सूबे में मजारों का जाल बड़ा षड्यंत्र !

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मजारों के मालिकों का कोई अता पता नहीं
खादिम (संचालक) ध्वस्तिकरण से पूर्व फरार
शासन—प्रशासन जुटा कुंडली खंगालने में

देहरादून। अवैध मजारों पर बीते कुछ दिनों से लगातार बुलडोजर की कार्यवाही जारी है। अब तक शासन प्रशासन और वन विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई में 300 से अधिक मजारों को तोड़ा जा चुका है जबकि कार्यवाही अभी भी जारी है। आज जहां राजधानी दून के सुद्दोवाला और बंसीवाला में कई अवैध मजारों पर बुलडोजर चलाया गया वही पहाड़ से लेकर मैदान तक की जा रही इस कार्रवाई के दौरान मजारों के मालिकों और संचालकों (खादिमों) का कोई विरोध या दावेदारी सामने न आने पर प्रशासन भी हैरान है। अधिकारियों को अब यह लगने लगा है कि कहीं देवभूमि में इन मजारों की आड़ में कोई बड़ा षड्यंत्र तो नहीं रचे जाने की तैयारी चल रही थी? शासन—प्रशासन अब इसके पीछे का सच जानने की तैयारियों में जुट गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पहले तमाम विभागों द्वारा ऐसी धार्मिक संरचनाओं का सर्वे कराया गया जिसमें 1000 से अधिक मजारों का पता चला और पाया गया कि इनके जरिए 118 61 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, अब इनके खिलाफ ध्वस्तिकरण की कार्यवाही चल रही है। पहाड़ से लेकर मैदान और जंगलात तक में हुई इस कार्रवाई में अब तक 300 से अधिक मजारों को तोड़ा जा चुका है लेकिन इसका विरोध या मालिकाना हक की दावेदारी करने वाले गिने—चुने लोग ही सामने आए हैं। जिसे लेकर अधिकारियों का माथा ठनका तो उन्होंने शासन के कानों तक इस बात को पहुंचाया है। मजार किसने बनवाई और कौन यहां खादिम बनकर पूजा पाठ कराता है तथा इन मजारों के संचालन के लिए फंडिंग कहां से हो रही है? यह ऐसे सवाल है जिनका जवाब अब तलाशा जाना जरूरी हो गया है। क्यों मालिकाना हक का दावा करने वाले सामने ही नहीं आ रहे हैं और खादिम ध्वस्तिकरण से पहले ही लापता होते जा रहे हैं। ऐसे में इन मजारों के निर्माण और संचालन से अब अधिकारियों को षड्यंत्र की बू आ रही है। उनका मानना है कि इसके पीछे देवभूमि के खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र रचने की कोशिश भी हो सकती है?
प्रशासन द्वारा अब इन मजारों का निर्माण कराने वालों व खादिमों (संचालनकर्ताओं) की तलाश शुरू कर दी गई है। जिससे इन मजारों के पीछे के कारणों का पता चल सके। जहां तक बात इन मजारों पर कार्रवाई की है तो सीएम धामी सभी अवैध धार्मिक सरचंनाओं को हटाने की घोषणा कर चुके हैं और इन पर बुलडोजर की कार्रवाई लगातार जारी है।


गलती से तोड़ी गई बोर्ड की मजारः शम्स

देहरादून। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स का कहना है कि वक्फ बोर्ड की जिन मजारों को तोड़ा गया वह गलतफहमी में तोड़ी गई है इन मजारों के बारे में किसी ने प्रशासन को यह बताया ही नहीं कि यह वक्फ बोर्ड की मजारें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मजारों का संचालन कुछ लोग अपनी निजी संपत्ति के तौर पर गलत तरीके से कर रहे थे। हमारी सरकार किसी भी धर्म या जाति के लोगों का दिल दुखाने का काम नहीं करेगी।

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