June 26, 202670 सीटों पर भाजपा ने तैयार की अपनी कोर कमेटियां भगवा बिसात पर चाल चलने को मजबूर होगा विपक्ष मिशन-2027 के लिए कोर कमेटियों का चुनावी चक्रव्यूह बूथ से लेकर टिकट तक की नब्ज टटोलेगा भाजपा संगठन देहरादून। भाजपा ने चुनावी घंटी बजने का इंतजार नहीं किया, बल्कि हर विधानसभा में अपनी चुनावी चौकी बिठा दी है। अब सवाल यह है कि विपक्ष अभी रणनीति बनाएगा या भाजपा की बिसात पर चाल चलने को मजबूर होगा? उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट अभी दूर दिखाई देती है, लेकिन भाजपा ने चुनावी शतरंज की बिसात अभी से बिछा दी है। प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग कोर कमेटियों का गठन कर भाजपा ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार चुनाव केवल प्रचार से नहीं, बल्कि सूक्ष्म संगठनात्मक प्रबंधन के दम पर लड़ा जाएगा।प्रदेश संगठन का यह कदम सामान्य राजनीतिक गतिविधि नहीं माना जा रहा। इसके पीछे बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, स्थानीय असंतोष की पहचान करना, संभावित प्रत्याशियों की ताकत और कमजोरी का आकलन करना तथा सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना प्रमुख उद्देश्य माना जा रहा है।भाजपा की नई रणनीति के तहत प्रत्येक विधानसभा सीट पर गठित कोर कमेटी सीधे प्रदेश नेतृत्व को फीडबैक देगी। इसमें क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियां, जातीय एवं सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे, विकास कार्यों की स्थिति, विपक्ष की सक्रियता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी जैसे विषय शामिल रहेंगे। इसका अर्थ साफ है कि पार्टी अब चुनावी निर्णय केवल देहरादून में बैठकर नहीं बल्कि प्रत्येक विधानसभा से मिलने वाले वास्तविक फीडबैक के आधार पर करेगी।सबसे अधिक फोकस उन सीटों पर किया जा रहा है जहां 2022 के चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों पर सांसद, वरिष्ठ नेता और संगठन पदाधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है ताकि कमजोर बूथों की पहचान कर उन्हें मजबूत किया जा सके। साथ ही उन क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाने की भी योजना है जहां पार्टी का वोट प्रतिशत कम रहा था।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार टिकट वितरण से पहले ही संभावित दावेदारों के प्रदर्शन की निगरानी शुरू कर चुकी है। कोर कमेटियां यह भी देखेंगी कि कौन नेता जनता के बीच सक्रिय है, किसकी स्वीकार्यता अधिक है और किसके खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी है। ऐसे में टिकट की दौड़ अब केवल नेताओं की राजनीतिक पहुंच से नहीं बल्कि उनके जमीनी प्रदर्शन से भी तय होती दिखाई दे सकती है।भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी माहौल को नियंत्रित करना होगी। लगातार दो कार्यकाल सरकार चलाने के बाद स्वाभाविक रूप से जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। बेरोजगारी, पलायन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में कोर कमेटियां केवल चुनावी मशीनरी नहीं बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद का माध्यम भी बनेंगी।दूसरी ओर कांग्रेस अभी संगठनात्मक पुनर्गठन और नेतृत्व की मजबूती में जुटी दिखाई दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का प्रयास कर रही है, लेकिन भाजपा जिस गति से विधानसभा स्तर तक संगठनात्मक ढांचा मजबूत कर रही है, उससे राजनीतिक मुकाबला और रोचक होने की संभावना है।राजनीतिक दृदृष्टि से देखा जाए तो भाजपा का यह कदम केवल संगठन विस्तार नहीं बल्कि चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट का माडल है। बूथ से लेकर विधानसभा और विधानसभा से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक एक मजबूत फीडबैक सिस्टम तैयार कर पार्टी चुनावी जोखिम को पहले ही कम करना चाहती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की यह संगठनात्मक तैयारी 2027 में चुनावी बढ़त दिलाती है या कांग्रेस और अन्य दल स्थानीय मुद्दों के सहारे इस रणनीति को चुनौती देने में सफल होते हैं। लेकिन इतना तय है कि उत्तराखंड का चुनावी रण अब समय से पहले ही गर्म होना शुरू हो चुका है।
June 26, 2026दिल्ली सहित कई ठिकानों पर रेड जारी हरिद्वार। जनपद के चर्चित जमीन घोटाले को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अब इस घोटाले को लेकर विजिलेंस टीम एक्शन में आ गई है। विजिलेंस की टीम ने कार्रवाई तेज करते हुए जिन लोगों के नाम एफआईआर में शामिल हैं, उनके ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विजिलेंस टीम दस्तावेजों और साक्ष्यों की तलाश में अलग—अलग ठिकानों पर पहुंची है। सीओ हर्षवार्धिनी सुमन की जांच के बाद इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ी है। बताया जा रहा है कि उनकी जांच रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए थे। इस प्रकरण में कुछ लोगों पर विभागीय कार्रवाई हुई है। जबकि कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।सूत्र का कहना है कि आईएएस वरुण चौधरी के दिल्ली स्थित आवास पर भी विजिलेंस टीम सर्च के लिए पहुंची है। विजिलेंस मुख्यालय इस पूरी कार्रवाई की सीधी मॉनिटरिंग कर रहा है। सर्च कार्रवाई में जमीन से जुड़े दस्तावेज, फाइलें और अन्य अहम साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं। बता दें कि हरिद्वार के इस जमीन घोटाले को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। वहींं अब विजिलेंस की सक्रियता से साफ संकेत है कि जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
June 26, 2026मलबे की जद में आये कई वाहन, मकान व दुकान चमोली। मानसूनी सीजन अभी शुरू भी नहीं हुआ था उससे पहले ही चमोली जिले के नारायणबगड़ में बादल फटने के कारण हुई तेज बारिश ने तबाही जैसे हालात पैदा कर दिए। जिस कारण भारी मात्रा में मलबा बाजार, स्कूल, दुकानों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया। जिसके चलते कई वाहन मलबे की चपेट में आने के कारण फंस गये।उत्तराखण्ड में अभी मानसूनी सीजन शुरू भी नहीं हुआ है लेकिन यहंा से बादल फटने के चलते हुए तेज बारिश के कारण तबाही की खबरे आना शुरू हो गयी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यहंा चमोली जिले के नारायणबगड़ में तेज बारिश ने तबाही जैसे हालात पैदा कर दिए। देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद भारी मात्रा में मलबा बाजार, स्कूल, दुकानों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया। कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए, जबकि हाईवे घंटों बाधित रहा। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है।बताया जा रहा है कि बीती देर रात हुई अतिवृष्टि के बाद नारायणबगड़ बाजार में भारी मात्रा में पत्थर और मिटृी का मलबा आ गया। राजकीय इंटर कॉलेज परिसर, कई दुकानों और वाहनों में मलबा घुस गया। राष्ट्रीय राजमार्ग भी मलबे से पट गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। आज सुबह से ही बीआरओ की टीम मार्ग को खोलने में जुटी है, जबकि स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले 8 से 10 वर्षों से हर बारिश में इसी स्थान पर भारी मलबा आता है। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी लगातार खतरे की जद में रहता है, लेकिन अब तक स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं किए गए हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार ने इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।
June 26, 2026क्या आप भारत के नागरिक है? यह सवाल आजकल हर एक भारतवासी को डरा रहा है। यह डर बेवजह इसलिए नहीं है क्योंकि अब तक आपकी जेब में जितने भी कार्ड थे जिन्हें बनवाने के लिए आप लंबी—लंबी कतारों में खड़े रहते थे तथा सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे हैं उनमें से कोई भी कार्ड इस बात को प्रमाणित नहीं करता है कि आप भारत के ही नागरिक हैं भले ही वह आधार कार्ड हो, पैन कार्ड हो अथवा आपका वह पासपोर्ट जिसे लेकर आप विदेशों की सैर पर जाते हैं और इसे दिखाकर दावा करते हैं कि आप भारत के नागरिक हैं। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि आपका पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा का अनुमति पत्र है नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं। निर्वाचन आयोग आपके वोटर कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं मानता है वह सिर्फ आपको वोट डालने का ही अधिकार देता है जैसे राशन कार्ड और गैस सिलेंडर खरीदने का। खास बात यह है कि अगर इन सभी कार्डों का भारत की नागरिकता से कोई मतलब नहीं है तो फिर इन कार्डों को बनवाना अनिवार्यता क्यों कहा जाता रहा है? आधार कार्ड को लेकर कहां जाता है कि यह आपका सबसे बड़ा पहचान पत्र है। कहीं जाइए सबसे पहले आपसे आधार कार्ड दिखाने की बात ही कही जाती है। एक अहम और महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब भी नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपनी नागरिकता को प्रमाणित करने के लिए कौन सा दस्तावेज दिखाना पड़ेगा? या जरूरी है इस सवाल के जवाब में वही पुरानी संवैधानिक व्यवस्था जिसमें उसकी वंशावली, जन्म स्थान जैसी चार अहिर्ताए शामिल है का हवाला दिया जाता है। 5—6 दशक पूर्व जिन लोगों का जन्म हुआ है उन्हें पता है कि पहले सरकारी स्तर पर उस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी कि जन्म और मृत्यु के प्रमाण पत्र जारी किए जाते हो। माता—पिता तक को अपने बच्चों की जन्मतिथि सही—सही पता नहीं होती थी स्कूलों में प्रवेश के समय मास्टर जी ही अपनी मर्जी से बच्चों की जन्म तिथि लिख देते थे और नागरिकता का प्रमाण पत्र वही दस्तावेज बन जाते थे। लेकिन अब यह मोदी का नया भारत है वह भी बदला हुआ भारत है। जहां सब कुछ बदला जा चुका है या बदले जाने की कोशिशें जारी है। अब इस भारत में घुसपैठियों का शोर है जिन्हें सरकार खदेड़ने का दावा कर रही है? यह अलग बात है कि पश्चिम बंगाल मेंं चुनाव से पूर्व 27 लाख वोटरों का नाम मतदाता सूची से काटने का जो कारनामा एसआईआर के जरिए किया गया उन्हें न्यायालय भी वोट का अधिकार नहीं दिला पा रहा है लेकिन सरकार अभी तक 100—200 घुसपैठियों को न तलाश कर सकी है न देश से निकाल सकी है भारत का संविधान कहता है कि हर भारतीय को वोट का अधिकार है। यानी कि जो वोट डालने का अधिकार रखता है वह भारत का नागरिक है। क्योंकि यह अधिकार सिर्फ नागरिकों को ही प्राप्त है किसी विदेशी को नहीं हो सकता। तब फिर वोटर कार्ड रखने वालों को भारत का नागरिक क्यों नहीं माना जा रहा है। क्यों उनके वोट का अधिकार छीना जा रहा है? इसके पीछे क्या कोई बड़ा सरकारी षड्यंत्र छिपा है? पीएम मोदी का अपने बारे में कहना है कि जब उनका जन्म हुआ था तो आईटी के एक्सपर्टो द्वारा उनके दिमाग में एक ऐसी चिप फिट कर दी गई थी कि वह छोटा तो सोच ही नहीं सकते हैं। आज तक हालांकि वह स्वयं की पैदाइश को नॉन बायोलॉजिक बताने से लेकर अपने बारे में क्या—क्या कहते रहे हैं उनकी शिक्षा और चाय बेचने वाली तक हर बात एक रहस्य से कम नहीं है। वह क्या कुछ बड़ा करने वाले हैं यह तो पता नहीं लेकिन चर्चा यही है कि यह एनआरसी की तैयारी है। कुछ भी सही फिलहाल हर आदमी को इस बात का डर जरूर सता रहा है कि वह अपनी नागरिकता का प्रमाण पत्र दे भी पाएगा या नहीं? पता नहीं सरकार क्या—क्या मांग ले।
June 25, 2026अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पौड़ी पुलिस को दिए त्वरित जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देहरादून/कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक बुजुर्ग महिला के प्रताड़ना संबंधी वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। वीडियो में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला को रोते-बिलखते और अपने ही परिजनों द्वारा किए जा रहे अमानवीय व्यवहार की दास्ताँ सुनाते देख अध्यक्ष ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने तत्काल पुलिस अधीक्षक पौड़ी को दूरभाष पर निर्देशित किया कि मामले की पूरी गंभीरता के साथ जांच करते हुए आरोपियों के खिलाफ कानूनन कठोर कार्रवाई की जाए और बुजुर्ग महिला को त्वरित न्याय दिलाया जाए।मामला कोटद्वार के पूर्वी झंडीचौड़ (जशोधरपुर चौकी क्षेत्र) का है, जहां 85 वर्षीय वृद्ध माता कुश्मा देवी अपने ही सगे छोटे बेटे और बहू द्वारा गंभीर रूप से प्रताड़ित की जा रही हैं। जिसमें उनके द्वारा उनके विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बुजुर्ग महिला का आरोप है कि उनकी पेंशन की जमा पूंजी से खरीदी गई जमीन पर बने मकान में रहने के बावजूद, उनके साथ लगातार अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और मारपीट की जा रही है, तथा उन्हें बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। बुजुर्ग माता ने स्थानीय पुलिस पर भी पूर्व में शिकायत करने के बाद भी उचित सुनवाई न करने और अपराधियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है।मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा “वृद्ध माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की नींव और धरोहर हैं। देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति में बुजुर्गों का स्थान सर्वोपरि है, और किसी भी बुजुर्ग माता के साथ इस प्रकार का अमानवीय और अमर्यादित व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। माता-पिता अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी और स्नेह बच्चों पर न्यौछावर कर देते हैं, और बुढ़ापे के इस नाजुक मोड़ पर उन्हें इस तरह असहाय छोड़ना या प्रताड़ित करना एक अक्षम्य अपराध है।उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले को महज ‘जमीन का आपसी विवाद’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। आयोग पीड़ित महिला के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। आयोग के अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पुलिस अधीक्षक पौड़ी गढ़वाल को कहा है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जो समाज में एक कड़ा संदेश दे। मामले में वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007′ के तहत त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की गई है ताकि बुजुर्ग माता को जीवन के इस पड़ाव में पूर्ण सुरक्षा, मानसिक शांति और सम्मान मिल सके।
June 25, 2026सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पुनर्वास व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के दिए निर्देश देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने आज केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह एवं किशोरी गृह का स्थलीय निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आवासीय संस्थानों में रह रहे बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं पुनर्वास संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा—निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाल सुधार गृह में रह रहे बालकों से संवाद स्थापित कर उनकी दिनचर्या, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित किया जाए, जिससे बच्चों की श्ौक्षिक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास हो सके। साथ ही उन्होंने बाल सुधार गृह में निवासरत सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि संस्थान में रह रहे प्रत्येक बालक की नियमित काउंसलिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायता मिल सके। उन्होंने बच्चों के पुनर्वास एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी बल दिया।नारी निकेतन एवं किशोरी गृह के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में निवासरत किशोरियों एवं संवासिनियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।जिलाधिकारी ने परिसर में साफ—सफाई की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों में रहने वाले बच्चों एवं महिलाओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वर्तमान में नारीनिकेतन में 160 संवासनिया, बाल सुधार ग्रह में 07 किशोर, किशोरी संप्रेक्षण ग्रह में 12 किशोरिया है।निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नमिता ममगाईं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, सदस्य पीएन जौहर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।