कर रेस्क्यू अभियान चलाया और तीनों शवों को बाहर निकाला। जिस पर अग्रिम कार्यवाही जारी है।सड़क दुर्घटना का यह मामला भीरी—ककोला मोटर मार्ग का है। यहंा एक वाहन अनियंत्रित होकर करीब 250 मीटर गहरी खाई में जा गिरा, जिससे उसमें सवार तीनों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा देर शाम का बताया जा रहा है, जब वाहन भीरी से औरिंग की ओर जा रहा था। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली ऊखीमठ पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। प्रभारी निरीक्षक मनोज नेगी और एसडीआरएफ पोस्ट अगस्त्यमुनि से उपनिरीक्षक धर्मेंद्र पंवार के नेतृत्व में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। अंधेरा और खाई की गहराई रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती बनी रही, लेकिन टीम ने साहस दिखाते हुए नीचे उतरकर संयुक्त अभियान चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद तीनों शवों को खाई से बाहर निकाल लिया गया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान नवीन सिंह (30 वर्ष), अंशुल (28 वर्ष) और अमित सिंह (35 वर्ष) के रूप में हुई है। सभी मृतक रुद्रप्रयाग जिले के ही निवासी बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया है। बताया जा रहा है कि वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ।
April 23, 2026चमोली। भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट गुरुवार प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर विधिविधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ग्रीष्मकाल हेतु श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा बद्रीनाथ धाम भक्ति और श्रद्धा के भाव से सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल एवं अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कपाट उद्घाटन के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा संपन्न कर देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर स्थित लक्ष्मी मंदिर, गणेश मंदिर तथा आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी सहित अन्य मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना की।मुख्यमंत्री ने धाम पहुंचे तीर्थयात्रियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए यात्रा व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने हेतु हर स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है।*मुख्यमंत्री ने देश विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं से हरित एवं स्वच्छ चारधाम यात्रा में सहयोग करने का आह्वान करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ ही बद्रीनाथ धाम में आस्था, परंपरा और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जो श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य और यादगार अनुभव बनेगा।कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक अवसर पर माणा एवं बामणी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक जागरों के साथ मंदिर प्रांगण में झुमैलो नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे संपूर्ण वातावरण लोक संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी भजन-कीर्तन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम में संचालित भंडारे का रिबन काटकर शुभारंभ किया तथा श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने भंडारा संचालकों से संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और मानव सेवा ईश्वर सेवा उत्थान समिति द्वारा संचालित विशाल भंडारे की सराहना की।इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, बीकेटीसी के सीईओ विशाल मिश्रा, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, रावल अमरनाथ नंबूदरी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, आचार्य वाणी विलास डिमरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
April 22, 2026विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर सख्त निर्देशदेहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर उतरते हुए मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों का व्यापक एवं गहन स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समयबद्धता तथा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विभिन्न स्थलों का भ्रमण करते हुए मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कार्यों की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त करने के साथ-साथ उन्हें और अधिक प्रभावी एवं तीव्र गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि बद्रीनाथ धाम से जुड़े सभी विकास कार्य जिलाधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी में तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा कार्यों की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीआरओ बाईपास रोड, लूप रोड, लेक, आईएसबीटी, सिविक एमिनिटी भवन, टीआईसीसी एवं अराइवल प्लाजा जैसे पूर्ण हो चुके महत्वपूर्ण कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने इन परियोजनाओं के शीघ्र हस्तांतरण हेतु अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन सुविधाओं का लाभ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो।मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से इन सभी परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिससे दीर्घकालिक रूप से इन परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और उपयोगिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में किए जा रहे विकास कार्यों का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थ अनुभव प्रदान करना है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह भी जोर दिया कि सभी कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण प्राथमिकता में रखा जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्य करते समय स्वच्छता, हरित मानकों और सतत विकास के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य को अक्षुण्ण रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों और सतत निगरानी से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित कार्य समय पर पूर्ण होंगे और आने वाले समय में यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक आदर्श, भव्य और सुविधासंपन्न तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा।
April 22, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचकर क्षेत्र का भ्रमण किया तथा वहां आए श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुखद एवं प्लास्टिक मुक्त हरित यात्रा बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर एवं स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए ग्रामीण महिलाओं का आभार व्यक्त किया और उनकी परंपराओं एवं संस्कृति की सराहना की।इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की शत-प्रतिशत “लखपति दीदियों” से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए कहा कि ये उत्पाद न केवल स्थानीय आजीविका को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है और जो गांव पहले “अंतिम गांव” कहे जाते थे, उन्हें अब “प्रथम गांव” की संज्ञा देकर उनके समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार, पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्य प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से सीमांत गांव विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।ग्राम पंचायत माणा, विकासखण्ड ज्योतिर्मठ, जनपद चमोली, आज स्वयं सहायता समूहों और “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां कुल 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ग्राम में एक ग्राम संगठन “घुंघटी महिला ग्राम संगठन” तथा एक क्लस्टर स्तरीय संगठन “योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन” कार्यरत है और विशेष बात यह है कि यहां सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का प्रथम शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है।ग्राम की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक एवं गैर-कृषि कार्यों को बढ़ावा देते हुए आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, फर्नीचर, टोकरी निर्माण, दाल, कालीन, पापड़, मसाले तथा भोजनालय संचालन जैसे विविध कार्यों में संलग्न हैं और इन उत्पादों का विपणन कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इसके अतिरिक्त कृषि, पशुपालन, डेयरी, होमस्टे, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से भी महिलाएं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। स्थानीय उत्पादों को सरस मॉल एवं विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल रही है और वे “लखपति दीदी” योजना से लाभान्वित हो रही हैं।माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्र के समग्र विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय महिलाओं के परिश्रम ने विकास की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।
April 22, 2026देहरादून। शहर के प्रमुख व्यवसायियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने कानून—व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। ‘स्थानीय व्यवसाय और कानून—प्रवर्तन—देहरादून परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि स्पष्ट नीतियों और ठोस कदमों के साथ सुधार किये जाए।बैठक का आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और रेस्टोरेंट व्यवसायी आनंद कांती द्वारा किया गया। बैठक में होटल, रेस्टोरेंट, शिक्षा, परिवहन, रिटेल और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से अनूपमा जोशी, एला गर्ग, कुनाल शमशेर मल्ला, रणधीर अरोड़ा, नवनीत ओबेरॉय, रसिक भाटिया, अविनाश तिवारी, माधव डालवी और हेमंत कूरिच शामिल रहे। बैठक में चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कानूनों का पालन एक समान तरीके से नहीं हो रहा, साथ ही प्रशासन और व्यापारियों के बीच भी संवाद की कमी है, कई नियम अस्पष्ट हैं, जिससे भ्रम पैदा होता है। इसका असर व्यापार और आम नागरिकों की सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है। बैठक में व्यवसाईयों ने प्रशासन को सुझाव दिये कि रेस्टोरेंट के सर्विंग टाइम पर स्पष्टता होनी चाहिए। यदि अंतिम ऑर्डर का समय रात 11 बजे है, तो ग्राहकों को कम से कम 30—45 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि वे आराम से भोजन कर सकें। इससे अनावश्यक विवाद कम होंगे। जबकि पुलिस—व्यापारी समन्वय के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाये जाने चाहिए। हर थाना स्तर पर एक आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए, जिसमें रोजाना बार/रेस्टोरेंट बंद होने के बाद क्लोजिंग स्टेटस के साथ फोटो या वीडियो साझा किए जाएं। इससे पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा। उन्होने यह भी सुझाव दिया कि लाइसेंसिंग में लोकल डोमिसाइल को प्राथमिकता दी जाए। गोवा मॉडल की तरह, बार/लाइसेंस केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों (डोमिसाइल होल्डर्स) को दिए जाएँ। इससे स्थानीय लोगों की जवाबदेही बढ़ेगी। बाहरी तत्वों द्वारा नियमों के उल्लंघन (लेट नाइट, अवैध गतिविधियाँ) पर नियंत्रण होगा। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल लेट नाइट बार से जोड़ना सही नहीं है। ट्रैफिक नियम, ड्राइविंग व्यवहार और सार्वजनिक अनुशासनहीनतों पर एक साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां देर रात तक गतिविधियां होने के बावजूद सख्त कानून—प्रवर्तन और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार के कारण बेहतर व्यवस्था बनी रहती है। बैठके दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि सामाजिक सुरक्षा हेतू. स्कूल स्तर से सुधार की शुरुआत प्रशासन को करनी चाहिए। छात्रों के बीच बिना लाइसेंस वाहन चलाने और बिना हेलमेट स्कूल आने जैसी समस्याओं पर चिंता जताई गई। सुझाव दिया गया कि स्कूलों में सख्त नियम लागू हों और अभिभावकों की जिम्मेदारी तय की जाए। बैठक में अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी चर्चा की गयी। जिनमें पीजी और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों का सत्यापन अनिवार्य किया जाए, युवाओं में बढ़ती आक्रामकता और नशे की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए जागरूकता और सख्ती दोनों जरूरी हैं बैठक में सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि शहर में बेहतर कानून—व्यवस्था के लिए केवल बार या रेस्टोरेंट को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन, पुलिस, श्ौक्षणिक संस्थान, व्यापारी और आम नागरिकख्नसभी के संयुक्त प्रयास और स्पष्ट नीतियां ही देहरादून में सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद वातावरण सुनिश्चित कर सकती हैं।