- कांग्रेस में घमासान मचना स्वाभाविक, भाजपा में भी खटपट
- ‘अवकाश’ पर प्रदेश की राजनीति में होने वाला है कुछ बड़ा
देहरादून। राजनीति में ‘अर्जित’ अवकाश पर आमजन आश्चर्य चकित हैं। राजनेताओं के इस ‘खेल’ को आमजन बखूबी समझती है और चुनावी साल में तो इस प्रकार के ‘खेल’ चर्चा में तो आते ही हैं। प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के अंदर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है यह तो कई बार सामने आ चुका है। लेकिन राजनीति में अर्जित अवकाश की राजनीति किसी बडे़ तूफान के आने से पहले की ‘खामोशी’ लग रही है।
बता दें कि सत्ता से दूर कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए वह सब कुछ करेगी, जिसकी जरूरत होगी। इसके लिए कांग्रेस ने अपने मोहरे चलने शुरू कर दिए है। वही भाजपा भी यही चाहेगी कि सत्ता उन्हीं के पास रहे और वह भी इसके लिए अपनी ‘चाल’ चलने में लगी है। अभी हालिया मामला कांग्रेस के बडे़े नेता हरीश रावत का है। उन्होंने 15 दिन के अर्जित अवकाश के बहाने कांग्रेस और भाजपा दोनों को सकते में डाल रखा है। भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकारों की माने तो यह अर्जित अवकाश कोई बड़ा तूफान लेकर आने वाला है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो यह साफ है कि हरदा के अवकाश के बाद वह कुछ बड़ा करने वाले हैं और उनकी अगली चाल जो भी होगी वह प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल लाने के लिए काफी है। वैसे भी प्रदेश में जल्द ही विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में अपनी-अपनी साख बचाने और सुधारने की दिशा में नेता लगे हुए है। प्रदेश में कोई बड़ा राजनीतिक तूफान आने का अंदेशा ‘हरदा’ की सोशल मीडिया पोस्ट से भी लगाया जा रहा है। हाल ही में ‘हरदा’ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर सभी को आश्चर्य चकित कर दिया है। इसके बाद सभी इस पोस्ट पर अपनी-अपनी राय दे रहे है, लेकिन
इस पोस्ट के मायने काफी अहम है।
हरदा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि मैंने 15 दिन का अर्जित अवकाश लिया। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मध्य वर्षों काम किया। इसलिये अर्जित अवकाश का महत्व मेरे मन में रचा-बसा है और अवकाश भी ऐसा लिया जिसके दौरान मैं निरंतर अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा कर रहा हूं। मेरा सौभाग्य है कि मैं जहाँ कही जाता हूँ तो ये लगता है कि कांग्रेस लोगों के बीच में आ गईई है। फिर भी कई लोग दनादन गोले बरसा रहे हैं। मुझ पर गोले बरसाने वालों में तीन प्रकार के लोग हैं। एक तो मेरे कुछ कांग्रेस के भाई-बहन हैं। मैं उनसे तो पूछ ही सकता हूं कि क्या अर्जित अवकाश लेना अपराध है? अर्जित अवकाश लेने से मैंने क्या ऐसा कर दिया, जिससे हमारे साथियों को गुस्सा व चिंतित होकर के दनादन सोशल मीडिया में मुझ पर गोले दागने पड़ रहे हैं।
इन लोगों में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने 2022 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मामले को मुझ पर चस्पा करने के लिए आईटी का सहारा लेकर क्रिएटिव बनाये और पोस्ट डाली, उनके ये कृकृत्य मेरे पास आज भी संरक्षित हैं और आज भी ये आईटी का सहारा लेकर मेरी छवि बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरे वह लोग हैं जो कांग्रेस के कटु आलोचक हैं, उनमें से आधे लोग भाजपानिष्ठ हैं, जिन्होंने हमारे नेताओं और हमारी हमेशा आलोचना की है। वह भी मेरे अर्जित अवकाश से बहुत बेचैन हैं और लंबे-लंबे लेख लिखे जा रहे हैं, लंबी-लंबी पोस्ट डाले जा रहे हैं, लंबी-लंबी कासि्ंटग हो रही है, फेसबुक/सोशल मीडिया पर यह जताने की कोशिश हो रही हैं कि हरीश रावत कांग्रेस पर अब भार ही भार है। जब उन लोगों का पूरा ब्यौरा देखा तो आश्चर्य हो रहा है कि उनको कांग्रेस की इतना चिंता क्यों हो रही है, जो वह हरीश रावत रूपी भार को निपटा देना चाहते हैं? आप उनकी पोस्ट व लेखों को पढ़िए तो उन्होंने ढूंढ-ढूंढ करके मेरे सार्वजनिक जीवन के उन प्रसंगों को उकेरा है, जहां मैं विफल हुआ हूं या हारा हूं। इनमें से कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है कि उसने समालोचना के तौर पर भी कांग्रेस के पक्ष को रखा हो! हमेशा भाजपा के पक्ष को रखा है और कांग्रेस पर बरसते रहे हैं, मगर उनको आज कांग्रेस की बहुत चिंता हो रही है तो मैं कम से कम इस बात का सुकून महसूस कर रहा हूं कि बहुत सारे कांग्रेस के आलोचकों को मैंने अपने इस अर्जित अवकाश की बात कहकर इन्हें कांग्रेस के पक्ष में कर दिया है।
इसके साथ ही हरदा ने पोस्ट में कई अन्य बातों का जिक्र किया है। पोस्ट के माध्यम से जहां उन्होंने कांग्रेस के नेताओं पर तंज कसे हैं वही उन्होंने भाजपा को भी घेरा है। पोस्ट में उन्होंने यह भी संकेत दिए है कि वह कुछ नया करने वाले है। इसके साथ ही उन्होंने पिछले चुनावों का भी जिक्र किया है। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा तो होने वाला है पर क्या! यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।




