August 18, 2026पौड़ी। सतपुली तहसील में भारी बारिश के कारण एक बड़ा हादसा हो गया। द्वारीखाल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरगांव (भलगांव) में एक मकान पर भारी मात्रा में मलबा गिरने से पूरा मकान धराशाई हो गया। मलबे में चार लोगों के दबे होने की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम सक्रिय हो गई है।स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात भर की लगातार बारिश के बाद सुबह के समय पहाड़ी ढलान से बड़ी मात्रा में मिटृी, पत्थर और मलबा फिसलकर मकान पर आ गिरा। जिस कारण मकान पूरी तरह ढह गया और उसके नीचे रहने वाले लोग मलबे में दब गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस मकान में एक मैक्स चालक अपने परिवार के साथ रहता था। घटना की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। सतपुली और लैंसडौन से एसडीआरएफ की टीम तथा प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं। मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है, जिससे कई जगहों पर भूस्खलन और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।जिला प्रशासन ने सतपुली तहसील के संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर रखा है। एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे असुरक्षित स्थानों से सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। पहाड़ी ढलानों के पास बने मकानों में रहने वाले परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एसडीआरएफ टीम के पहुंचने के बाद मलबा हटाने का काम मशीनरी और मानव बल दोनों से किया जा रहा है। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाएगा। प्रशासन प्रभावित परिवार को राहत सामग्री और मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू करने वाला है।
August 18, 2026राजनीति में विरोधी को नाम देना पुरानी परंपरा है। कभी कोई देशद्रोही कहलाता है, कभी अराजकतावादी, कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग और कभी किसी नए विशेषण से संबोधित किया जाता है। लेकिन लोकतंत्र की विडंबना तब सामने आती है, जब सत्ता की ओर से दिया गया कोई तंज विरोधियों के लिए ही पहचान और प्रतिरोध का प्रतीक बन जाए। दिमागी नक्सल भी अब इसी बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री के तंज के बाद इस शब्द को राजनीतिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किए जाने और बड़ी संख्या में लोगों के इससे जुड़ने के दावे ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है क्या राजनीतिक विरोधियों को दिए गए विशेषण अब उनके खिलाफ नहीं, बल्कि उनके पक्ष में काम करने लगे हैं? यह केवल किसी नए राजनीतिक समूह के गठन का मामला नहीं है। इसके पीछे भारतीय राजनीति की बदलती भाषा और सोशल मीडिया के दौर में बन रहे नए राजनीतिक व्यवहार को समझने की जरूरत है। सत्ता जब किसी विरोधी विचार को खारिज करने के लिए एक कठोर विशेषण इस्तेमाल करती है तो वह शायद तत्काल राजनीतिक हमला समझती है। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में शब्दों की यात्रा सत्ता के नियंत्रण में नहीं रहती। वही शब्द मीम बनता है, अभियान बनता है और कभी-कभी राजनीतिक पहचान का हिस्सा भी बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात है। लोकतंत्र का मूल स्वभाव ही असहमति है। सरकार की नीतियों पर सवाल करना, बेरोजगारी पर आवाज उठाना, महंगाई पर बहस करना, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली पर सवाल पूछना या किसी कानून का विरोध करना नागरिक जीवन का हिस्सा है। इन सवालों के जवाब तर्क और तथ्यों से दिए जाने चाहिए। यदि हर आलोचक को किसी खतरनाक राजनीतिक खांचे में डाल दिया जाएगा तो लोकतांत्रिक संवाद की जगह आरोपों की राजनीति ले लेगी। फिर मुद्दा यह नहीं रहेगा कि सवाल सही है या गलत। मुद्दा यह बन जाएगा कि सवाल पूछने वाला किस खेमे में है। यही स्थिति लोकतंत्र के लिए सबसे अधिक चिंताजनक है। दिमागी नक्सल नाम से सामने आए राजनीतिक प्रयोग को केवल मजाक या सोशल मीडिया की सनसनी मानकर खारिज करना भी जल्दबाजी होगी। क्योंकि जनता किसी राजनीतिक पहचान से क्यों जुड़ती है, यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर बड़ी संख्या में लोग सचमुच इससे जुड़ रहे हैं तो मुख्यधारा की पार्टियों को यह समझना होगा कि जनता के भीतर किसी तरह की राजनीतिक बेचौनी मौजूद है। लेकिन यहां एक दूसरी कसौटी भी है। किसी तंज को अपना नाम बना लेना आसान है, राजनीति करना कठिन। सोशल मीडिया पर समर्थन और चुनावी मैदान में समर्थन एक चीज नहीं है। चुनाव संगठन, उम्मीदवार, बूथ और स्थानीय मुद्दों के दम पर जीता जाता है। इसलिए इस नए प्रयोग की असली परीक्षा तभी होगी जब यह नाम से आगे बढ़कर नीति और कार्यक्रम की बात करेगा। आज भारतीय राजनीति को सबसे ज्यादा जरूरत भाषा में संयम और बहस में गंभीरता की है। राजनीतिक विरोधी दुश्मन नहीं होते। सत्ता बदलना लोकतंत्र की सामान्य प्रक्रिया है। आज जो सत्ता में है, कल विपक्ष में हो सकता है। इसलिए ऐसे विशेषणों की राजनीति अंततः किसी एक दल को नहीं, पूरी राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाती है। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को यह साबित करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि वह सवाल पूछने के कारण राष्ट्रविरोधी नहीं है। सवाल पूछना नागरिक अधिकार है और सत्ता से जवाब मांगना लोकतंत्र की आत्मा। दिमागी नक्सल जैसा शब्द अगर अब राजनीतिक पहचान बन रहा है तो इसे केवल विरोधियों की चाल कहकर खारिज करने के बजाय सत्ता और विपक्ष दोनों को इससे पैदा हुए संदेश को पढ़ना चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे खतरनाक चीज असहमति नहीं, असहमति से डर है। तंज से राजनीति चमक सकती है, लेकिन लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सत्ता अपने आलोचक की आवाज सुनती है और आलोचक सत्ता के सामने तथ्य के साथ खड़ा होता है। इसलिए जरूरत किसी नए विशेषण की नहीं, एक ऐसी राजनीतिक भाषा की है जिसमें सवाल का जवाब सवाल से नहीं, तर्क से दिया जाए। यही लोकतंत्र की असली परीक्षा है।
August 18, 2026नैनीताल। वनभूलपुरा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल दीं। एसी ठीक करते समय करंट की चपेट में आए 44 वर्षीय पिता को बचाने पहुंची उनकी 12 वर्षीय बेटी भी करंट की चपेट में आ गई। हादसे में पिता—पुत्री दोनों की मौत हो गई।जानकारी के अनुसार 44 वर्षीय नदीम कार के गैराज में काम करते थे। सोमवार रात वह घर की छत पर एसी में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने पहुंचे थे। इसी दौरान वह अचानक करंट की चपेट में आ गए। नदीम की चीख सुनकर परिवार में अफरा—तफरी मच गई। पिता को करंट से जूझता देख उनकी 12 वर्षीय बेटी अलिस्बा उन्हें बचाने के लिए दौड़ी। बताया जा रहा है कि पिता को हाथ लगाते ही अलिस्बा भी बिजली की चपेट में आ गई। परिजनों और आसपास के लोगों ने तत्काल बिजली की आपूर्ति बंद कराई और दोनों को गंभीर हालत में डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने जांच के बाद पिता—पुत्री दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया। वनभूलपुरा कोतवाल दिनेश फर्त्याल के अनुसार, पोस्टमार्टम कराया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी में पास स्थित खुले बिजली के पोल से करंट फैलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि अलिस्बा तीन बहनों में सबसे बड़ी थी और गुरु तेग बहादुर स्कूल में कक्षा छह की छात्रा थी। जिस उम्र में उसके हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए थे, उसी उम्र में पिता को बचाने की कोशिश करते हुए उसकी भी जान चली गई।
August 18, 2026हरिद्वार। साबिर पाक के सालाना उर्स के बीच बीती रात दरगाह पहाड़ी गेट के पास अजमेरी बाजार में ज्वेलरी की दुकानों में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और बाजार में अफरातफरी मच गई। आग की लपटें उठती देख स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और पुलिस के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू कर दिया।बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, लेकिन करीब 20 मिनट तक दमकल की टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी। इस दौरान आग तेजी से फैलती रही, जिससे आसपास की दुकानों में भी आग लगने का खतरा पैदा हो गया। स्थानीय लोगों ने पानी और उपलब्ध संसाधनों के सहारे आग बुझाने का प्रयास किया। उर्स के चलते कलियर में इन दिनों जायरीनों की भारी भीड़ है। ऐसे में बाजार के बीच दुकानों में आग लगने से मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। करीब 20 मिनट बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद आग पर काबू पाने की कार्रवाई तेज की गई। आग लगने के कारणों और दुकानों में हुए नुकसान का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आग किस वजह से लगी, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा। साबिर पाक के सालाना उर्स के चलते कलियर में देशभर से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंच रहे हैं। ऐसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले समय में मुख्य बाजार में आग लगने तथा दमकल की टीम के पहुंचने में देरी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
August 17, 2026कहां, भाजपा नेता बताएं क्या रामदेव भी दिमागी नक्सल हैदेहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता अधिनियम प्रताप ने स्वामी रामदेव के उस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि जैनजी और नौजवानों की बात नहीं सुनी गई तो मोदी सरकार के खिलाफ अगर उन्हें अनशन भी करना पड़ा तो वह करेंगे। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि लंबे समय के बाद स्वामी रामदेव की आत्मा जगी है और यह एक अच्छा संकेत है । उन्होंने कहा रामदेव संकल्प के पक्के माने जाते हैं और जाहिर है देश के जो हालात है उसमें इस तरह के सत्याग्रह और इस तरह के संघर्ष की आज महत्ती जरूरत है ।धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि अगर रामदेव सड़कों पर आते हैं तो निश्चित तौर पर जो विपक्षी दल है उनको भी उन पर विचार करना पड़ेगा और सरकार का जो पूरी तरह से देश में फैलियर हो चुका है उसको देखते हुए उनके संघर्ष में सहयोग करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश का नौजवान हताशा में है और प्रधानमंत्री यह कहने में लगे हैं की वह लोग नक्सली भावना से पीड़ित हैं। जो आंदोलन कर रहे हैं उन्होंने भाजपा के नेताओं से कहा कि अब जब रामदेव जी स्वयं अपने बयान दे चुके हैं भाजपा के प्रवक्ताओं को बताना होगा की क्या रामदेव भी नक्सली दिमाग के हैं और सरकार के विरुद्ध जो बातें कर रहे हैं वह ” दिमागी नक्सल”के दिमाग की ही पैदाइश हो सकती है।
August 17, 2026नई दिल्ली में NICDIT की शीर्ष मॉनिटरिंग बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने वर्चुअल प्रतिभाग किया देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास से नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) की तृतीय शीर्ष मॉनिटरिंग बैठक में वर्चुअल प्रतिभाग किया। बैठक में देश में औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति, उनके समयबद्ध क्रियान्वयन तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास की समीक्षा की गई।बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड में विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC), खुरपिया की प्रगति एवं राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार IMC खुरपिया को प्रदेश के औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने और इसके समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं सफल विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए निर्धारित 1,002 एकड़ भूमि पूरी तरह NUITL के कब्जे में है और वर्तमान में परियोजना स्थल पर किसी प्रकार की बाधा नहीं है। इससे परियोजना के निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक आधार तैयार हो चुका है।उन्होंने बताया कि IMC खुरपिया के विकास के लिए EPC अनुबंध 20 मार्च 2026 को निष्पादित किया जा चुका है और निर्माण कार्य भी प्रारम्भ हो गया है। परियोजना के तहत कुल 24.1 किलोमीटर Right of Way (ROW) को क्लियर कर EPC ठेकेदार को उपलब्ध करा दिया गया है, जिसके बाद सड़क निर्माण सहित अन्य आवश्यक कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी बड़े औद्योगिक क्लस्टर की सफलता केवल औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके लिए मजबूत कनेक्टिविटी, विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति और आधुनिक ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर का होना अत्यंत आवश्यक है। इसी दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा IMC खुरपिया की बाह्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा नागला-किच्छा SH-44 के लगभग 10.7 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन किए जाने के लिए आवश्यक समन्वय एवं कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। यह मार्ग IMC खुरपिया को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करने के साथ-साथ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि परियोजना के लिए निर्बाध एवं पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में PITCUL द्वारा 400/220 केवी उपकेंद्र के समयबद्ध निर्माण के लिए आवश्यक कार्यवाही एवं समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत विद्युत एवं सड़क कनेक्टिविटी IMC खुरपिया में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए एक मजबूत आधार उपलब्ध कराएगी।मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि IMC खुरपिया के ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों को दिसंबर 2028 तक समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के प्रत्येक चरण की निरंतर निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय तथा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और गति बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि IMC खुरपिया उत्तराखण्ड में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि परियोजना के विकास के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं कौशल विकास के अवसर प्राप्त हों और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो।मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को निर्धारित समयसीमा में धरातल पर उतारने के लिए भारत सरकार तथा NICDIT/NICDC द्वारा गठित SPV से आवश्यक सहयोग एवं समन्वय की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से IMC खुरपिया को एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा।उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार परियोजना से जुड़े सभी राज्य स्तरीय विषयों के समाधान के लिए तत्पर है और IMC खुरपिया के विकास में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी एवं प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि IMC खुरपिया आने वाले समय में उत्तराखण्ड के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप उत्तराखण्ड में आधुनिक औद्योगिक आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इस अवसर पर सचिव श्री विनय शंकर पाण्डेय भी उपस्थित रहे |